सर्वे जो नींद उड़ा देगा

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पहला सर्वे जो नींद उड़ा देगा,सोनिया गांधी, शरद पवार की।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पहला ऑपिनियन पोल भी आ गया है। एबीपी न्यूज/सी-वोटर के सर्वे के मुताबिक, शिवसेना-बीजेपी को दो तिहाई से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।
एबीपी न्यूज-सी वोटर के ऑपिनियन पोल में महाराष्ट्र जीत रही है शिवसेना-बीजेपीसर्वे के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद बने हुए हैंअकेले लड़ने पर भी बीजेपी को बहुत ज्यादा नुकसान होने की संभावना नहीं हैऑपिनियन पोल के मुताबिक, साथ लड़ने पर भी एनसीपी-कांग्रेस को नहीं हो रहा फायदावक़्त नहीं है?
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है। इसके मुताबिक, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिवसेना फिर से वापसी कर रही हैं। एबीपी न्यूज/सी-वोटर के सर्वे के मुताबिक, दोनों पार्टियां अगर साथ लड़ती हैं तो 200 के आंकड़े को पार कर सकती हैं। वहीं, कांग्रेस और एनसीपी के लिए एकबार फिर मुश्किल हो सकती है। वर्तमान सीएम देवेंद्र फडणवीस सीएम के रूप में पहली पसंद बने हुए हैं।
बताते चलें कि 2014 के विधानसभा चुनाव शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। यही नहीं कांग्रेस और एनसीपी ने भी अलग-अलग ही चुनाव लड़ा था। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे कुल 122 सीटें मिली थीं। वहीं, दूसरे नंबर पर रही शिवसेना को 63 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को कुल 41 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। बता दें कि कांग्रेस और एनसीपी के कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर शिवसेना या बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
शिवसेना-बीजेपी साथ आई तो क्या होगा?
सर्वे के मुताबिक, बीजेपी और शिवसेना साथ-साथ चुनाव लड़ते हैं तो दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार हो सकता है। अनुमान है कि 288 में से इस गठबंधन को 205 सीटों पर जीत मिल सकती है। कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन को 55 सीटों पर जीत मिल सकती है। इसके अलावा अन्य को 28 सीटें मिलने का अनुमान है। वोट प्रतिशत की बात करें तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 46 प्रतिशत, कांग्रेस-एनसीपी को 30 प्रतिशत और अन्य को 24 पर्सेंट वोट मिल सकते हैं।
शिवेसना-बीजेपी का गठबंधन टूटा तो क्या होगा?
अभी तक बीजेपी और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 2014 में भी इसी कारण से गठबंधन टूट गया था और दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ी थीं। इस बार भी अगर ऐसा होता है तो सबसे बड़ा झटका शिवसेना को लग सकता है। सर्वे के मुताबिक, अकेले लड़ने पर बीजेपी को 144, शिवसेना को 39, कांग्रेस को 21, एनसीपी को 20 और अन्य को 64 सीटें मिल सकती हैं। ऐसी स्थिति में बीजेपी को 31 प्रतिशत, शिवसेना को 15 प्रतिशत, कांग्रेस को 16 प्रतिशत, एनसीपी को 12 प्रतिशत और अन्य को 26 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है।