मोहम्मद ज़लीज़ अंसारी की चुनौती,65 बम धमाके का मुजरिम हूँ, पुलिस वालों की भी हत्या की,कोई सज़ा करवा कर दिखाओ

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कुख्यात आतंकी डॉ. जलीस अंसारी मुंबई स्थित अपने क्लीनिक में ही बम बनाता औऱ नए-नए प्रयोग करता था। एक तरह से यह क्लीनिक बम बनाने की प्रयोगशाला थी। आतंक की दुनिया में उसे  डॉक्टर बम के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि उसे बम बनाने की तकनीक अब्दुल करीम टुंडा ने दी। टुंडा के साथ वह पाकिस्तान भी जा चुका है। टुंडा के आईएसआई नेटवर्क का इस्तेमाल कर वह लश्कर, सिमी समेत कई प्रतिबंधित संगठनों के सीधे संपर्क में आया।
अंसारी ने 1984 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर ली थी। इसके बाद उसने मुंबई महानगर पालिका के अस्पताल में डॉक्टरी शुरू की। शाम के वक्त वह एक निजी क्लीनिक में मरीज भी देखता था। क्लीनिक चलाने के अलावा डॉक्टर मुंबई के बाईकुला में अहले अदीस संगठन का उपाध्यक्ष भी रहा। उपाध्यक्ष रहते हुए अंसारी की मुलाकात वारंगल के आसिम बहारी से हुई थी। आसिम पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था और भारत में छिपकर रह रहा था।
आतंकी डॉ. जलीस अंसारी रविवार सुबह सात बजे अमौसी एयरपोर्ट से मुंबई के लिए रवाना हो गया। जाते जाते वह एसटीएफ अधिकारियों को चुनौती दे गया। उसने देश की कानून व्यवस्था को लचर बताते हुए कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अपने ऊपर लिखी एक किताब को पढ़ने की सलाह मुफ्त में दे गया।
शनिवार की दोपहर लगभग 3 बजे जलीस अंसारी को एसटीएफ और मुंबई एटीएस कानपुर लेकर पहुंची थी। यहां पर पूछताछ करने के बाद अल सुबह चार बजे उसे अमौसी ले जाया गया। कानपुर से लखनऊ के रास्ते में भी एसटीएफ अफसर उससे पूछताछ करते रहे। उसने साफ शब्दों में चुनौती दी कि कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
‘डॉ बम’ के नाम से कुख्यात आतंकी और मुंबई में सिलसिलेवार धमाकों का दोषी डॉ जलीस अंसारी रविवार (जनवरी 19, 2020) की सुबह अमौसी एयरपोर्ट से मुंबई रवाना होने से पहले एसटीएफ अधिकारियों को चुनौती दे गया। उसने देश की कानून व्यवस्था को कमजोर बताते हुए कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसने कहा कि अब तक उसने 65 से ज्यादा धमाके किए, लेकिन पुलिस केवल 3 मामलों में उस पर आरोप सिद्ध कर पाई। इससे अंदाजा लगा लें कि स्थिति क्या है?
 (जनवरी 18, 2020) की दोपहर लगभग 3 बजे जलीस अंसारी को एसटीएफ और मुंबई एटीएस कानपुर लेकर पहुँची थी। यहाँ पर पूछताछ करने के बाद सुबह चार बजे उसे अमौसी ले जाया गया। कानपुर से लखनऊ के रास्ते में भी एसटीएफ अफसर उससे पूछताछ करते रहे। जहाँ उसने साफ शब्दों में अधिकारियों को चुनौती दी कि देश की कानून व्यवस्था ढीली है और कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
जलीस ने अफसरों से कहा, “मैं 65 से ज्यादा धमाके कर चुका हूँ और अब तक मुझ पर सिर्फ़ तीन आरोप ही साबित हुए हैं। मैंने पुलिस वालों को धमाके में मारा और अब तक वह खुद पर हुए हमले के साक्ष्य नहीं जुटा पाई, इसी से अंदाजा लगा लो क्या स्थितियाँ हैं।”
अधिकारियों के सवालों का जवाब देते हुए आतंंकी ने कहा, “कोई भी बड़ा आतंकी मेरे बिना कुछ नहीं हैं। जेल में रहकर जो मैं कर सकता हूँ, वह कोई संगठन बाहर रहकर भी नहीं कर सकता।” उसने देश के मौजूदा हालातों पर भी अधिकारियों को जानकारी दी। उसने कहा कि सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश में विद्रोह की एक बहुत बड़ी भूमिका तैयार हो चुकी है। अगर सरकार इसे नहीं समझ पाएगी तो इसका अंजाम भुगतना होगा।
गौरतलब है कि जलीस ने अधिकारियों के सामने ‘डेंजरस माइंड’ नामक किताब का जिक्र किया और सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि यह किताब उसके ऊपर है। अगर वे इसे पढ़ेंगे तो उन्हें कई तथ्यों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। बता दें कि डेंजरस माइंड किताब को हुसैन जैदी ने लिखा है। हुसैन जैदी मुंबई के रहने वाले और लंबे समय तक उन्होंने अंडरवर्ल्ड समेत आतंकवाद पर बहुत काम किया है।
 कई बार पुलिस को चकमा देकर बच निकलने में कामयाब रहे डॉ जलीस अंसारी ने पूछताछ में अपने नेटवर्क से जुड़े कई साथियों के राज उगले। इसके अलावा उसकी पॉकेट डॉयरी से कई अहम जानकारियाँ सामने आई। पता चला है किवह सेंट्रल जेल में रहकर सस्ते सामान के प्रयोग से बम बनाने का फार्मूला तैयार कर रहा था।
क्रश इंडिया मूवमेंट की शुरुआत 
80 के दशक में डाक्टर और आसिम के बीच अच्छी दोस्ती हो चुकी थी। इसी दौरान इन लोगों ने देश में नफरत फैलाने को लेकर बड़ी योजना तैयार की। इस योजना को इन लोगों ने नाम दिया क्रश इंडिया मूवमेंट।  मूवमेंट शुरू तो हुआ लेकिन उसे अंजाम कैसे दिया जाए इसे लेकर इनकी प्लानिंग सटीक नहीं थी। हालांकि बम बनाने का तरीका मोटे तौर पर आसिम बहारी ने डॉक्टर को बता दिया था।
करीम टुंडा ने सिखाया बम बनाना   
क्रश इंडिया मूवमेंट को आगे बढ़ाने के दौरान डाक्टर की मुलाकात अब्दुल करीम टुंडा से हुई। सन 1985 में टुंडा से मुलाकात के बाद अंसारी का खौफनाक चेहरा सामने आया। टुंडा ने उसे टाइम बम से लेकर आरडीएक्स के इस्तेमाल के बारे में बताया। इसके बाद जलीस ने अपना दिमाग से इस तकनीक को और विकसित किया और ऐसे टाइम बम बनाए जो सेट टाइम पर ही फटते थे।
100 से ज्यादा लोगों को तैयार किया
अंसारी तकनीकी रूप से तो ताकतवर था ही ब्रेन वॉश करने में भी उसका कोई विकल्प नहीं था। 93 में बड़े धमाके करने से पहले उसने 100 से अधिक युवाओं का ब्रेन वॉश कर उन्हें अपने मूवमेंट में शामिल कर लिया था। उसके एक इशारे पर भटके हुए युवा जान देने लेने को तैयार रहते थे।
डोरियर के सहारे पकड़ गया अंसारी 
एसटीएफ के मुताबिक डॉ. जलीस अंसारी ने 1991 से 1992 के बीच कानपुर के चक्कर लगाए थे। तब भी वह ऊंची मस्जिद के पास ही रुका था और वहीं पर अपने लोगों के साथ नमाज अदा करता था। इस दौरान एटीएस समेत अन्य खुफिया एजेंसियां इसके बारे में जानकारियां जुटा रही थीं। उस दौरान ही इसका डोरियर (रिकार्ड) तैयार किया गया था। यह वर्तमान में एटीएस समेत अन्य एजेंसियों का पास मौजूद था। जब मुंबई से वह लापता हुआ तो एटीएस ने उसके पुराने ठिकानों को खंगालना शुरू किया। इसमें कानपुर प्रमुख ठिकाना था। इसी आधार पर एसटीएफ ने उसे इतनी जल्दी गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली।
दोनों दोस्तों की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ
एसटीएफ अंसारी के फेथफुलगंज में रहने वाले दोस्त अब्दुल रहमान और अब्दुल कय्यूम की कुंडली भी खंगाली रही है। बताया जाता है कि रहमान की मौत हो चुकी है और कय्यूम शहर में नहीं है। कय्यूम इस वक्त कहां और किस हालत में है इस संबंध में एसटीएफ के पास सटीक जानकारी नहीं है। अब एसटीएफ पता लगा रही है कि रहमान और कय्यूम के परिजनों का फेथफुलगंज से कोई वास्ता है या नहीं। बताते हैं कि अंसारी इन्हीं के साथ ऊंची मस्जिद में नमाज अदा करता था। इस संबंध में मुंबई एटीएस से भी डिटेल मांगी गई हैं। कहीं किसी रिकार्ड में उसके दोस्तों का नाम तो नहीं आया है।