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क्या ये लाशें मुलायम सिंह यादव को चैन से जीने देती होंगी,जीते जी मौत से बदतर बेइज्जती भुगत रहे

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1990 में हुए कारसेवकों के नरसंहार को आज तक कोई भुला नहीं पाया है| आज भी उस दिन को याद कर के लोगों का दिल दहल जाता है|क्या गुना था उन कारसेवकों का|बस इतना ही कि वे अपने प्रभु राम का मंदिर वहां देखना चाहते थे| पर उन्हें क्या पता था कि उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ इस तरह खिलवाड़ किया जाएगा कि उनसे उनकी जान ही ले ली जायेगी
तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने लाखों कारसेवकों पर गोलियां बरसाई| पर आज इस गोलीकांड को लेके जो खुलासा हुआ है उसने सब को चौंका दिया है|
ये सब तब सामने आया जब रिपब्लिक भारत ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वीबी सिंह, जो उस समय राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन के SHO थे, उन पर स्टिंग किया|स्टिंग के दौरान अधिकारी ने चौंकाने वाले कई खुलासे किए।
रिपोर्टर ने जब SHO से पूछा कि मैं ये जानना चाहता हूँ जब ये घटना घटी जिसमें बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो उसके बाद सरकार ने कहा कि सिर्फ 18 लोग मारे गए थे, क्या ये सच है?
तत्कालीन थानेदार वीर बहादुर सिंह ने कहा देखिए जो मारे थे लोग विदेश के पत्रकार आए थे, डीएम- एसएसपी ने कहा कि आप जाइये और SO से बात किजिए। तो बाक़ायदा कैमरा लेकर आए बात कर रहे थे, तो उसमें जो स्टेटमेंट बना था तो उसमें आठ लोग गोली से मारे गए दिखाए गए थे, 42 आदमी घायल दिखाए  थे।
उसके बाद जो लाश मिलती थी वो कारसेवकों की है और यह हकीक़त थी कि सरकार को जो रिपोर्ट देनी थी कि तो हम गए श्मशान घाट पर और वहां जो लोग बैठते हैं जब हमने पूछा कि कितनी लाश आती हैं जो दफनाई जाती हैं और कितनी जलाई जाती हैं तो उसने बताया कि 15 से 20 लाशें दफनाई जाती हैं तो हमने उस आधार पर सरकार को स्टेटमेंट दिया था कि लाशें जो हैं कारसेवकों की नहीं हैं दफनाई हुई हैं लेकिन हकीक़त ये है कि वो लाशें कारसेवकों की थी। मरे तो काफी लोग थे, जब गोली चली तो दोनों तरफ से काफी लोग मारे गए थे, आंकड़ें नहीं मालूम लेकिन मारे काफी लोग गए थे।
इससे ये सामने आया कि सरकार जिसके द्वारा उस वक़्त घटना पर आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार गोलीबारी में 16 लोग मारे गए थे वो झूठ था जबकि सच ये है कि यह संख्या संभावित रूप से कहीं अधिक थी|
यही नहीं स्टिंग में ये भी दावा किया गया है कि कारसेवकों का उचित तरीके से हिंदू अंतिम संस्कार भी नहीं किया गया और इसकी बजाए उन्हें दफनाया गया।