Sunday, November 22, 2020
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(LIVE VIDEO) : हिन्दुओ का त्योहार,मुसलमानों का व्यवहार और नपुंसक प्रशासन, पश्चिम बंगाल की सीमा

 

 

किस्सा उस जगह का है जहां आबादी लगभग बराबर है।याद करिए मुंगेर की घटना जब पुलिस सिंघम बनी हुई थी हिन्दुओ पर।

बिहार का कटिहार जिला मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। बीते दिनों बिहार में छठ महापर्व का समापन हुआ, लेकिन कटिहार के रतौरा में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा में घाट पर आकर विघ्न डालने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। वीडियो में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा न करने देने और व्यवस्था को तहस-नहस कर देने के आरोप लगते हुए स्थानीय लोगों ने उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से भी हस्तक्षेप की माँग की।

स्थानीय ग्रामीणों के वीडियो बनाने के बाद सामने आया सच

कटिहार जिला के कोढ़ा प्रखंड के रतौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियादियरा स्थित दिघरि पंचायत के चामापारा गाँव के लोगों को संध्या अर्घ्य के दौरान (नवम्बर 20, 2020) मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा तंग किया गया। उनके अनुसार छठ घाट पर उपद्रव कर घाट पर तोड़फोड़ किया गया, जिसके बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना था कि शाम को तो वो किसी तरह पूजा करने में कामयाब रहे, लेकिन सुबह उनके साथ जिस तरह से व्यवहार किया गया, उससे वो काफी डर गए हैं।

सबसे पहले जो वीडियो सोशल मीडिया पर आया, उसमें कई श्रद्धालु, महिलाएँ एवं पुरुष, खड़े दिख रहे हैं। एक महिला ने बताया कि वो प्रशासन के लिए यहाँ खड़ी हैं। महिलाओं ने बताया कि थोड़े से विवाद के बाद उनके बनाए घाट वगैरह को उजाड़ डाला गया। वहीं एक युवक ने दावा किया कि इलाके में 30 घर हिंदू हैं और 30,000 घर मुस्लिम हैं (हालाँकि, ये दावा अपुष्ट है)। उसने बताया कि यहाँ के कुछ लोग चाहते थे कि सुबह में छठ महापर्व हो ही नहीं।

उसने आगे उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, जो कटिहार के ही विधायक हैं, उनसे निवेदन करते हुए कहा कि वो थाना प्रभारी को निर्देश दें कि वो वहाँ पर आकर अपनी निगरानी में छठ पूजा संपन्न करवाएँ। उस वीडियो में सभी महिलाओं एवं पुरुषों ने उक्त युवक की बात से सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें वहाँ प्रशासन की जरूरत है। उसने हिन्दुओं से अपील की कि इस वीडियो को वो फैलाएँ, जिससे उन्हें न्याय मिले।

एक अन्य महिला ने बताया कि घाट पर जब श्रद्धालु वहाँ अर्घ्य देने गए तो पटाखा उड़ाने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से विवाद हुआ। महिला ने बताया कि वहाँ ‘काफी सारे मुस्लिम समाज के लोग’ थे और शाम को अर्घ्य देने के बाद वो लोग जैसे ही घर लौटे, तभी वहाँ पर केले के सारे थम उखाड़ डाले गए और मुस्लिम समाज के लोगों ने वहाँ मल-मूत्र त्याग कर दिया। साथ ही सजावट को तबाह कर देने और गुब्बारों को फोड़ देने के भी आरोप लगाए।

क्या कहते हैं पीड़ित हिन्दू?

जब हमने स्थानीय लोगों से बात की तो कई चौंकाने वाले विवरण सामने आए। कटिहार के ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में गाँव के स्थानीय मौलाना के दामाद की सहभागिता थी, इसी कारण प्रशासन ने भी उन पर थाने के बाहर ही सुलह कर के मामले निपटाने के लिए कहा। उक्त व्यक्ति ने हमें बताया कि उस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के दबंगों द्वारा हिन्दुओं के खेतों की फसलें काट लेना आम बात है और ये इस तरह की पहली घटना नहीं है।

हमारी बात देवनारायण उराँव से हुई, जो इस घटना के पीड़ित हैं और उनके सामने ही ये सब कुछ हुआ। उन्होंने हमें पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से समझाते हुए बताया कि वो अन्य श्रद्धालुओं के साथ सांध्य अर्घ्य के दिन दोपहर 1 बजे घाट पर गए और पूरे मन से वहाँ पर सजावट की। उन्होंने बताया कि पूरी साफ़-सफाई करने के बाद घाट को चमकाया गया। इसके बाद सारे ग्रामीण लौट आए और स्नान-ध्यान कर के पूजा की तैयारी के साथ वापस घाट के लिए शाम 4 बजे निकले। उन्होंने बताया:

“हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, मुस्लिम समाज के लोग हमें परेशान करने लगे। वो लोग कह रहे थे कि अगर तुम छठ करने गए तो तुम्हें घाट पर से फेंक दूँगा। इसके बाद हम लोग किसी तरह पूजा-पाठ निपटाने के बाद वापस घर आ गए। अभी हमें घर पहुँचे आधे घंटे भी नहीं हुए थे कि सारी सजावट नोच डाली गई थी। धमकियों के बाद हमारे बच्चे घाट देखने गए थे कि सब सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने देखा कि हमारे लगाए हजार गुब्बारों में से एक भी नहीं बचा है। मुझे जैसे ही इसकी सूचना बच्चों ने दी, मैंने अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद मैं सारे ग्रामीणों के साथ थाना गया। वहाँ हमें ही शांतिपूर्वक बैठने को कहा जाने लगा। हमने पूछा कि क्या हम थाना प्रभारी से बात करने में सक्षम नहीं? तत्पश्चात रतौरा थानाध्यक्ष को हमने सारी बात बताई।”

बकौल देवनारायण उराँव, आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने में पूछा कि यहाँ एक मंदिर टूट जाता है, फिर भी आप लोग कुछ क्यों नहीं करते? हमारे आक्रोश के बाद पुलिस हमें लेकर रात के 10 बजे घाट पर गई। वहाँ जाकर पुलिस ने वीडियो बनाया और हमारे दावे सही पाए। उन्होंने ये भी बताया कि पुलिस ने पुनः सजावट के लिए 500 रुपए की मदद की। उन्होंने बताया कि फिर से बाँस वगैरह काटने पड़े और पूरी सजावट भी करनी पड़ी।

क्या वहाँ पहले से भी हिन्दुओं को परेशानी थी? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि स्थानीय हिन्दू ठीक से शादी-विवाह तक नहीं कर पाते हैं और पूजा-पाठ के दौरान भी तनाव का माहौल पैदा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह के अर्घ्य के समय प्रशासन वहाँ मौजूद था, वरना हम छठ ठीक से नहीं कर पाते। उनका कहना है कि स्थानीय हिन्दू अपने धर्म के नियम-कायदे निभाने को भी तरस जाते हैं। साथ ही जानकारी दी कि इन चीजों के सम्बन्ध में पहले भी थाने में आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस अब बड़ी घटना होने के बाद हरकत में आई है।

कई वीडियो में हिन्दू कार्यकर्ता न्याय के लिए नारेबाजी करते हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही पुलिस की गाड़ी के पास जनता मौजूद दिख रही है। घाट पर तहस-नहस स्थिति में चीजें भी दिख रही हैं, जिनसे महिलाएँ खासी आक्रोशित हैं। एक महिला ने बताया कि वहाँ मुस्लिम समाज के लोग इतनी संख्या में जमा हो गए थे, जितने पर्व मनाने के लिए हिन्दू भी नहीं जाते हैं। महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ जबरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है।

महिला ने बताया कि जब तक ग्रामीणों ने थाने पहुँच कर हंगामा नहीं किया, तब तक पुलिसकर्मी नींद से नहीं जागे। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग सोचते हैं कि हिन्दू संख्या में कम हैं, इसीलिए मारपीट कर भगा देंगे। साथ ही ये भी कहा कि जमीन-जायदाद के झगड़े भी वो हिन्दू समाज के लोगों के साथ करते रहते हैं। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग बोलते हैं कि ‘मुस्लिम इलाका बनाएँगे, हिन्दुओं को यहाँ रहने नहीं देंगे और उनकी जमीनें हड़प के उन्हें भगा देंगे

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी हमें ग्रामीण विकास उराँव ने दी, जिन्होंने रुआँसे स्वर में कहा कि गाँव के लोग मीडिया में अपनी बात रखने के लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन एक भी मीडियाकर्मी वहाँ नहीं पहुँचा है। उन्होंने बताया कि वो भी छठ घाट पर हुई इस हरकत के गवाह हैं। साथ ही दावा किया कि मुस्लिम समाज के कुछ असामाजिक तत्व छठ पर्व कर रही महिलाओं का कपड़े बदलते हुए वीडियो बना रहे थे, जिसके लिए मना करने पर हंगामा शुरू हुआ।

विकास उराँव ने बताया, “हम क्या करें? हम शादी-विवाह तक ठीक से नहीं कर पाते। मुस्लिम समाज के युवक जबरदस्ती हमारे शादी समारोह में घुस जाते हैं और नाचने लगते हैं। हमारे घर की लड़कियों का दुपट्टा खींचा जाता है। महिलाओं के साथ छेड़खानी होती है। हम किसी से कुछ कह नहीं सकते।” विकास बार-बार कह रहे थे कि मीडिया उनके गाँव में आए तो हर ग्रामीण अपनी बात रखने के लिए बेचैन है, लेकिन साथ ही सब डरे हुए भी हैं।

क्या है पुलिस का कहना?

वहीं कटिहार के SDPO अमरकांत झा का भी इस मामले को लेकर बयान आया है। उन्होंने बताया कि रौतारा में छठ पूजा में कुछ असामाजिक तत्वों ने हल्का सा विध्वंस किया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई, वो हरकत में आई और दोनों समय की छठ पूजा संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि अब वहाँ शांति है। उनका कहना है कि ये कोई उस तरह की बड़ी घटना नहीं थी, इसीलिए अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

इस मामले में अब तक कोई गिरफ़्तारी भी नहीं हुई है। SDPO शर्मा ने जानकारी दी कि चीजें सुलझा ली गई हैं, क्योंकि थानाध्यक्ष ने त्वरित पहल की, वो खुद भी घटना की निगरानी कर रहे थे और एसपी ने भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे। देर रात की सामने आई कई वीडियो में पीड़ित हिन्दू और पुलिस की गाड़ियाँ घटनास्थल पर जाती हुई दिख रही हैं। साथ ही इसकी सूचना मिलते ही बजरंग दल और विहिप के पदाधिकारी भी वहाँ पहुँचे।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने  कहा कि बिहार सरकार को संवेदनशील सीमांचल के इलाके में हिन्दू धर्म स्थलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहाँ हिन्दू डर कर रह रहे हैं। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को वहाँ जाकर लोगों की बातें सुननी चाहिए। बंसल ने कहा कि ये बहुत ही बड़ी घटना है और सीमांचल में बढ़ती इस्लामी कट्टरता खतरनाक है।

बिहार में चुनाव के दौरान दुर्गा पूजा विसर्जन में मुंगेर में हुई घटना को लेकर हिन्दू पहले से ही आक्रोशित हैं। उस घटना में दो युवकों की मौत की बात सामने आई थी। ‘मुंगेर बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ ने ऑपइंडिया को बताया था की उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ कि पूरा मुंगेर देख कर रो पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि फायरिंग प्रशासन ने ही की है और पुलिसकर्मी इंसास राइफल और पिस्टल लहराते नज़र आ रहे थे।

 

 

 

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