Home Uncategorized 70 में से 67 सीट पर जमानत जब्त,कुल 4% वोट,

70 में से 67 सीट पर जमानत जब्त,कुल 4% वोट,

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कांग्रेस की इससे बड़ी हार कभी नही मिली होगी।दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणाम में देश की एक बड़ी पार्टी को लगातार दूसरी बार शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है।
एक तो हुई हार, लेकिन ऊपर से 70 सीटों में से 67 सीटों पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशियों की होरना इस बात की गवाही देता है कि, यह हार से भी बड़ी शर्मनाक हार तो है। साथ ही यह चुनावी परिणाम दर्शाते हैं कि, कॉन्ग्रेस पतन की ओर जा रही है। यही कारण है कि दिल्ली चुनाव परिणामों के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली कॉन्ग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्टा मुखर्जी ने में दिल्ली हार के लिए पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है।
इससे भी बड़ी बात यह कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बाद से दुखी नहीं हैं कि, दिल्ली चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की हार हुई है, बल्कि इस बात से ज़्यादा खुश हैं कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी। इस पर भी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने चुटकी ली
दिल्ली में बीजेपी के सत्ता में न आने और अरविंद केजरीवाल के दिल्ली की सत्ता में एक बार फिर से वापसी करने पर कॉन्ग्रेस की खुशी इस बात का इशारा करती है कि, पार्टी दिल्ली पहले ही हार मानकर खुलकर न सही, लेकिन अंदर खाने बीजेपी को किसी भी तरह से दिल्ली की सत्ता में न आने देने के लिए केजरीवाल को जरूर समर्थन दिया होगा।
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि देश की एक बड़ी पार्टी का चुनावी मैदान में बिना उतरे ही एक राज्य की छोटी सी पार्टी के सामने अपने सारे हथियार डाल देना। यह प्रदर्शित करता है कि राहुल गाँधी किसी भी रूप में अपने आपको मोदी के सामने खड़ा होने की हिम्मत नहीं रखते। इतना ही नहीं राहुल गाँधी की नर्वसता उस दिन साफ़ देखी गई कि, जब राहुल गाँधी दिल्ली की इकलौती अपनी जनसभा में बोल बैठे, “6 महीने बाद मोदी को देश के युवा डंडा मारेंगे।” दिल्ली में कॉन्ग्रेस की इकलौती जनसभा में दिया राहुल गाँधी का यह बयान पार्टी के गले की फाँस बन गया, जिसे लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं को सफाई तक देनी पड़ी
इसके बाद तो समझो कॉन्ग्रेस चुनाव प्रचार से गायब ही हो गई, लेकिन अच्छी बात यह रही कि कॉन्ग्रेस के नीरस चुनाव प्रचार का दिल्ली का जनता ने भी उसी तरह से सम्मान किया, जिस तरह से राहुल ने अपने भाषणों में देश के प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी का सम्मान किया था। हालाँकि, राहुल गाँधी के साथ पार्टी के पदाधिकारी पिछले साल महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बनी अपनी सरकार से जागी उम्मीदें भी अब समाप्त हो चुकी है।
दिल्ली हार के बाद पार्टी नेतृत्व को सदमा लगना लाज़िमी है, क्योंकि दिल्ली में शीला दीक्षित युग  की शुरूआत 1998 से मंहगाई के बीच हुए दिल्ली चुनावों में विजय हासिल करने के साथ हुई थी। तब कॉन्ग्रेस पार्टी शीला दीक्षित के नेतृत्व में 70 में से 54 सीटों पर जीतकर आई और सरकार बनाई और वहीं सुषमा स्वराज के नेतृत्व वाली बीजेपी पार्टी को मात्र 15 सीटें लेकर करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2003 में हुए विधानसभा चुनावों में एक बार फिर कॉन्ग्रेस को 70 में से 47 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी कुछ बढ़त के साथ 20 पर ही सिमट गई।