Friday, May 13, 2022
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अब गांधी नेहरू परिवार के अलावा,किसी परिवार में नही मिलेंगे 2 टिकट

उदयपुर. अगले चुनावों से पहले टिकट दिए जाने को लेकर कांग्रेस बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। अब एक परिवार से केवल एक ही टिकट मिलेगा। उदयपुर में चिंतन शिविर में संगठन में बदलाव और राजनीतिक मामलों पर बने पैनल ने य​ह सिफारिश की है। कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी महासचिव अजय माकन ने उदयपुर में मीडिया से बातचीत में कहा- हमारे पैनल में यह चर्चा हुई है कि एक परिवार से एक टिकट के फार्मूला को लागू किया जाए। जिसे भी टिकट दिया जाए, उसने कम से कम 5 साल पार्टी में काम किया हो। सीधे टिकट नहीं दिया जाए। नए आने वालों नेताओं को टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन इस नियम में गांधी परिवार को छूट दी जाएगी। यह फार्मूला उन पर लागू नहीं होगा।

किसी नेता को तीन साल के कूलिंग पीरियड के बाद दूसरा पद मिले
माकन ने कहा इस बात की भी सिफारिश की गई है कि पार्टी में लगातार 5 साल के काम करने के बाद किसी को दूसरा पद नहीं दिया जाए। कम से कम 3 साल का कूलिंग पीरियड रहे। तीन साल के गैप के बाद ही आगे कोई पद दिया जाए। अगर किसी नेता का बेटा या दूसरा नेता टिकट लेना चाहता है तो उसे कम से कम पांच साल संगठन में काम करना होगा। कांग्रेस में 5 साल लगातार पद पर नहीं रहने का नियम लागू होने पर आधे से ज्यादा नेता बाहर हो जाएंगे। नेताओं के बेटों को भी पांच साल पार्टी में काम करने के बाद ही टिकट मिलेगा।

गांधी परिवार पर लागू नहीं होगा प्रावधान
जब माकन से गांधी परिवार पर यह प्रावधान लागू होने के बारे में पूछा तो कहा कि यह सवाल गांधी परिवार का नहीं है। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव संगठन चुनाव की प्रक्रिया से होगा। चिंतन शिविर से कांग्रेस अध्यक्ष के चयन का कोई संबंध नहीं है। अजय माकन ने इस तरह के संकेत भी दिए कि गांधी परिवार पर एक परिवार एक टिकट का प्रावधान लागू नहीं होगा। कांग्रेस ने एक परिवार-एक टिकट का फार्मूला लागू करने की सिफारिश की है, लेकिन बड़े सियासी परिवारों के लिए गली भी छोड़ दी है। दरअसल, कांग्रेस नेता के परिवार के किसी दूसरे सदस्य को टिकट तभी दिया जाएगा, जब वह पांच साल से एक्टिव हो, यदि कोई नया सदस्य कांग्रेस में आता है तो उसे पहले 5 साल संगठन में काम करना होगा, उसके बाद ही टिकट मिलेगा। वहीं यह भी तय किया है कि अब पैराशूट उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया जाएगा, उन्हें भी पहले 5 साल संगठन में काम करना पड़ेगा। गौरतलब है कि कांग्रेस में बड़ी संख्या में पैराशूट उम्मीदवार उतारे जाते रहे हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी ऐसा हो चुका है।।

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