मोहम्मद अराफात उर्फ बबलू को सज़ा ए मौत,4 महीने में कोर्ट ने कहा टांगो इसको

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6 साल की मासूम बच्ची मोहम्मद अराफात को मामा कह कर बुलाती थी,लेकिन वहशी मोहम्मद अराफात उर्फ बबलू हवस का मारा हुआ था।
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट (Special POCSO Court) अरविंद मिश्र ने शुक्रवार को खुली अदालत में थाना सहादतगंज क्षेत्र की 6 वर्षीय बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या के मामले में आरोपी बब्लू उर्फ अराफात को फांसी की सजा सुनाई.
कोर्ट ने चार माह में पूरी की सुनवाई
पॉक्सो कोर्ट ने चार महीने में सुनवाई पूरी करते हुए ठाकुरगंज (लखनऊ) निवासी आरोपी को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई है. गौरतलब है कि 15 सितंबर 2019 को अभियुक्त बबलू उर्फ अराफात ने छह वर्षीय बालिका की अपहरण के बाद बलात्कार कर निर्मम हत्या कर दी थी. आरोपी युवक बच्ची के पिता का दोस्त था और पीड़िता उसको मामा कहती थी. 15 सितम्बर को बबलू पानी पीने के बहाने पीड़िता के घर आया था. पानी पीने के बाद बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने बबलू बाहर ले गया. बच्ची की नानी ने न्यायालय के सामने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि भी की थी. उसके दो तीन घंटे बाद आरोपी बबलू के घर में बेड के नीचे से बच्ची का शव बरामद हुआ था.
पॉक्सो कोर्ट ने चार महीने में सुनवाई पूरी करते हुए ठाकुरगंज निवासी आरोपी को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई है. गौरतलब है कि 15 सितंबर 2019 को अभियुक्त बबलू उर्फ अराफात ने छह वर्षीय बालिका की अपहरण के बाद बलात्कार कर निर्मम हत्या कर दी थी. आरोपी युवक बच्ची के पिता का दोस्त था और पीड़िता उसको मामा कहती थी. 15 सितम्बर को बबलू पानी पीने के बहाने पीड़िता के घर आया था. पानी पीने के बाद बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने बबलू बाहर ले गया. बच्ची की नानी ने न्यायालय के सामने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि भी की थी. उसके दो तीन घंटे बाद आरोपी बबलू के घर में बेड के नीचे से बच्ची का शव बरामद हुआ था.
जघन्य अपराध पर अहम फैसला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची के साथ रेप के बाद पहले चाकू से उसका गला रेतने का प्रयास किया गया और असफल रहने पर गला दबा कर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के गुप्तांग में भी काफी गहरा घाव पाया गया था. निर्भया गैंगरेप केस में गुनाहगारों को सुनाई गई फांसी की सजा और हैदराबाद की महिला डॉक्टर के आरोपियों के एन्काउंटर में मारे जाने के बाद आज लखनऊ की पॉक्सो कोर्ट ने इस वीभत्स मामले में यह अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश के कई जिलों में पाॅक्सो अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offenses Act) के अन्तर्गत अवयस्क बच्चों के साथ हुए अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई गई थीं.
जहां निर्भया के अपराधियों की फांसी की तारीख एक बार फिर से आगे बढ़कर 1 फरवरी हो गई है जिसे लेकर लोगों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है, वहीं उम्मीद है कोर्ट ने चार महीने में त्वरित सुनवाई कर इस 6 वर्षीय निर्भया को जो न्याय दिया है वो आगे कानूनी दांव पेंच में नहीं उलझेगा.