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गद्दार DSP देवेंद्र सिंह का 5वा राउंड था,हर राउंड के 12 लाख,घर से लाकर पहनाता था पगड़ी,ठहराता था घर मे,छिनेगा पदक

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पुलिस इन सभी के पीछे पिछले दो-तीन दिनों से लगी हुई थी। तीनों कार (नंबर जेके 03 एच 1738) से श्रीनगर से दोपहर बाद निकले। इनके पीछे पुलिस भी लगी हुई थी। अनंतनाग के वानपोह इलाके में गाड़ी रोक ली गई। गाड़ी में सवार सभी पगड़ी लगाए हुए थे ताकि किसी को शक न होने पाए। इनके चंडीगढ़ जाने की बात भी सामने आ रही है। फिलहाल, पुलिस सारी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है।
एयरपोर्ट पर तैनात डीएसपी को गत 15 अगस्त को राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला था। आतंकवाद के खिलाफ सफल ऑपरेशन चलाने के लिए एसओजी में तैनाती के दौरान आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर से डीएसपी बनाया गया। बाद में फिरौती मांगने की शिकायत पर एसओजी से हटाने के साथ ही निलंबित किया गया था। लेकिन बाद में बहाल कर श्रीनगर पुलिस कंट्रोल रूप में तैनात कर दिया गया। यहां से पिछले साल श्रीनगर एयरपोर्ट पर तैनात किया गया।
आतंकी नवीद शोपियां इलाके में कई पुलिसकर्मियों की हत्या में शामिल रहा है। इसके साथ ही अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सेब की खरीद के लिए बाहरी राज्यों से पहुंचे ट्रक चालकों की शोपियां में हत्या की घटनाओं में भी शामिल था। शोपियां में वह डीएसपी आशिक टाक के वाहन पर हमले में भी शामिल था, जिसमें तीन पीएसओ और ड्राइवर की मौत हो गई थी। बटगुंड में तीन अन्य पीएसओ की हत्या में भी वह शामिल रहा था।
एक पुलिस अधिकारी ने सूत्रों को बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि देविंदर सिंह आतंकियों से पैसे लेकर उन्हें बनिहाल सुरंग पार कराते थे। इस बार भी 12 लाख रुपये में डील हुई थी। वह खुद गाड़ी में इसलिए बैठे थे ताकि कोई पुलिस अधिकारी को वाहन में बैठा देखकर न रोकेगा न टोकेगा। जांच में यह भी पता चला कि नवीद बाबू ने ये पैसे न सिर्फ रास्ता पार कराने बल्कि जम्मू में शेल्टर देने के लिए भी दिए थे। सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि कम से कम पांच बार डीएसपी ने आतंकियों को बनिहाल सुरंग पार कराने और जम्मू में शेल्टर देने के बदले पैसे वसूले हैं।
इस बीच इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को सौंप दी गई है। इस बात को जांच के दायरे में रखा गया है कि कहीं आतंकी दिल्ली में 26 जनवरी से पहले कोई वारदात करने तो नहीं आ रहे थे? डीएसपी देविंदर सिंह को हिजबुल कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ बाबू और इरफान शफी मीर के साथ शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को एजेंसियों ने श्रीनगर में इंदिरा नगर स्थित उसके घर की तलाशी ली। यहां से कई चीजें बरामद हुई हैं, लेकिन पुलिस ने उसका ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। नवीद के साथ पकड़ा गया दूसरा शख्स वकील है और वह पांच बार पाकिस्तान जा चुका है। आरोप है कि वह वहां ‘हैंडलरों’ के संपर्क में था।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ अरेस्ट किए गए डीएसपी देविंदर सिंह को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त डीएसपी देविंदर पर आरोप है कि उसने श्रीनगर के बादामी बाग कैन्टोन्मेंट के बगल में स्थित अपने घर में आतंकियों को पनाह दी और उनके जम्मू जाने का इंतजाम भी किया। सुरक्षा एजेंसियों को शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि डीएसपी आतंकियों को जम्मू ले जाने के लिए 12 लाख रुपये लिया करता था। पद से निलंबन की कार्रवाई के बाद एजेंसियों ने डीएसपी देविंदर के श्रीनगर एयरपोर्ट स्थित ऑफिस को सील किया जा सकता था।
देविंदर सिंह जम्मू-कश्मीर पुलिस के आतंकवाद रोधी विशेष अभियान समूह (एसओजी) में एक सब-इन्स्पेक्टर के रूप में शामिल हुए थे और वह वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस पदक हासिल करने के साथ डीएसपी रैंक पर तेजी से पहुंचे। उन्हें यह वीरता पुरस्कार आतंकवाद रोधी ड्यूटी के लिए मिला। देविंदर सिंह से अब खुफिया ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग व मिलिट्री इंटेलिजेंस टीम पूछताछ करेगी। सूत्रों ने कहा कि देविंदर सिंह से उनका राष्ट्रपति वीरता पदक पुरस्कार लिया जा सकता है। इस प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
इस मामले की जांच में एनआईए ने भी दिलचस्पी दिखाई है और वह पुलिस रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद देविंदर, नवीद और दूसरे आतंकियों को हिरासत में लेने की मांग कर सकती है। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि कहीं वे कोई बड़े हमले को तो अंजाम देने नहीं जा रहे थे।
आतंकवादियों को कार में ले जाते हुए गिरफ्तार हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह से पूछताछ में पता चला है कि वह लंबे समय से इन आतंकियों के संपर्क में थे। साथ ही यह भी खुलासा हुआ कि वह 2018 में भी इन आतंकियों को लेकर जम्मू गया था। यही नहीं, वह आतंकियों को अपने घर में पनाह भी देता था। जम्मू कश्मीर पुलिस फिलहाल देविंदर और उसके साथ पकड़े गए आतंकी नवीद से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि कहीं वे कोई बड़े हमले को तो अंजाम देने नहीं जा रहे थे।
देविंदर को 13 जनवरी को कुलगाम जिले में श्रीनगर-जम्मू नैशनल हाइवे पर एक कार में गिरफ्तार किया गया था। वह हिज्बुल कमांडर सईद नवीद, एक दूसरे आतंकी रफी रैदर और हिज्बुल के एक भूमिगत कार्यकर्ता इरफान मीर को लेकर जम्मू जा रहा था। बता दें कि अगस्त 2019 में देविंदर को राष्ट्रपति के हाथों वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है। अब यह पदक छीन सकता है।
पंजाब में पढ़ता है नवीद का दूसरा भाई
इस मामले की जांच में एनआईए ने भी दिलचस्पी दिखाई है और वह पुलिस रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद देविंदर, नवीद और दूसरे आतंकियों को हिरासत में लेने की मांग कर सकती है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नवीद की मां और उसका भाई फिलहाल जम्मू में हैं और वह शायद जवाहर टनल के जरिए सुरक्षित जम्मू जाने और वहां कुछ दिन बिताने के लिए सिंह को पैसे देता था। पुलिस ने बताया कि नवीद का एक दूसरा भाई पंजाब में पढ़ाई करता है।
अपने घर पर नवीद को लेकर गया था
अभी तक की जांच के मुताबिक देविंदर शुक्रवार को इंदिरा नगर स्थित अपने आवास में नवीद को लेकर आया था। वे यहां से शनिवार को जम्मू के लिए रवाना हुए थे। सिंह इंदिरा नगर में एक नया घर बनवा रहा है और उसका परिवार बगल में एक रिश्तेदार के घर रहता है। देविंदर पर इससे पहले भी कथित गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तता, भ्रष्टाचार, उत्पीड़न, अधीनस्थ कर्मचारियों से हथियार छीनना और अपने पोस्टिंग इलाके में स्थानीय लोगों के उत्पीड़न जैसे कई आरोप लगे हैं।
नवीद वांछित कमांडरों में था
नवीद दक्षिणी कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक सबसे वांछित कमांडरों में से एक था। पुलिस को काफी समय से उसकी तलाश थी। खासतौर से 2018 में सेब बागानों में काम करने वाले गैर-कश्मीरी लोगों की हत्या में उसका नाम आने के बाद से। नवीद ने ‘सुरक्षित यात्रा’ के बदले में कितनी रकम दी थी, इसकी जांच अभी की जा रही है। देविंदर के साथ पकड़े गए दोनों आतंकियों पर करीब 20 लाख रुपये का इनाम था।
‘पिछले साल भी आतंकियों को लेकर जम्मू गया था’
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘देविंदर पिछले साल भी इन आतंकियों को लेकर जम्मू गया था। इसलिए वे एक दूसरे पर भरोसा करते थे। पिछले साल की घटना के बारे में संभवत: किसी को भनक नहीं लग पाई। मीर शायद इस डील में बिचौलिए के तौर पर जुड़ा था।’ जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर में देविंदर के आवास पर छापा मारा और वहां से हथियार बरामद हुआ है। देविंदर इससे पहले पुलवामा में तैनात थे, जहां नवीद और वे एक दूसरे के संपर्क में आए थे।