अमृतसर ट्रेन दुर्घटना पर बड़ा खुलासा

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अमृतसर ट्रेन हादसा: आयोजन के लिए नहीं ली गई थी अनुमति, जांच रिपोर्ट में खुलासा
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (CM Amarinder Singh) ने गुरुवार को इस पूरे मामले में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.
सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
अमृतसर: अमृतसर में दशहरे के मौके पर आयोजित कार्यक्रम (Amritsar Train Tragedy) को लेकर पहले किसी से अनुमित नहीं ली गई थी. ना ही सेफ्टी और सिक्यूरिटी को लेकर कोई अंडरटेकिंग दिया गया था. इस बात का खुलासा जांच रिपोर्ट में हुआ है. इस रिपोर्ट के आने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (CM Amarinder Singh) ने गुरुवार को इस पूरे मामले में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस आयोजन के लिए (Amritsar Train Tragedy) आयोजक के पास किसी तरह का अनुमति पत्र नहीं था, उन्होंने यह आयोजन गैर-कानूनी तरीके से कराया. बता दें कि अमृतसर (Amritsar Train Tragedy) में दशहरे के दिन रामलीला देखने आए लोगों को ट्रेन ने कुचल दिया था. भीड़ होने की वजह से कुछ लोग मैदान के पास ही मौजूद पटरी पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. इसी बीच अमृतसर (Amritsar Train Tragedy) के जोड़ा फाटक के पास से दो ट्रेनें गुज़री और महज़ 32 सेकेंड में  61 लोगों की जानें चली गई थी.
गौरतलब है कि अमृतसर ट्रेन हादसे की मजिस्ट्रेट जांच में पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू को ‘क्लीन चिट’ दे दी गई है. वह दशहरा के उस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थीं जिस दौरान हुए ट्रेन हादसे में करीब 60 लोगों की जान चली गई थी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हादसे की जांच के लिए सरकार द्वारा विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए जालंधर संभागीय आयुक्त बी पुरुषार्थ ने कार्यक्रम का आयोजन करने वाले कांग्रेस के एक पार्षद के बेटे के साथ ही अमृतसर जिला प्रशासन, नगर निगम, रेलवे एवं स्थानीय पुलिस के अधिकारियों पर अभियोग लगाया.
दरअसल, 19 अक्टूबर को दशहरा था. उस दिन अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास लोगों की भीड़ रावण दहन देख रही थी. उसी दौरान वहां से गुजरी एक तेज रफ्तार ट्रेन ने उन्हें कुचल दिया था. मामले की मजिस्ट्रेटी जांच की 300 पन्नों की रिपोर्ट पिछले महीने पंजाब के गृह सचिव को सौंपी गई थी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट में जोर देकर यह कहा गया था कि कांग्रेस पार्षद के बेटे सौरभ मिट्ठू मदान और सिद्धू परिवार के एक करीबी सहयोगी को उस स्थान पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए थी.