हिंदुओ के जुलूस पर हमला,पूरे शहर में कर्फ्यू,सारी अनुमति के बावजूद फेल हुआ तंत्र

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(CAA) को लेकर हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। देशभर में कहीं सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं तो कहीं समर्थन में जुलूस निकाले जा रहे हैं। झारखंड के लोहरदगा में गुरुवार को सीएए के समर्थन में विश्व हिंदू परिषद द्वारा निकाले जा रहे जुलूस पर जमकर पथराव हुआ जिसके बाद से कई घर और दुकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस घटना से पूरे शहर में तनाव फैल गया। हिंसा और तनाव को देखते हुए पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। घटना के बाद पूरे जिले में आठवीं बोर्ड की परीक्षा भी स्थगित कर दी गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के वाराणसी में चौक थाना क्षेत्र के बेनियाबाग मैदान में गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं को हटाने पर युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस के खदेड़ने पर सभी भागे। पुलिस ने 32 नामजद और 500 अज्ञात लोगों पर बलवा, बिना अनुमति इकट्ठा होने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
लोहरदगा में पांच दर्जन वाहनों को फूंका और 50 लोग घायल
हिंसा में करीब 50 लोग घायल हो गए। इनमें 28 को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो लोगों को गंभीर अवस्था में रिम्स रेफर किया गया है। घायलों में तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। उपद्रवी भीड़ ने जुलूस में शामिल पिकअप वैन और उसमें लगे साउंड सिस्टम को फूंक दिया। करीब 50 बाइक, तीन ट्रक और दर्जनभर दुकानें लूटकर जला दी गईं। पुलिस ने भीड़ के हमले में घर में फंसे तीन परिवारों को किसी तरह बचाया। यह सारा तांडव पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुआ।  देर रात तक डीआईजी अमोल विष्णु होमकर और एसपी प्रियदर्शी आलोक शहर में शांति सुरक्षा बहाल करने में जुटे हुए थे।
सुबह 11.30 पर निकला था जुलूस : पूर्वघोषित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार सुबह 11:30 बजे ललित नारायण स्टेडियम से  रैली निकली। यह रैली बरवा टोली, अपर बाजार, बड़ी मस्जिद थाना चौक होते हुए जैसे ही बड़ा तालाब, अमला टोली के पास पहुंची, इस पर पथराव शुरू हो गया।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ उपद्रव : जुलूस के आगे आगे सुरक्षा के लिहाज से एसपी प्रियदर्शी आलोक चल रहे थे। एसडीओ सहित कई अधिकारी और जवान रास्ते पर तैनात थे। बावजूद मेन रोड से गुजरते जुलूस पर अगल-बगल गली कूचों, छत और घरों की ओट से पत्थर बरसने लगे। कई लोग लहूलुहान होकर भागने लगे और अफरातफरी मच गई। रैली में शामिल लोगों ने बचाव और प्रतिक्रिया में उन्हीं पत्थरों को उठाकर वापस रोड़ेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई। हालत यह हो गई कि उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
जुलूस में महिलाएं भी थीं : जुलूस में सांसद  सुदर्शन भगत भी पहुंचे थे। कार्यकर्ता इन्हें सुरक्षित ले गए।  रैली में काफी संख्या में महिलाएं भी थीं। उन्हें भी चोटें आई हैं।  रैली को समाहरणालय मैदान तक पहुंचना था मगर पावरगंज तक ही पहुंच सकी। इसके बाद शहर में धारा 144 लागू कर दी गई। घटना से  लाखों  का नुकसान हुआ है। प्रशासन स्थिति को नियंत्रित  करने  में  जुटा है।
चूक
-खुफिया तंत्र इतनी बड़ी घटना की तैयारी को लेकर कोई जानकारी नहीं जुटा पाया
– जुलूस और विषय की संवेदनशीलता के लिहाज से पुलिस की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी
– शहर के उन इलाकों में पुलिस चौकस नहीं थी जो संवेदनशील माने जाते हैं
चिंता
– चाईबासा के बाद लोहरदगा में हुई हिंसा से पुलिस की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गये हैं
– सीएए के समर्थन व विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, ऐसे में तनाव बढ़ सकता है
– 1992 के बाद पहली बार शहर में कफ्र्यू लगा है और सांप्रदायिक सौहार्द्र को ठेस पहुंची है
चौकसी
– घटना के बाद लोहरदगा समेत पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी गई है
– गुमला और लातेहार के एसपी को क्षेत्रवार तैनात कर सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गयी
– रांची समेत चार जिलों से पुलिस मंगाई गई  और अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया
उपद्रव के दोषी बख्शे नहीं जाएंगे : सीएम
मु्ख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वे लोहरदगा की घटना से मर्माहत हैं। इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। सभी लोगों को अमन और भाईचारा बनाकर रखने की जरूरत है। मैं हिदायत और संदेश दोनों देना चाहता हूं कि ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा और दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।वाराणसी के बेनियाबाग में प्रदर्शन, पथराव, 500 पर केस
यूपी पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली के शाहीन बाग और लखनऊ  में चल रहे प्रदर्शन की तरह वाराणसी में भी सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध-प्रदर्शन की तैयारी थी। सुबह सात बजे कुछ लोग जुटने शुरू हुए। बेनिया मैदान के बीच गांधी चबूतरे के निकट तैयारी के साथ ही पिछले हिस्से में टेंट मंगाये जाने लगे थे।