छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी ने उलझाया रमन सिंह को,जीत गयी कांग्रेस

0
785
छत्तीसगढ़ में कमोबेश जीत हार का अंतर सिंगल डिजिट प्रतिशत में रहता है लेकिन इस बार कांग्रेस ने सीमा पार कर दी,विशेष बात यह रही कि जो वोट बैंक भाजपा का था वो कांग्रेस को चला गया।
भाजपा पूरे समय अनुसूचित जाति मतदाताओं को मनाने में लगी और सवर्ण के साथ पिछड़ों को भूल गयी,
जबकि अनुसूचित जाति का मुख्य वोट पूरा चला गया जोगी मायावती को।
चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि जोगी ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के तीन डिवीजनों में कांग्रेस के वोट का 9% अपनी तरफ खींचा है.
अगर राजनीति सिर्फ गुणा-भाग पर आधारित होती तो इस विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने जीत दर्ज की होती और रमन सिंह चौथी बार मुख्यमंत्री बनते. लेकिन राजनीति में गुणा-भाग से ज्यादा केमेस्ट्री का असर पड़ता है. छत्तीसगढ़ में यह नजर भी आता है.
छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी और मायावती ने हाथ मिलाकर थर्ड फ्रंट का गठन किया था और ऐसा माना जा रहा था कि इससे कांग्रेस को नुकसान होगा. 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद तीन साल तक अजीत जोगी प्रदेश में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा भी रह चुके हैं. माना जाता है कि दलित समुदाय में जोगी की अच्छी पकड़ है.
चुनाव आयोग की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि जोगी ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर संभाग में कांग्रेस के वोट शेयर का 9% अपनी तरफ खींचा है. इस वजह से कांग्रेस का वोट शेयर 40.3% से गिरकर 31% पर आ गया. कांग्रेस के वोट शेयर में आई इस कमी से उसे राज्य में बड़ा नुकसान हो सकता था. 2013 में कांग्रेस 0.5% से कम वोटों के अंतर से हार गई थी.
लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी के पारंपरिक वोटों पर सेंध लगाकर इस घाटे की भरपाई कर ली. नए आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने राज्य में बीजेपी के साहू-कुर्मी और ओबीसी वोट का करीब 8-10% अपनी तरफ किया है, जिससे बीजेपी को पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 9% कम वोट मिले.
ऐसा लगता है कि जोगी के कांग्रेस से बाहर निकलने से पार्टी ओबीसी के बीच अधिक स्वीकार्य बन गई. कांग्रेस ने प्रयोग के तौर पर समुदाय के तीन बड़े नेताओं भुपेश बघेल, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत को सीएम का संभावित उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा, जो उसके लिए फायदेमंद रहा.
छत्तीसगढ़ में आमतौर पर हार और जीत के बीच 1% से भी कम का अंतर रहता है. लेकिन कांग्रेस ने इस बार करीब 10% के अंतर से राज्य की दो तिहाई सीटों पर जीत दर्ज की है.