Sunday, August 1, 2021
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सिंधिया पार्ट 2 होने जा रहा है,कांग्रेस में?

म्‍ध्य प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव की तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी कांग्रेस की किलेबंदी में सेंध लग गई है। उपचुनाव से पहले यह झटका वैसा ही हो सकता है जैसा ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने से लगा था।

मध्य प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव की तैयारियों को पुख्ता करने में जुटी कांग्रेस की किलेबंदी में सेंध लग गई है। वरिष्ठ नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई में यह किला कभी भी ढह सकता है। उपचुनाव से पहले यह झटका वैसा ही हो सकता है, जैसा ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने से लगा था। भाजपा उपचुनाव में जीत के दावेदार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में है।

पृथ्वीपुर विधानसभा की सीट कांग्रेस विधायक ब्रजेंद्र सिंह राठौर के निधन से रिक्त हुई है। राठौर कद्दावर नेता थे और अपने संपर्कों के बल पर चुनाव जीतते रहे। उनके निधन से सहानुभूति राठौर परिवार के प्रति है। यहां से संभावित प्रत्याशी उनके बेटे नीतेंद्र सिंह राठौर हैं। तीन-चार दिन पहले भाजपा नेताओं ने नीतेंद्र से मुलाकात की है।

उधर, खंडवा लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की तगड़ी दावेदारी है और भाजपा के पास विकल्प का अभाव है, लेकिन अरुण यादव को लेकर मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता कमल नाथ सहज नहीं हैं। उन्होंने निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को आगे किया है। शेरा ने अपनी पत्नी के लिए टिकट मांगा है। अरुण यादव इससे नाराज हैं और प्रदेश कांग्रेस की बैठकों से दूर हैं। भाजपा नेता उनसे चर्चा कर रहे हैं।

लोकसभा में अरुण यादव

नंदकुमार सिंह चौहान के अवसान के बाद रिक्त हुई खंडवा लोकसभा सीट पर रस्साकशी का दौर अपनी चरम पर है। बात कांग्रेस की करे तो कुछ दिन पहले अरूण यादव का नाम उनके समर्थकों ने खूब जोरशोर से चलाया था। संभावना भी लगभग तय ही मानी जा रही थी मगर कमलनाथ ने पिछले दिनों यह कहते हुए उम्मीदों पर पानी फैर दिया कि अभी कुछ भी तय नहीं हुआ। बहरहाल पीसीसी चीफ का यह बयान बहुत सोची समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण स्थानीय नेताओं का दबाव है जो किसी भी सूरत में अरूण यादव को नहीं चाहते। उधर संगठन के रवैये से नाराज यादव गुरूवार को प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक की मौजूदगी में हुई बैठक में नहीं पहुंचे। दरअसल बीते पांच सालों में खंडवा कि सियासत में खासा बदलाव आ चुका है। इतने सालों में अरूण यादव के समर्थक क्षत्रप जहां कमजोर हुए वही विरोधियों की ताकत में भी खासा इजाफा हुआ है। यहीं कारण है कि खंडवा की चार विधानसभा क्षेत्रों में उन्हें सीधे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बदले हालातों में यादव के अलावा तीन नए नाम टिकट की दौड़ में जुड़ गए है।

एक नाम था अब टिकट की दौड़ में चार नाम-
उप चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होने के वक्त सिर्फ अरूण यादव का नाम चर्चा में था। जैसे जैसे विरोध तेज हुआ टिकट की दौड़ में चार नाम चर्चा में आ गए। इस सीट से सुरेंद्र सिंह शेरा ने अपनी पत्नी के टिकट के लिए अड़ गए। वही सचिन बिड़ला का भी नाम अब चर्चा में है। इनके अलावा खरगोन से विधायक रवि जोशी का नाम पिछले कुछ दिनों से काफी तेजी से सामने आया है। एक चौकाने वाला नाम आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ आनंद राय का भी है।

खुद के बोए बीज पहुंचा रहे नुकसान-
खंडवा के स्थापित मजबूत नेता नंदकुमार सिंह चौहान को 2009 में पराजित कर अरूण यादव पार्टी में एक सितारा बन कर उभरे थे। इस दौर में उन्होंने स्थानीय सियासत में सिर्फ अपने लोगों को उपक्रत किया। जिससे चलते पार्टी का एक बड़ा धड़ा यादव के विरोध में खड़ा हो गया। 2014 के चुनाव में पराजय के बाद भी यादव ने अपना रवैया नहीं बदला। इसका खामियाजा उन्हें 2019 के चुनाव में भी उठाना पड़ा। यादव के खुद के बोए बीज उन्हें अब नुकसान पहुंचा रहे है। हालात यह है कि सूबे की आठ विधानसभा में से चार में यादव का खुल कर विरोध हो रहा है। यही कारण है कि संगठन गंभीरता से नए विकल्पों को खोजने में जुट गया है।

जिन्हें कमजोर किया वही खड़े है विरोध में-
यादव के टिकट का सबसे पहले विरोध बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने किया। उन्होंने पार्टी संगठन से स्पष्ट कर दिया कि पहला दांवा उनका खुद का है। शेरा इस सीट से अपनी पत्नी का टिकट चाहते है। उन्होंने यादव को छोड़ किसी भी नेता को टिकट दिए जाने की शर्त भी पार्टी के सामने रखी है। विरोध में वरिष्ठ नेता राजनारायण सिंह और उनके पुत्र उत्तमसिंह भी खड़े है। गौरतलब है कि यादव समर्थक रहे मांधाता विधायक नारायण पटेल पाला बदल कर भाजपा में चले गए। उपचुनाव में पटेल ने कांग्रेस के उत्तमपाल सिंह को हरा दिया था। बड़वाह विधानसभा में हालात कुछ ऐसे ही है। मौजूदा विधायक सचिन बिड़ला खुल कर यादव कर रहे है। कारण साफ है बिड़ला के टिकट कटवाने के लिए यादव ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। भीकनगांव की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं यादव विरोधी विधायक झुमा सोलंकी भी अपनी मंशा से संगठन को अवगत करवा चुकी है।

यादव समर्थक क्षत्रपों का खत्म होता प्रभाव-
खंडवा की जिन चार विधानसभा सीटों पर यादव का विरोध स्थानीय स्तर पर खड़ा हुआ है वहा कभी यादव समर्थक क्षत्रपों की तूती बोला करती थी। समय के साथ साथ जहां ये क्षत्रप कमजोर हो गए वही यादव विरोधियों की जड़े क्षेत्र में मजबूत होती रही। खास बात यह रही कि यादव अपने समर्थकों खास कर नए लोगों को साथ नहीं जोड़ पाए।

भीकनगांव विधायक झूमा सोलंकी ने खंडवा लोकसभा चुनाव में आदिवासी को टिकट देने की मांग उठाई।

इतना ही नहीं सोलंकी ने इसके लिए बैठक में सीट को लेकर किया गया अपना रिसर्च वर्क भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि खंडवा लोकसभा में 8 विधानसभा सीट हैं इनमें चार सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में साढे 6 लाख से अधिक आदिवासी वोटर्स हैं। जो चुनाव की दशा और दिशा तय करते हैं ऐसे में पार्टी को आदिवासी वोटर्स पर फोकस करते हुए खंडवा लोकसभा सीट पर आदिवासी को प्रत्याशी बनाना चाहिए। उनकी इस मांग के बाद से ही अरुण की राह पहले से ओर मुश्किल हो गई है। इसके पहले बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक और कमलनाथ खेमे के माने जाने वाले निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा ने अपनी पत्नी जयश्री ठाकुर को कांग्रेस से टिकट दिए जाने की मांग की है। हालांकि खंडवा लोकसभा सीट से अरुण यादव को टिकट दिए जाने पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही यह साफ कर चुके हैं कि अरुण यादव ने चुनाव लडने के लिए अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। उन्हें पता ही नहीं है कि यादव चुनाव लडना चाहते हैं कि नहीं। इतना ही नहीं नाथ ये भी साफ कर चुके हैं कि टिकट के लिए वे सर्वे करवा रहे हैं और इसके आधार पर ही उम्मीदवार तय किया जाएगा।

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