Sunday, October 25, 2020
Uncategorized

आकांशा सिंह ने शत प्रतिशत हासिल किया NEET परीक्षा में,शोएब आफताब को भी शत प्रतिशत

भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत सार्जेंट की बेटी ने नीट 2020 में शत प्रतिशत नंबर हासिल कर इस प्रतिष्ठित परीक्षा के टॉपरों में दूसरे नंबर पर अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस उपलब्धि पर कुशीनगर से गोरखपुर तक जश्‍न मन रहा है। आकांक्षा मूल रूप से कुशीनगर की रहने वाली हैं।

शुक्रवार को उनकी कामयाबी का जश्‍न गोरखपुर के कोचिंग संस्‍थान में भी मना। आकांक्षा ने नीट-2020 की परीक्षा में आल इंडिया रैंक में दूसरा स्थान हासिल किया है। उसे 720 में 720 अंक मिले। वह यूपी टॉपर भी है। कुशीनगर की वह पहली लड़की बन गई है जिसने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में इतना अच्छा रिजल्‍ट हासिल किया। परीक्षा का परिणाम आज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा घोषित किए गया है|

कुशीनगर अभिनायकपुर की आकांक्षा सिंह ने इस परिणाम को सभी बाधाओं से लड़ते हुए प्राप्‍त किया है। बिना किसी खास सहयोग या कोचिंग के डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा किया। इस सपने को पूरा करने के लिए आकांक्षा ने दिन-रात एक कर दिया था। वह कुशीनगर से निकलकर गोरखपुर और यहां से दिल्‍ली तक गईं। कड़ी मेहनत से तैयारी की। गोरखपुर में कोचिंग के दौरान उनकी मां उन्हें रोज कुशीनगर के बस स्टॉप तक लेकर जाती थीं। गोरखपुर से वापस आते समय कोचिंग का स्‍टॉफ उसे बस स्‍टॉप पर छोड़ता था।

मां भूतपूर्व सैनिक, मां टीचर
आकांक्षा के पिता भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड सार्जेंट हैं। उनकी मां रुचि सिंह गांव पर ही प्राथमिक स्‍कूल की टीचर हैं। बेटी की इस कामयाबी से वे दोनों बेहद खुश हैं। शुक्रवार को रिजल्‍ट आने के बाद उन्‍होंने अपने पूरे गांव में मिठाई बांटकर इस खुशी का इजहार किया।
शोएब आफताब ओड़ीसा से भी शत प्रतिशत

नीट की परीक्षा (NEET Exam) में 100 फीसद मतलब 720 में से 720 नंबर हासिल करने वाला शोयब आफताब चर्चाओं में है. उड़ीसा (Odisha) के रहने वाले शोयब ने कोटा (Kota) में रहकर नीट की तैयारी की थी. फर्स्ट आने के बारे में शोयब ने एक राज़ फाश करते हुए बताया कि सिर्फ एक ऐसा काम था जिसे करने से मेरी सारी परेशानियां दूर हो गईं. फिर तो परीक्षा से पहले ही नीट मुझे आसान लगने लगी. मैं इंतज़ार करने लगा कि अब परीक्षा कब होगी. मैं चाहता था कि परीक्षा ज़ल्द से ज़ल्द हो जाए. शोयब अपने परिवार में शख्स है जो डॉक्टरी (Doctor) की पढ़ाई करेगा.

लॉकडाउन के पूरे 6 महीने तक शोयब ने किया था यह काम

राउरकेला, उड़ीसा के रहने वाले शोयब ने बताया, मैं कोटा में अपनी मां और बहन के साथ पीजी में रहता हूं. जब देश में कोराना महामारी फैली तो उस वक्त भी मैं मां और बहन के साथ कोटा में ही था. हर राज्य से बसें बच्चों को लेने के लिए कोटा आ रहीं थी. मेरे पापा का फोन भी आया कि घर वापस आ जाओ. लेकिन लॉकडाउन के दौरान मैं घर नहीं गया. यहं तक की ईद भी मैंने कोटा में ही मनाई.

Leave a Reply