जानबूझ कर की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस ने कांग्रेस का महाअभियोग कचरे में जायेगा 48 घण्टे पहले बता दिया था अब नाटक शुरू होगा अदालती कार्यवाही का

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कांग्रेस चाहती थीं कि जांच का प्रभार मिल जाये सीनियर जज चैंलेश्वर को लेकिन महाअभियोग ड्राफ्ट में 4 जजो की प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़िक्र आ जाने से उनके हाथ मे भी नही जा सकता था,इसलिए स्वीकृत होने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ली जिससे नियम 2 का उलंघन हो कर खारिज हो गया।

BREAKING Vice President M Venkaiah Naidu rejects the impeachment motion against CJI Dipak Misra.

कांग्रेस फंस गई खुद की चाल में
लेकिन फिर सवाल उठता है कि अगर महाभियोग नोटिस में चार वरिष्ठ जजों के सीजेआई के खिलाफ प्रेस कान्फ्रेंस करने का मुद्दा शामिल है तो क्या दूसरे नंबर के जज को ये हक मिलेगा। उस स्थिति में वो चारो जज भी ये तय नहीं कर सकते। ऐसे में एक तरीका ये हो सकता है कि फुल कोर्ट बैठे और कमेटी के जज का नाम तय करे। सीजेआई से काम नहीं छीना जा सकता
अगर किसी जज के खिलाफ जांच होती है तो सामान्य तौर पर सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम आरोपित जज से काम वापस लेने के लिए संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहती है और वे उस जज से न्यायिक कार्य वापस ले लेते हैं। लेकिन चीफ जस्टिस कोर्ट का प्रशासनिक मुखिया होता है उससे काम नहीं छीना जा सकता। हाईकोर्ट के मामले ज्यादा से ज्यादा कोलीजियम उसका दूसरे हाईकोर्ट तबादला कर सकती है लेकिन सुप्रीम के सीजेआई के मामले में तो कुछ नहीं हो सकता। सीजेआई से काम वापस लिये जाने का कोई नियम नहीं है ये सिर्फ उनके अपने विवेकाधिकार पर है कि वे न्यायिक काम छोड़ते हैं कि नहीं। इसके अलावा प्रशासनिक कार्य तो वैसे भी देखेंगे। जैसे मुकदमों की सुनवाई का रोस्टर तय करना आदि। जस्टिस लोढ़ा मानते हैं कि इस बारे में नियम नहीं हैं और सीजेआई से काम नहीं छीना जा सकता। यानि जबतक सीजेआई के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव संसद से पास नहीं हो जाता वे काम करते रह सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट जाने पर सुनवाई पीठ सीजेआई ही तय करेंगे
अगर सभापति सांसदों का नोटिस अस्वीकार कर देते हैं तो कांग्रेस उसके खिलाफ कोर्ट जाने की बात कर रही है। लेकिन अगर वे सभापति के नोटिस अस्वीकार करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं तो उस पर सुनवाई करने वाली पीठ सीजेआई ही तय करेंगे क्योंकि चीफ जस्टिस ही मास्टर आफ रोस्टर होते हैं।