2014 चुनाव को, चुनाव मैनेज करने वाली केम्ब्रिज अनेलिटिका ने अपने दस्तावेज में कांग्रेस को भूलने की सलाह दी है और 2009 को आधार बना कर तैयार रहने को सलाह दी है,कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम ने भाजपा की टीम को मीलों पीछे छोड़ दिया है,कभी यही सबसे मजबूत शाखा थी भाजपा की जो आज मृतप्रायः है,यदि PM मोदी के निज प्रशंसक सक्रिय न हों तो भाजपा का IT सेल और सोशल मीडिया मात्र एक बोझ बन गया है।वहीं कांग्रेस ने इसमे भरपूर धार पैदा कर ली है।
2009 के लोकसभा चुनावों में जीती अमेठी, रायबरेली, मुरादाबाद, बरेली, खीरी, धौरहरा, उन्नाव, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रूखाबाद, कानपुर, अकबरपुर, झांसी, बाराबंकी, फैजाबाद, श्रावस्ती, गोंडा, डुमुरियागंज, बहराइच, महराजगंज और कुशीनगर सीटों के साथ कांग्रेस की नजर उन सात सीटों सलेमपुर, हमीरपुर, लखनऊ, पीलीभीत, फतेहपुर सीकरी, गाजियाबाद और रामपुर सीटों पर भी है, जहां कांग्रेस अच्छे वोट पाकर दूसरे नंबर पर थी। इनमें गाजियाबाद, लखनऊ, रामपर, खीरी, प्रतापगढ़, कानपुर, बाराबंकी, कुशीनगर सीटों पर पिछले चुनाव में भी कांग्रेस ठीक लड़ी। इनके साथ ही सहारनपुर, वाराणसी और मिर्जापुर सीटों पर भी कांग्रेस को 2014 में अच्छा वोट मिला था। पार्टी सूत्रों की माने तो कांग्रेस नेतृत्व इन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।
लोकसभा चुनाव: प्रियंका के साथ उत्तर प्रदेश में ‘सुपर-36’ प्लान लेकर मैदान में उतरेगी
उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी को राजनीतिक पिच पर उतार चुकी कांग्रेस पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव के लिए खास तैयारियां शुरू कर दी है। कांग्रेस पार्टी ने 2019 के चुनाव में भले ही सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला किया हो, लेकिन असल में पार्टी का खास फोकस प्रदेश की उन खास सीटों पर है जहां बीते चुनावों में वह मजबूत स्थिति में रह चुकी है।
लोकसभा चुनाव में यूपी की 36 सीटों पर खास फोकस करेगी कांग्रेस
प्रियंका की अगुवाई में यूपी की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी पार्टी
मजबूत दावेदारी वाली 36 सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर मंथन जारी
चुनाव से पूर्व प्रदेश में छोटी पार्टियों से समझौता कर सकती है कांग्रेस
एसपी और बीएसपी गठबंधन के बाद कांग्रेस ने यूपी की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस तो सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी, लेकिन ‘सुपर-36’ प्लान के साथ कांग्रेस का फोकस यूपी की उन 36 सीटों पर विशेष होगा, जहां पार्टी पिछले चुनावों में मजबूती से लड़ी थी। पार्टी कुछ नेता भले ही बीजेपी के खिलाफ यूपी में महागठबंधन के पक्षधर रहे हों, लेकिन कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व लगातार इन सीटों पर नजर गड़ाए है।
दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस यूपी में मोदी लहर में साफ हो गई हो और उसे दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा हो, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी में 21 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2009 के चुनाव में इस जीत के साथ सात सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे नंबर पर और 11 सीटों पर तीसरे नंबर पर रहे थे। साथ ही छह सीटें ऐसी थी, जहां कांग्रेस प्रत्याशी को 90 हजार से लेकर सवा लाख तक वोट मिले थे। बड़ी बात यह की प्रियंका की ताजपोशी से पहले ही कांग्रेस की टीम नवंबर महीने से ही इन सीटों पर अपना होमवर्क करने में जुटी हुई है।
2014 में कांग्रेस की जीत दो सीटों तक सीमित होने के साथ ही छह सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर और पांच सीटों पर तीसरे नंबर पर रहे। इस चुनाव में भी 12 सीटें ऐसी थीं, जहां कांग्रेस प्रत्याशी को अस्सी हजार से दो लाख के करीब वोट मिले थे।