Saturday, August 6, 2022
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नाक बच गई भाजपा की,सिंधिया की,नही सुधरे फिर भी प्रदेश कार्यालय के जनाधार विहीन नेता,1 निर्दलीय तक नही जोड़ पाए

मध्यप्रदेश नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा ग्वालियर में महापौर का चुनाव हार गई थी। 5 अगस्त को नगर निगम के सभापति के लिए चुनाव हुए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में भाजपा ने महापौर पद हारने का बदला ले लिया है। नगर निगम के सभापति पद पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार को 1 वोट से हरा दिया है। इसके बाद भाजपा के खेमे में खुशी की लहर है। ग्वालियर भाजपा का मजबूत किला रहा है। सभापति चुनाव से पहले भाजपा अपने पार्षदों को लेकर दिल्ली चली गई थी। वोटिंग के दिन पार्षद सुबह ग्वालियर पहुंचे थे

ग्वालियर नगर निगम के सभापति पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। भाजपा के मनोज तोमर सभापति बने हैं। मनोज तोमर को 34 वोट मिले और कांग्रेस की प्रत्याशी लक्ष्मी सुरेश गुर्जर को 33 वोट मिले हैं। ग्वालियर नगर निगम में कुछ 66 वार्ड हैं। सभापति चुनाव को लेकर महापौर समेत 67 वोटर थे। 66 में से 25 सीटों पर कांग्रेस के पार्षद जीते थे। वहीं, भाजपा के अपने 34 पार्षद थे। 6 निर्दलयी और 1 बसपा के पार्षद ने भी जीत हासिल की थी।

भाजपा पहले से दावा कर रही थी कि 3 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी उन्हें प्राप्त है लेकिन वोटिंग के दौरान ऐसा नहीं दिखा है। भाजपा को सिर्फ अपने ही 34 पार्षदों के वोट मिले हैं। नतीजों के बाद लग रहा है कि निर्दलीय पार्षदों का समर्थन कांग्रेस को मिल गया है, जिन 3 पार्षदों को लेकर भाजपा दावा कर रही थी, उन्होंने भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को वोट कर दिया है।
सिंधिया के लिए चुनौती था चुनाव


दरअसल, मेयर चुनाव में हार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। निगम सभापति चुनाव से पहले भाजपा ने पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी थी। भाजपा नेता अपने सभी पार्षदों को लेकर दिल्ली चले गए थे। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया से इनकी मुलाकात हुई थी। यहां होटल में इनको ठहराया गया था। वोटिंग के दिन ही पार्षद दिल्ली से लौटकर ग्वालियर आए थे। पार्टी ने अब जीत हासिल कर परचम लहराया है।

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