Friday, July 31, 2020
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स्वरूपानंद सरस्वती से मांगा गया जमा पैसे और सोने का हिसाब

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का शिलान्यास तय मुहूर्त पर होगा। मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर अयोध्या में श्री राम मंदिर का भूमि पूजन करके मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे। राम मंदिर के शिलान्यास में जगह-जगह से मिट्टी जा रही है। जिसको लेकर रामालय ट्रस्ट के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विरोध जता रहे हैं। अब अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेन्द्रानंद सरस्वती ने शंकराचार्य पर हमला बोला है। उन्होंने मंदिर निर्माण के नाम पर भक्तों से लिए गए सोने का हिसाब मांगा है।
रामालय ट्रस्ट का राम मंदिर भूमि पूजन का विरोध
मंदिर निर्माण के शिलान्यास के लिए तय मुहर्त को लेकर काशी के कई संत सवाल खड़े करते हुए अपनी आपत्ति जता रहे हैं। प्रमुख रूप से रामालय ट्रस्ट के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर के शिलान्यास का गलत मुहूर्त बताया है। एक अल्पसंख्यक के भूमि पूजन में मिट्टी लाने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई है। दरअसल, भगवान राम के ननिहाल यानि उनकी माता कौशल्या की जन्मस्थली से भी मिट्टी आयोध्या के लिए निकल चुकी है। दक्षिण कौशल जो छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता है। वहां के चंद्रखुरी गांव की प्रसिद्ध कौशल्या माता मंदिर की मिट्टी लेकर रायपुर निवासी मोहम्मद फैज खान पैदल निकल चुके हैं।

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेन्द्रानंद सरस्वती ने शंकराचार्य स्वरूपानंद पर हमला बोलते हुए मंदिर निर्माण के नाम पर आस्थावानों से लिए गए सोने का हिसाब मांगा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या श्री राम जन्मभूमि के सम्पूर्ण आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उसका विविक्षेत्र और अखिल भारतीय सन्त समिति ये तीनों एक साथ चले। लेकिन कांग्रेस प्रायोजित एक धारा शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के नाम से हर संगठन के समानांतर विवाद करना और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन को तोड़ने के काम में ये धारा लगी रही।
जब सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच का फैसला आया तो सारे कांटे साफ हो गए लेकिन इन लोगों के तरफ से विवाद खड़ा किया गया।फिर ये कहा गया कि कोई अल्पसंख्यक मिट्टी लेकर आ रहा है। लेकिन सबसे बड़ा अपराध सनातन हिन्दू धर्म को छलने का हुआ। 9 नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के संविधान बेंच का निर्णय आया। भारत सरकार को इसके लिए ट्रस्ट निर्माण का आदेश मिला। 5 फरवरी 2020 को ट्रस्ट की घोषणा प्रधानमंत्री ने की। इसी अवधि के दौरान मार्च 2020 तक श्री राम जन्मभूमि मंदिर के नाम पर शंकराचार्य स्वरूपानंद का रामालय न्यास लोगों से सोना वसूलता रहा।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के गांवों में जहां लोगोंन स्नातनधर्मावलंबियों की भावनाओं का शोषण करके उनसे सोना वसूला है, अखिल भारतीय सन्त समिति यह मांग करती है की वसूले गए सोने का और रामालय न्यास के गठन से लेकर आजतक का हिसाब दे कि यह धन कहां से आया क्योंकि आपके पास अयोध्या में कुछ नहीं था। शंकराचार्य स्वरूपानंद के रामालय ट्रस्ट और जन्मजेय शरण के श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति ट्रस्ट से मंदिर निर्माण के नाम पर लोगों द्वारा दान स्वरूप लिए गए पैसे और सोने वसूलने का आरोप लगा था। जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, ‘यह तथाकथित धर्माचार्य पाई-पाई का हिसाब दें। देश, धर्म और स्नातन धर्मावलंबियों के साथ धूर्तता की है और भगवान राम के नाम का शोषण किया है।’

 

पूर्व में भी
दिग्विजय सिंह. कांग्रेस के नेता. अब जब राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बन गया है, तो दिग्विजय सिंह ने नरेंद्र मोदी को ख़त लिखकर ट्रस्ट में शामिल कुछ नामों पर आपत्ति जताई है.
किन नामों पर दिग्विजय सिंह को आपत्ति है?
वीएचपी के प्रान्तीय उपाध्यक्ष चंपत राय. दिग्विजय सिंह का कहना है कि वीएचपी का सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. वो केवल आरएसएस का एक संगठन है.
इसके बाद अनिल मिश्रा का नाम दिग्विजय सिंह ने लिया है. कहा है कि वो अयोध्या मे एक होम्यापैथिक डॉक्टर है और आरएसएस के प्रांत कार्यवाहक है.
ट्रस्ट में बतौर दलित सदस्य शामिल किये गए कामेश्वर चौपाल के नाम पर भी दिग्विजय सिंह को आपत्ति है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कामेश्वर चौपाल बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं.
और जिस आखिरी नाम पर दिग्विजय सिंह ने आपत्ति दर्ज की है, तो है गोविन्द देव गिरि का. कहना है कि वो संघ के पुराने प्रचारक रहे हैं.
अपने पत्र में दिग्विजय ने लिखा है कि इस ट्रस्ट में कुछ ऐसे लोगो को भी रखा है जो कि बाबरी मस्जिद प्रकरण में अपराधी हैं. और आज भी ज़मानत पर हैं. बाबरी मस्जिद के ढांचे गिराने मे सर्वोच्च न्यायालय ने जिन्हें अपराधी माना है, ऐसे लोगों को मंदिर निर्माण के लिये समिति में मनोनयन करना सर्वथा अनुचित है.
ट्रस्ट को काम दिए जाने पर भी आपत्ति
दिग्व्जिय सिंह ने नरसिम्हा राव के समय बने रामालय ट्रस्ट का भी नाम लिया. कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री नरसिम्हा राव जी ने अपने कार्यकाल में भगवान श्री रामचन्द्र जी के मंदिर निर्माण के लिये रामालय ट्रस्ट का गठन किया था, जिसमें केवल धर्माचार्यों को ही रखा गया था. और किसी राजनैतिक दल के व्यक्ति का मनोनयन नही हुआ था. उस समय जब रामालय ट्रस्ट का गठन हुआ था, तब मुझे सहयोग देने के लिये कहा गया था. मेरे से जितना बना, मैंने रामालय ट्रस्ट के गठन में सहयोग दिया था.
पत्र का वो हिस्सा, जहां दिग्विजय सिंह ने रामालय ट्रस्ट का ज़िक्र किया है, और बताया है कि किन नामों से उन्हें आपत्ति है.
फिर दिग्विजय सिंह ने नरेंद्र मोदी से कहा है कि मंदिर के निर्माण के लिए आपके द्वारा स्वीकृत ट्रस्ट को ज़िम्मेदारी ना देकर रामालय ट्रस्ट को ही ज़िम्मेदारी देनी चाहिए. रामालय ट्रस्ट ने मुझे अवगत कराया है कि वो मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा सरकार से नहीं लेंगे. कहा है कि जब पूर्व में ही भगवान श्री रामचन्द्रजी के मंदिर निर्माण के लिये रामालय ट्रस्ट मौजूद है तो पृथक से ट्रस्ट बनाने का कोई औचित्य नही है. साथ ही संलग्नक के तौर पर दिग्विजय सिंह ने रामालय ट्रस्ट के सदस्यों का नाम भी गिनाया है
दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो ट्रस्ट भगवान श्री रामचन्द्र जी के मंदिर निर्माण के लिये गठित किया गया है, उसमें किसी भी प्रमाणित जगतगुरू शंकराचार्यों को स्थान नही दिया गया है. जिन्हे शंकराचार्यं के नाम से मनोनीत किया गया है, श्री वासुदेवानंद जी, वो न्यायपालिका द्वारा पृथक किए गए हैं. देश में सनातन धर्म के पांच शंकराचार्य के पीठ है, उनमें से ही ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाना उपयुक्त होता जो नही हुआ. ऐसा कहा दिग्विजय सिंह ने.
योगी के मूर्ति प्रोजेक्ट पर भी सवाल
दिग्विजय सिंह ने पत्र में योगी सरकार पर भी निशाना साधा है. कहा है कि योगी आदित्यनाथ ने एक भव्य मूर्ति बनाने की घोषणा की है जो कि सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत है. मन्दिर में दैनिक सेवा होती है, 220 मीटर ऊंची मूर्ति की सफाई कैसे होगी? तर्क है कि उसको चिड़िया आदि गंदा कर देंगे.
चंदे पर भी सवाल
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विश्व हिन्दू परिषद् ने चंदा लिया. लेकिन इस चंदे का हिसाब अभी तक सामने नहीं. इसको लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाये हैं.
चिट्ठी का वो हिस्सा, जहां दिग्विजय सिंह ने पैसे का हिसाब देने की मांग की है.
कहा है कि मंदिर का निर्माण हो, इसके लिए आन्दोलन में करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. और भारी मात्रा में चन्दा दिया. इसका हिसाब आज तक जनता के सामने नहीं रखा गया. कहा कि जब आयकर विभाग ने नोटिस दिया, उस समय नोटिस देने वाले अधिकारी के खिअलाफ़ कार्रवाई हो गयी. जिन करोड़ों दानदाताओं ने मंदिर निर्माण के लिए पैसा दिया है, उसका 28 वर्षों का ब्याज सहित हिसाब उन्हें मिलना चाहिए.

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