Monday, August 8, 2022
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आज ये दोनो पूर्व विधायक छोड़ेंगे भाजपा को,बदतमीजी ,अधिकारी बने नेताओं के बाप,दलाली से दुखी

सोमवार को हरियाणा की राजनीति में बड़ी हलचल होने वाली है। दो पूर्व विधायक भाजपा छाेड़कर कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। इनमें नारनौंद से पूर्व विधायक प्रोफेसर रामभगत शर्मा और नारनौल हलके से विधायक रहे राधेश्याम शर्मा शामिल हैं।

प्रोफेसर रामभगत शर्मा

हिसार के नारनौंद हलके से पूर्व विधायक प्रोफेसर रामभगत शर्मा सोमवार को फिर से कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे। वे चंडीगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेन्द्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस में शामिल होंगे। इससे पहले वे भाजपा पार्टी में थे और कृषि कानून को लेकर उन्होंने भाजपा को अलविदा कह दिया था। उसके बाद वह लगातार किसान व मजदूर के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे थे। कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पावर मिलने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि रामभगत शर्मा कभी भी कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं। आखिरकार वो सोमवार को भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगवाई में कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे। रामभगत शर्मा दयानन्द कॉलेज हिसार में बतौर अंग्रेजी के प्राध्यापक रहे। छात्र जीवन में स्विमिंग, हाईजम्प और एथलेटक्सि में यूनिवर्सिटी लेवल की उपलब्धियां प्राप्त की और स्टूडेंट यूनियन में छात्रों के हितों के लिए संघर्ष किया। हरियाणा कॉलेज और आल इंडिया यूनिवर्सिटी टीचर फेडरेशन में सक्रिय भूमिका में रहे। 1987 से सक्रिय राजनीति में आए व कांग्रेस संगठन में पदाधिकारी रहे। हरियाणा विकास पार्टी के प्रांतीय संगठन सचिव रहे। अपने जीवन में किसान, कमेरा वर्ग व छात्रों केहितों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे। सन् 2000 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में सर्व जातीय महापंचायती उम्मीदवार के बैनर के नीचे निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में जीत हासिल की। उस समय की तत्कालीन चौटाला सरकार के साथ एक संबद्ध विधायक के रुप में काम किया। वे 2011 में भूपेन्द्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और 2019 के चुनाव में टिकट न मिलने से आहत होकर भाजपा में शामिल हुए। भाजपा द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा को पूरे प्रदेश में सबसे पहले अलविदा कहकर किसान आंदोलन में सक्रिय हुए थे।

राधेश्याम शर्मा

वहीं महेंद्रगढ के नारनौल हलके से विधायक रहे राधेश्याम शर्मा ने कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने आठ अगस्त को चंडीगढ़ के कार्यालय में कांग्रेस ज्वाइनिंग करने का निर्णय लिया है। इस दौरान उनके समर्थक भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामेंगे। बता दें कि राधेश्याम शर्मा के छोटे भाई एडवोकेट कैलाशचंद शर्मा 1996 में नारनौल हलके से विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद चौटाला सरकार में राजस्व राज्यमंत्री का कार्यभार संभाला। राधेश्याम शर्मा की पत्नि दिवंगत बर्फी देवी जिला प्रमुख रह चुकी हैं। इसके बाद राधेश्याम शर्मा ने 2005 में नारनौल से निर्दलीय चुनाव लड़ा व जीत हासिल की। राधेश्याम शर्मा ने कहा कि उन्होंने इलाके का समान विकास तथा पारदर्शी शासन व्यवस्था की उम्मीद से भाजपा ज्वाइन की थी, लेकिन भाजपा के शासन में नौकरियां बिक रही हैं। महंगाई आसमान को छू रही है, जिस कारण गरीबों को जीना दुर्भर हो गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासन में लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत विकास कार्य हुए हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने का अभियान चलाया जाएगा।

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