Friday, September 23, 2022
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(LIVE VIDEO) जानिए क्यों वक्फ बोर्ड की जमीनों की जांच से बच रहे जिहादी,बहुत पोल खुल चुकी बहुत बाकी है,कहीं भी झंडा गाड़ो मजार बनाओ दावा ठोको

वक्फ बोर्ड इन दिनों काफी चर्चा में है। दरअसल, तमिलनाडु के एक हिंदू बहुल गांव की पूरी जमीन को ही वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित कर दिया है। इसमें हिंदुओं की सैकड़ों एकड़ जमीन के अलावा 1500 साल पुराना मंदिर भी शामिल है। आखिर क्या है वक्फ बोर्ड और कैसे बन गया देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक?

What is Waqf Board, its acquired More than 8 Lakh Acre of land in india kpg

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को मानिकोंडा जागीर की जमीन से जुड़ी एक दशकों पुरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना की राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जमीनें राज्य सरकार के स्वामित्व में आती हैं। आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि मनिकोंडा गाँव की 1654.32 एकड़ की जमीन दरगाह हजरत हुसैन शाह वली की है। उच्चतम न्यायालय ने इसे नकार दिया।

जस्टिस हेमनाथ गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की खंडपीठ ने इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया। इससे कई सार्वजनिक और प्राइवेट संस्थानों के साथ-साथ जमीन का मालिकाना हक़ रखने वाले कई आम नागरिकों को भी राहत मिली है। जिस जमीन को लेकर सारा विवाद था, वो मनिकोंडा जागीर नामक गाँव में स्थित है। ये इलाका तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के गांडीपेट मंडल में पड़ता है। आज के हिसाब से इस जमीन की कीमत 50,000 करोड़ रुपए के आसपास है।

दरगाह हजरत सैयद हुसैन शाह वली और राज्य सरकार के बीच के विवाद को सुलझाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सारी जमीन तेलंगाना सरकार की है। सरकार ने ई-ऑक्शन के माध्यम से कई लोगों को इस जमीन के कुछ हिस्से बेचे थे। कई कंपनियों ने भी कुछ हिस्से खरीदे थे, तो वहीं कुछ संस्थानों को भी दिए गए थे। इनमें ‘लैंको हिल्स’, ‘जन चैतन्य हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड’, ‘TNGOS हाउसिंग सोसाइटी’, ‘हैदराबाद पब्लिक सर्विसेज कोऑपरेटिव सोसाइटी’, Phoenix, विप्रो, ISB स्कूल और उर्दू विश्वविद्यालय शामिल हैं।

ये मामला तब प्रकाश में आया था, जब राज्य सरकार ने ‘लैंको हिल्स’ को इंटीग्रेटेड टाउनशिप बसाने के लिए इसमें से कुछ जमीन बेची थी। इसके अलावा ‘Emaar’ नाम का एक विवादित प्रोजेक्ट भी इसी जमीन पर सामने आया था। अदालत ने कहा कि ‘तेलंगाना स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्टक्टर कॉस्पोरेशन’ जमीन का इस्तेमाल कर सकता है। वक्फ बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी कर के इस जमीन के स्वामित्व का दावा किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ बता दिया।

वक्फ बोर्ड इन दिनों काफी सुर्खियों में है। दरअसल, तमिलनाडु के एक हिंदू बहुल गांव की पूरी जमीन को ही वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति घोषित कर दिया है। इसमें हिंदुओं की सैकड़ों एकड़ जमीन के अलावा 1500 साल पुराना मंदिर भी शामिल है। ये सब हो पा रहा है वक्फ बोर्ड को मिले असीमित अधिकार से, जिसे 1995 के वक्फ एक्ट में कांग्रेस सरकार ने दिया है। आखिर क्या है वक्फ बोर्ड, कैसे काम करता है और उसके पास कौन-कौन सी असीमित शक्तियां हैं। आइए जानते हैं।

 

क्या है ‘वक्फ’?
‘वक्फ’ शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द वकुफा से हुई है। इस्लाम में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो अल्लाह के नाम पर दान कर दी जाती है। एक बार संपत्ति वक्फ हो गई तो फिर उसे मालिक वापस नहीं ले सकता है। ये दान पैसे, जमीन या संपत्ति का हो सकता है। इस्लाम में किसी इंसान का धर्म के लिए किया गया किसी भी तरह का दान वक्फ कहलाता है।

क्या है वक्फ बोर्ड?
जब कोई मुस्लिम अपनी संपत्ति दान कर देता है तो उसकी देखरेख का जिम्मा वक्फ बोर्ड के पास होता है। वक्फ बोर्ड के पास दान दी गई किसी भी संपत्ति पर कब्जा रखने या उसे किसी और को देने का अधिकार होता है। वक्फ का काम देखने वालों को मुतवल्ली कहा जाता है। इसके अलावा अगर किसी संपत्ति को लंबे समय तक मजहब के काम में इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो उसे भी वक्फ माना जा सकता है।

बीते शुक्रवार को जिस दिन देश भर में मु स्लिमों द्वारा अलविदा नमाज पढ़ी जा रही थी… देश की सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे अहम मामले में फैसला सुना रहा था..
जो कि, आगामी समय में देश की दशा और दिशा बदल सकता है.

वो केस था… “मु स्लिम वक्फ बोर्ड बनाम जिंदल ग्रुप केस”

ये केस कुछ इस तरह का था कि… राजस्थान सरकार ने 2010 में जिंदल ग्रुप ऑफ कम्पनीज को एक जमीन माइनिंग के लिए अलॉट की.

 

कालांतर में… 1995 में नया Act आने के बाद वक्फ बोर्ड के सर्वेयर ने फिर उसे वक्फ की संपत्ति घोषित करते हुए उसे अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लिया.

इसीलिए… जब 2010 में राजस्थान सरकार ने इस जमीन को माइनिंग हेतु जिंदल ग्रुप को दिया तो वहां के लोकल अंजुमन कमिटी ने इस पर आपत्ति की और इसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताते हुए वक्फ बोर्ड को चिट्ठी लिख दी.

इसके बाद वक्फ बोर्ड इसे अपनी संपत्ति बताते हुए सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई और वहाँ बाउंड्री देना शुरू कर दिया.

इस पर मामला राजस्थान हाईकोर्ट चला गया जहाँ फिर वक्फ बोर्ड ने आपत्ति जताई कि 1965 और 1995 की वक्फ एक्ट के तहत ये संपत्ति हमारी है और ये हमारे रिकॉर्ड में भी चढ़ा हुआ है.
इसीलिए, सरकार इसे किसी को नहीं दे सकती है और न ही कोर्ट इस केस को सुन सकती है क्योंकि अगर कोई डिस्प्यूट है भी…
तो, उसे हमारा वक्फ ट्रिब्यूनल सुनेगा न कि कोर्ट.

इस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्टिकल 226 का हवाला देते हुए वक्फ बोर्ड को क्लियर किया कि… वो किसी भी ट्रिब्यूनल या लोअर कोर्ट से ऊपर है और आर्टिकल 226 के तहत वो इस केस को सुन सकता है.

और, हाईकोर्ट ने इस मामले में एक स्पेशलाइज्ड कमिटी बिठा दी.

2012 में कमिटी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी एवं उसके बाद कोर्ट ने आदेश दे दिया कि ये वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है और इसे माइनिंग के लिए दिया जा सकता है.

इस फैसले से वक्फ बोर्ड नाखुश होकर सुप्रीम कोर्ट चला गया.

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में मामला फंस गया.
क्योंकि… सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आपने क्या सर्वे किया है अथवा आपके रिकॉर्ड में क्या चढ़ा है… वो सब जाने दो.
हम तो कानून जानते हैं…

और, कानून के अनुसार (वक्फ एक्ट 1995 की धारा 3 R के अनुसार) कोई भी प्रोपर्टी वक्फ की प्रॉपर्टी तभी हो सकती है अगर वो निम्न शर्तों को पूरा करता है …

1. वो जिसकी प्रोपर्टी है अगर वो इसे वक्फ के तौर पर अर्थात इस्लामिक पूजा प्रार्थना के लिए सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करता हो/ करता था.

2. वो संपत्ति वक्फ के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए दान की गई हो.

3. राज्य सरकार उस जमीन को किसी रिलिजियस काम के लिए ग्रांट की हो.

4. अथवा, उस जमीन के मजहबी उपयोग के लिए जमीन के मालिक ने डीड बना कर दी हो.

सुप्रीम ने आगे कहा कि वक्फ एक्ट 1995 के अनुसार उपरोक्त शर्तों को पूरा करने वाली प्रोपर्टी ही वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जायेगी.
इसके अलावा कोई भी संपत्ति वक्फ की संपत्ति नहीं है.इस अनुसार… जिस प्रॉपर्टी पर आप दावा कर रहे हो…
उस प्रॉपर्टी को न तो आपको किसी ने दान में दी है, न ही उसकी कोई डीड है और न ही वो आपने खरीदी है.

इसीलिए, वो संपत्ति आपकी नहीं है और उसे माइनिंग के लिए दिया जाना बिल्कुल कानून सम्मत है.

अब सवाल है कि ये तो महज एक फैसला है और इसमें माइल स्टोन जैसा क्या है ???

तो, इसके लिए हम थोड़ा इतिहास में जाते हैं कि असल में हुआ क्या है.

जब 1945 के आसपास लगभग ये तय हो चुका था कि भारत अब आजाद हो जाएगा और भारत का विभाजन भी लगभग तय ही था…

तो, भारत के वैसे मुसलमान जो.. पाकिस्तान जाने का मन बना चुके थे.. (जिसमें से बहुत सारे नबाब और छोटे छोटे रियासतों के राजा, जमींदार वगैरह थे) ने आनन फानन में अपनी जमीनों पर वक्फ बना दिया और भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए.

जिसके बाद देश में मुसरिम तुष्टिकरण में आकंठ डूबी सरकार के आ जाने के बाद वो संपत्ति/जमीन वक्फ बोर्ड के पास चली गई.

ऐसी लगभग 6-8 लाख स्क्वायर किलोमीटर जमीन होने का अंदेशा है.

इसके अलावा… कालांतर में रेलवे एवं नगर निगम की खाली जमीन, सार्वजनिक मैदानों, किसी निजी व्यक्ति के खाली प्लाटों आदि पर यहाँ के मूतलमानों अथवा शरारती तत्वों ने मिट्टी के कुछेक ढेर जमा कर दिए और ये दावा कर दिया कि…. यहाँ हमारी महजिद/ ईदगाह/ कब्रिस्तान है…
इसीलिए, ये वक्फ की संपत्ति है.

और, चूंकि 2014 से पहले लगभग हर जगह इनकी तुष्टिकरण वाली सरकारें थी तो उन्होंने इनके दावे को आंख बंद कर मान लिया और उन संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में जाने दिया.

लेकिन, अब सुप्रीम कोर्ट ने ये स्पष्ट आदेश पारित कर दिया है कि…

1947 से पहले ट्रांसफर किये गए किसी भी संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का अधिकार नहीं होगा क्योंकि उसके कागज मान्य नहीं होंगे.

इसके अलावा… 1947 के बाद भी जिन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड अपना अधिकार जताता है…. उसके कागज उसे दिखाने होंगे कि वे संपत्ति उसके पास आये कहाँ से ???

और, वक्फ बोर्ड के पास संपत्ति आने के वही शर्त हैं जो ऊपर उल्लेखित किया गया है.

अगर… वक्फ बोर्ड अपने किसी संपत्ति का प्रॉपर कागज नहीं दिखा पाता है तो सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले के आलोक में वो जमीन/संपत्ति अपने मूल मालिक को वापस दे दी जाएगी.

और, अगर जमीन/ संपत्ति का मूल मालिक बंटवारे के बाद देश छोड़कर जा चुका है अथवा 1962, 1965 & 1971 के युद्ध में पिग्गिस्तान का साथ देने के आरोप के कारण भाग गया है.

तो, उस स्थिति में वो संपत्ति “शत्रु संपत्ति अधिनियम 2017” के तहत सरकार की हो जाएगी.

अब इसमें हमें और आपको सिर्फ करना ये है कि…
अगर आपके आसपास कोई ऐसी संपत्ति/जमीन है जो कि आपके अनुसार वक्फ बोर्ड का नहीं होना चाहिए तो आप इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का हवाला देते हुए संबंधित सरकार अथवा कोर्ट को सूचित कर सकते हैं.

और, सरकार / कोर्ट उस जमीन को वक्फ बोर्ड के अतिक्रमण से मुक्त करवाने के लिए बाध्य होगी क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट का आदेश है.

और हाँ… अगर आपकी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है तो भी आप इस पोस्ट को अधिकाधिक लोगों/ग्रुप्स तक प्रचारित कर दें..
ताकि, अगर किसी के जानकारी में ऐसा हो तो वो इस संबंध में उचित कदम उठा सके.

ध्यान रहे कि… 1947 में बंटवारे के समय पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) को मिलाकर उन्हें लगभग 10 लाख 32 हजार स्क्वायर किलोमीटर जमीन दी गई थी और एक अनुमान के मुताबिक कम से कम इतनी ही जमीन/संपत्ति आज भारत में वक्फ बोर्ड के कब्जे /रिकॉर्ड में है.

क्या बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता है?

वक्फ के अध्यक्ष के किसी भी एकतरफा दावे का कोई कानूनी मूल्य नहीं होगा या मुस्लिम समुदाय को बाध्य नहीं करेगा। वक्फ एक्ट 1995 की धारा 40 के मुताबिक, अगर वक्फ को कोई ऐसा कारण लगता है कि ये संपत्ति वक्फ की है, तो बोर्ड उन्हें नोटिस भेज सकता है। एक सवाल ये भी उठता है कि क्या बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता है? तो इसका जवाब भी वक्फ एक्ट की धारा 3 में मिलता है। इसमें लिखा है कि उसी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता है, जो मुस्लिम लॉ की ओर से मान्यता प्राप्त किसी धार्मिक या चैरिटेबल काम के लिए दान में दी गई हो।

वक्फ बोर्ड के मामले पर कोर्ट का क्या कहना है? 

भारत के पास विश्व में वक्फ भूमि का सबसे बड़ा रकबा है। सच्चर समिति द्वारा 2006 में किए गए अनुमानों के अनुसार, लगभग 4.9 लाख पंजीकृत वक्फ संपत्तियां हैं जिनमें लगभग छह लाख एकड़ भूमि शामिल है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य (तब) लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये था। वक्फ संपत्तियों के रूप में अकेले महाराष्ट्र में 92,000 एकड़ जमीन थी।

बार एंड बेंच के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड राजस्थान बनाम जिंदल सॉ लिमिटेड में कहा था कि समर्पण या उपयोगकर्ता के किसी भी सबूत के अभाव में, एक जर्जर दीवार या एक मंच को नमाज़ या नमाज़ अदा करने के उद्देश्य से धार्मिक स्थान का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य हालिया आदेश में कहा गया है कि धार्मिक और पवित्र उद्देश्य के लिए समर्पित भूमि राज्य में निहित होने से अछूती नहीं है। वक्फ बोर्ड अनुच्छेद 12 के तहत राज्य का हिस्सा है। बोर्ड के पास जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित करने की शक्ति थी लेकिन इस तरह के किसी भी अभ्यास के लिए पूरी तरह से जांच और दूसरे पक्ष की सुनवाई की आवश्यकता है। वर्तमान मामले में अधिनियम की धारा 40 के तहत ऐसी कोई जांच नहीं की गई थी और इसलिए अधिसूचना को कानून में खराब करार दिया गया था।

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