Friday, May 22, 2020
Uncategorized

BIG EXPOSE : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोविड टेस्टिंग 1300 पेंडिंग जबकि लैब खाली

ICMR के अधिकारी ध्यान नही दे रहे या शासन का स्वास्थ्य विभाग सुस्त है या किसी विशेष के प्रति कृपा का भाव है यह जांच का विषय है।
मध्यप्रदेश का रेड्सपाट राजधानी भोपाल के हालात किसे से छुपे नही हैं बहुत सख्ती लागू करने के बावजूद यहां करोना पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ICMR ने 17 लैब चयनित की हैं जहां करोना टेस्टिंग हो सकती है लेकिन सरकारी ढर्रे का हाल ये है कि,मध्यप्रदेश सरकार के गांधी मेडिकल कॉलेज और एम्स में क्रमशः 1000 सेम्पल और 300 सेम्पल जांच के लिए पेंडिंग पड़े हैं लेकिन ICMR सर्टिफाइड लैब में नही भेजे जा रहे।
अगर कोरोना वायरस के संक्रमण को कम करना है, तो इसके लिए ज़्यादा से ज़्यादा जांच करना ज़रूरी है. इसी से पता चलेगा कि अभी तक कितने लोग संक्रमित हैं. कितने लोगों पर वायरस अपनी मज़बूत पकड़ बना चुका है. कितने लोगों को अलग रखना है.
इस काम में सबसे बड़ी बाधा टेस्ट किट की कमी है. हर देश का हाल एक जैसा है. अगर दूसरे देशों से टेस्टिंग किट और अन्य मेडिकल उपकरण मंगवा भी लिए जाएं, तो समय पर उनका पहुंचना और सैम्पल जमा करना भी एक बड़ी चुनौती है. साथ ही हर एक को कोरोना टेस्ट करने की समझ भी नहीं है.
अभी तक देखा गया है कि जिन देशों ने भी कोरोना का टेस्ट करने में तेज़ी दिखाई है, वहीं पर इसका संक्रमण कम हुआ है.
दक्षिण कोरिया ने 20 जनवरी को पहला केस पता चलने के बाद अपने यहां कोरोना की जांच शुरू कर दी थी.
छह हफ़्ते बाद 16 मार्च को दक्षिण कोरिया में हर 1000 में से 2.13 लोगों पर जांच की जा रही थी.
वहीं, इटली में पहला केस 31 जनवरी को सामने आया था और 6 हफ़्ते बाद भी वहां 1000 में से 1.65 लोगों की ही जांच की जा रही थी.
ये किसी से छिपा नहीं है. जिन देशों ने कोरोना वायरस के संक्रमण को गंभीरता से नहीं लिया, उनके यहां तो टेस्टिंग में तेज़ी लाना और भी ज़रुरी है.
जो देश अभी भी जांच में पीछे हैं, वो इसमें तेज़ी लाने में जुटे हैं.
कोविड-19 के संक्रमण की जांच एक जटिल प्रक्रिया है. इसे बड़े पैमाने पर करना आसान नहीं है. सबसे पहले तो आपको टेस्ट किट चाहिए, जो आसानी से उपलब्ध नहीं.
फिर मरीज़ की नाक से नमूना लेकर इसमें कई तरह के केमिकल मिलाए जाते हैं. इसके बाद उन्हें लैब में तजुर्बेकार तकनीशियन को भेजा जाता है.
सैंपल को पीसीआर मशीन में जांचा जाता है जो अपने आप में एक मेहनत वाला और भरपूर समय लेने वाला काम है.
जो लैब पहले से ही इस पर रिसर्च कर रही थीं, उन्हें न सिर्फ़ अपने काम में तेज़ी लानी पड़ी. बल्कि, नए कंप्यूटर और नई प्रशासनिक व्यवस्था भी स्थापित करनी पड़ी.

Leave a Reply