Home Blog Page 124

मौलाना आफताब उर्फ नाटे ,कुख्यात अपराधी,39 से ज्यादा हलाला करके बर्बाद कर चुका था जिंदगियां

हलाला कर 39 महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर चुका था मौलाना
नाटे दरगाहों में आने वाले श्रद्धालुओं से कहता था. मैं तांत्रिक हूं, भूत.प्रेत की बाधा दूर कर सकता हूं
 मौलाना बना हुआ आफताब उर्फ नाटे जो अब दुनियां में नही रहा                     26 एनकाउंटर कर चुके इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह की जुबानी।
–तलाक के बाद हलाला कर 39 महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर चुका था मौलाना बना हुआ आफताब उर्फ नाटे जो अब दुनियां में नही रहा है। इस मौलाना की मौत इलाज के दौरान हो चुकी है। उसे  केंद्रीय कारागार नैनी से हॉस्पटिल में एडमिट कराया गया था। पुलिस ने 24 अगस्त को इस इनामी शातिर अपराधी को तमिल फिल्म में एक्टिंग कर चुके एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अनिरुद्ध सिंह के सहयोग से एडीजी इलाहाबाद एसवी सावंत की अगुवाई में बॉलीवुड स्टाइल में अरेस्ट किया था।
मौलाना करीम करता रहा झाड़.फूंक

————————–आफताब उर्फ नाटे पर इलाहाबाद पुलिस ने 12 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। एसपी सिटी सिद्धार्थ शंकर मीणा के मुताबिक नाटे 1985 से फरार चल रहा था। नाटे नाम बदलकर मौलाना करीम के नाम से घूम रहा था। वो मुंबई, सूरत, अजमेर शरीफ और फर्रुखाबाद जैसे शहरों की मस्जिदों और दरगाहों में छिपता फिर रहा था। नाटे दरगाहों में आने वाले श्रद्धालुओं से कहता था. मैं तांत्रिक हूं, भूत.प्रेत की बाधा दूर कर सकता हूं। इससे वो लोगों से पैसे ऐंठता और उन्हें ताबीज बनाकर देता था।

39 महिलाओं की जिंदगी कर चुका था बर्बाद

——————————————-. एसपी सिटी के मुताबिकए नाटे खुद को हलाला निकाह एक्सपर्ट भी बताता था। उसने पूछताछ के दौरान झांसा देकर 39 महिलाओं का हलाला करवाने की बात कबूल की है। उसने लोगों को धोखा तो दिया ही, साथ ही लाखों रुपए भी ऐंठे।. इस धोखेबाजी के बिजनेस के लिए उसने अपना नेटवर्क तैयार किया था। 33 सालों में उसने खुद को सिद्ध मौलाना बताकर दर्जन से ज्यादा शागिर्दों की टीम बनाई थी। ये शागिर्द उसके तंत्र.मंत्र की विद्या का प्रचार.प्रसार करते थे। मौलाना करीम के नाम से ही वो सारे गलत काम करता था लेकिन कहीं पर भी उसने अपना कोई आईडी प्रूफ नहीं बनवाया था।

हर 15 दिन में बदल देता था सिम कार्ड

————————————-. पुलिस से बचने के लिए वो महीने.15 दिन में सिम कार्ड चेंज कर देता था और गोपनीय तरीके से फैमिली से कॉन्टेक्ट में रहता था। जब पुलिस ने फैमिली से पूछताछ की तो उन्होंने उसके बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर दिया था। परिवार का कहना था कि नाटे से उनका कोई संबंध नहीं है क्योंकि वो उन पर तेजाब फेंक कर घर से भागा था और तब से वापस नहीं लौटा। पुलिस ने लगातार उनका नंबर सर्विलांस पर रखा और इसी से नाटे की लोकेशन का पता लगाया।

भांजी से हुई छेड़छाड़ तो कर दिया था मर्डर

—————————————– गिरफ्तार होने के बाद नाटे ने बताया थाए मैं इलाहाबाद के शाहगंज थाना क्षेत्र में रहता था। 1981 में मोहल्ले के लड़के मोहम्मद अजमत ने मेरी भांजी से छेड़खानी की थी। उसकी हरकत ने मेरे अंदर इतना गुस्सा भर दिया कि मैंने बदला लेने की ठान ली। मैं अजमत के पास पहुंचा और उसे वहीं गोली से उड़ा दिया। पुलिस ने मुझे गिरफ्तार किया और दो साल बाद 1983 में मुझे जिला कोर्ट ने ताउम्र कारावास की सजा सुनाई। मैंने सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की और दो साल बाद 1985 में मुझे जमानत भी मिल गई। जेल से बाहर आते ही मैं शहर से भाग गया।

बॉलीवुड स्टाइल में हुई थी गिरफ्तारी
 26 एनकाउंटर कर चुके इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि हमने गिरफ्तारी से एक महीने पहले इसकी तलाश तेज की थी। खबर मिली कि आफताब उर्फ नाटे कौशांबी एक प्रोग्राम में आने वाला था। हम वहां पहुंचे थे लेकिन वो चकमा देकर निकल गया। हमने उसके फैमिली मेंबर्स का फोन सर्विलांस पर रखा था जिससे हमें उसके पुराने साथी नवाब के बारे में पता चला। हमने उसे दबोचा। पहले उसने नाटक किया फिर हमारी सख्ती के बाद उसने नाटे की डीटेल्स बताईं। नवाब ने बताया. नाटे पीर बाबा की मजार पर एक मेंटल आदमी की झाड़.फूंक करने आया था। वही फैमिली उसका नंबर देगी और के बाद वॉलीवुड की फिल्मी अंदाज में उसे दबोच लिया गया था।

सर्जिकल स्ट्राइक 2: कैम्प तबाह,अड्डे गिराए,कितने मारे गिनती नही,70 से ज्यादा जिंदा पकड़े

भारत और म्यांमार ने साझा ऑपरेशन करते हुए उत्तर-पूर्वी राज्यों में कई आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया। दोनों देशों की सेनाओं ने मणिपुर, नागालैंड और असम में सक्रिय आतंकी संगठनों के कैम्पों को तबाह किया। यह सब कुछ एक दिन में नहीं हुआ बल्कि यह भागीदारी पूरे 3 सप्ताह तक चली। इससे पहले ऑपरेशन सनशाइन के तहत भी दोनों सेनाओं ने यह कार्रवाई की थी। भारत और मयांमार आपस में 1640 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, ऐसे में दोनों देशों के बीच इस तरह की अंडरस्टैंडिंग होना सही है। इसको ‘ऑपरेशन सनशाइन 2’ कहा जा रहा है।

ET Defence

@ETDefence

Sources said at least six dozen militants belonging to these groups were nabbed and several of their camps destroyed during the operation. https://bit.ly/2RkAxBv 

Armies of India, Myanmar target NE militants in coordinated operation

Myanmar is one of the strategic neighbours of India and shares a 1,640-km border with a number of north-eastern states, including the militancy-hit Nagaland and Manipur.

economictimes.indiatimes.com

46 people are talking about this
दोनों देशों की सेनाओं ने इस संयुक्त ऑपरेशन में जिनको निशाना बनाया गया, उनमें कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (KLO), एनएससीएन (NSCN), उल्फा और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) शामिल हैं। इस अभियान के दौरान 70 से भी अधिक आतंकियों को धर-दबोचा गया और उनके ठिकाने तबाह कर दिए गए। इस अभियान में असम राइफल्स के जवानों ने भी भाग लिया। दोनों देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ लगातार एक-दूसरे से जानकारियाँ साझा कर रही हैं और इसके आधार पर आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ की जा सकती हैं।
भारतीय सेना ने नार्थ-ईस्ट में म्यांमार की सीमा से लगे इलाकों में बने उग्रवादी कैंप पर सर्जिकल स्ट्राइक की है. भारत और म्यांमार सेना के संयुक्त ऑपरेशन में इस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया और कई उग्रवादी कैंप को नेस्तानाबूत कर दिया गया. सेना की इस कार्रवाई के बाद आतंकी भागने लगे जिन्हें सुरक्षाबलों ने धर दबोचा. दोनों देशों ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन सनशाइन-2’ का नाम दिया है. बताया जाता है कि जिस तरह से दोनों देशों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है उससे उग्रवाद को तगड़ा झटका लगा है.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों की ओर से म्यांमार बॉर्डर पर चलाए गए ‘ऑपरेशन सनशाइन-2’ में दो बटालियन के अलावा स्पेशल फोर्सेज असम राइफल्स और घातक इन्फेंट्री के जवानों को शामिल किया गया था. वहीं म्यांमार सेना ने अपनी विशेष टीम तैयार की थी. पिछले काफी समय से म्यामांर बॉर्डर पर उग्रवादी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही थी. बताया जाता है कि इस कार्रवाई में कई उग्रवादी कैंप पूरी तरह से तबाह कर दिए गए हैं. अभी तक इस बात की जानकारी हासिल नहीं हो सकी है कि सर्जिकल स्ट्राइक में कितने आतंकी मारे गए हैं.
गौरतलब है कि इसी साल 22 से 26 फरवरी के बीच दोनों देशों ने ‘ऑपरेशन सनशाइन-1’ चलाया गया था. उस वक्त भारतीय सेना ने भारतीय क्षेत्र के अंदर संदिग्ध अराकान विद्रोही कैंपों के खिलाफ कार्रवाई की थी. उस वक्त भारतीय सेना की ओर से की गई कार्रवाई से डरे आतंकी म्यांमार की ओर भाग गए थे लेकिन उन्हें वहां की सेना ने गिरफ्तार कर लिया था.

राहुल गांधी के इंग्लैंड में होने के कारण नही चुना जा सका कांग्रेस का लोकसभा सदन नेता

कांग्रेस ने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि लोकसभा में पार्टी का नेता किन्हें नियुक्त किया जाए। यह मुद्दा अब तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास लंबित है। संसद का सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और ऐसे में जहां तक सदन में विपक्षी दलों के बीच समन्वय स्थापित करने की बात है, विपक्ष उधेड़-बुन की स्थिति में नजर आ रहा है। दरअसल, अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा के लिए उसकी कोई बैठक नहीं हुई है।
साथ ही, इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि विपक्षी दलों की इस तरह की बैठक कब होगी। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि ज्यादातर विपक्षी दलों को लोकसभा में अपने नेता को लेकर फैसला करना अभी बाकी है और इन प्रक्रियाओं के पूरी होने के बाद एक बैठक आयोजित की जाएगी। खुद कांग्रेस ने भी इस बारे में फैसला नहीं किया है कि वह लोकसभा में अपना नेता किन्हें नियुक्त करेगी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘अब तक, कोई फैसला नहीं किया गया है और यह मुद्दा नेतृत्व के पास अब तक लंबित है।’’

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के साथ पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और केरल से पार्टी के नेता के. सुरेश रविवार को सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए। इससे ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन दोनों नेताओं में से एक को लोकसभा में कांग्रेस का नेता बनाया जा सकता है। चौधरी और सुरेश के साथ-साथ कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरूवनंतपुरम से लगातार तीन बार सांसद शशि थरूर भी लोकसभा में कांग्रेस के नेता पद की दौड़ में शामिल हैं।

इससे पहले ये कयास लगाए जा रहे थे राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश के बाद वह (राहुल) लोकसभा में यह जिम्मेदारी संभाल सकते हैं लेकिन उनके अध्यक्ष पद पर बने रहने के बारे में कांग्रेस के जोर देने के बाद इस चर्चा पर विराम लग गया है। थरूर ने इससे पहले अपने बारे में कहा था कि वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता पद की पेशकश किए जाने पर यह जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं।

विपक्ष ने 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से कोई बैठक नहीं की है। आमचुनाव में भाजपा नीत राजग ने शानदार जीत हासिल की। नवगठित 17वीं लोकसभा का प्रथम सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा।

ममता बनर्जी को डॉक्टरों की खरी खरी,बात होगी तो खुले में होगी,पूरी मीडिया के सामने होगी

डॉक्टरों ने ममता बनर्जी से बातचीत करना स्वीकार कर लिया है लेकिन एक शर्त के साथ,बातचीत खुले में होगी कोई पर्दा नही और मीडिया के सामने होगी।
ममता बनर्जी की जिद की लड़ाई में अब ममता का वोट बैंक माना जाने वाला मुस्लिम समाज भी नाराज़ होने लगा है,मुस्लिम नेताओं ने खुले रूप से कहना शुरू कर दिया है की 200 गुंडों के लिए पूरे पश्चिम बंगाल के मुसलमानों को कटघरे में खड़ा कर दिया है ममता बनर्जी ने।
अमित शाह हर लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रणा के बाद तय करते हैं। मुकाबले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी हैं। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का नारा बुलंद कर दिया है। जवाब में ममता बनर्जी मां, माटी, मानुष से आगे निकलकर बंगाल की अस्मिता के सहारे हैं।
दिलीप घोष का कहना है कि पश्चिम बंगाल की सरकार अराजक हो चुकी है। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा है और आए दिन भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं, उनकी हत्या हो रही है। घोष कहते हैं लेकिन हम हर कुर्बानी के लिए तैयार हैं। दिलीप घोष राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे। प्रचारक का जीवन जीते रहे हैं।
इस समय उनके हाथ में पश्चिम बंगाल भाजपा की कमान है। उनमें संगठनात्मक क्षमता कूट-कूट कर भरी है। घोष का कहना है कि राज्य की जनता त्रस्त है। वह विकल्प देख रही है और जनता ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को 40 फीसदी वोट और लोकसभा की 18 सीटें देकर इसे साबित कर दिया है। इससे बनर्जी परेशान हैं।
भाजपा के जवाब में ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिली, 43 फीसदी वोट खाते में आए। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है भाजपा ने ममता बनर्जी के नींव की ईंट हिला दी है। भाजपा के पश्चिम बंगाल में आईटी सेल के प्रमुख दीपक दास ने काफी सक्रियता दिखाई और बताया कि कैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाया जाता है।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दलित, आदिवासी और खासकर हिंदुओं पर फोकस किया। मुद्दों के चयन में भी इसको लेकर सावधानी बरती गई। बांग्लादेशी दलित आदिवासियों और झारखंड की सीमा से सटे आदिवासियों को मिलाने में भी कुशलता दिखाई।
छिड़ गई है वर्चस्व की लड़ाई
पश्चिम बंगाल की राजनीति में घुमावदार मोड़ आया है। तृणमूल कांग्रेस ने सीपीआई (एम) पर काफी दबाव बनाया। नतीजतन सीपीआई (एम) के नेताओं ने तृणमूल को हराने के लिए भाजपा का दामन थाम लिया। इसके कारण 2014 के चुनाव में 30 फीसदी वोट पाने वाली सीपीएम (आई) को 2019 में केवल 6 फीसदी वोट मिले।
हालांकि तृणमूल को 2014 के मुकाबले 4 फीसदी वोट ज्यादा मिले। वह 39 से 43 फीसदी वोट पाने में सफल रही, लेकिन भाजपा के वोटों में अप्रत्याशित इजाफा हुआ। यहां तक कि भाजपा माल्दा जैसे करीब 52 प्रतिशत वाले मुस्लिम बाहुल इलाके में एक सीट जीत गई और दूसरी केवल 8222 मतों से हारी है।
यह नतीजा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हजम नहीं हो रहा है। क्योंकि माल्दा में केवल 48 फीसदी वोट हिंदुओं के हैं और भाजपा 36 फीसदी वोट पाने में सफल रही। इस तरह से सांप्रदायिक बंटवारा करके भाजपा ने तृणमूल को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
मुकाबले में ममता बनर्जी बेहद आक्रामक होती जा रही हैं। वह जयश्री राम के नारे से लेकर भगवा रंग तक से परहेज करने लगी हैं। मुख्यमंत्री के इस रुख पर भाजपा ने केंद्र में नई सरकार बनने के बाद चारों तरफ से शिकंजा कसना आरंभ कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भी पश्चिम बंगाल को लेकर लगातार संवेदनशील है।
क्या रहेगा पश्चिम बंगाल सरकार का भविष्य
राज्य में केशरी नाथ त्रिपाठी राज्यपाल हैं। कानूनविद् हैं। महामहिम को केंद्र सरकार की शक्तियों और राज्य सरकार की सीमाओं की ढंग से जानकारी है। राज्य में हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं में शीर्ष स्तर से लेकर गांव और ब्लाक के स्तर पर टकराव की स्थिति है। 2019 में 26, 2017-18 में 96 राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए। केंद्र ने राज्य सरकार से वहां हिंसा के हालात को लेकर रिपोर्ट मांगी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस तरह से राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू किया है। लेकिन माना जा रहा है कि न तो भाजपा के महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और न ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राज्य सरकार को बर्खास्त करके ममता बनर्जी को कोई सहानुभूति का लाभ देने के पक्ष में हैं।
इसलिए भविष्य में राज्य सरकार पर केंद्र का लगातार दबाव बना रहेगा, लेकिन सरकार के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने के संकेत कम हैं। 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और इससे पहले भाजपा वहां पूरी जमीन तैयार कर लेना चाहती है।

BREAKING NEWS : लव जिहाद गैंग का खुलासा, हिन्दू लड़कीं की आत्महत्या के बाद रहस्य खुला

लव जिहाद की बलि चढ़ी  की हिंदू लड़की अश्विनी
आजकल लव जिहाद के मामले कुछ ज्यादा सामने आने लगे है। हाल ही में इस तरह का एक वाक्या कोयंबटूर में सामने आया है। कोयंबटूर के श्री नारायण गुरु कॉलेज की बी. कॉम के प्रथम वर्ष की छात्रा ने 25 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के बाद छात्रा के पिता ने हिंदू मुन्नानी कार्यकर्ता और अधिवक्ता, श्रीधर मूर्ति के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह आरोप लगाया की ‘एक मुस्लिम युवक जफर द्वारा छात्रा को प्यार करने एवं धर्मांतरण करने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था।’
अधिवक्ता श्रीधर मूर्ति के अनुसार छात्रा ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था जिसे पुलिस ने छिपा दिया। उस नोट में छात्रा ने लिखा था कि जफर उसके घर पर 30 मिनिट तक के लिए था और उसे धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित कर रहा था साथ ही उसे वह धमकी दे रहा था कि अगर तूने ऐसा नहीं किया तो उसका परिवार शहर में सुरक्षित नहीं रह पाएगा। इतना सब कुछ होने के बाद मानसिक तौर पर प्रताड़ित होकर छात्रा ने आत्महत्या का फैसला लिया।
अश्विनी को उसके कमरे में फांसी पर लटक जाने के बाद, गंगाधरन ने उसे बचाने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचाया। जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया था। गंगाधरन ने पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस ने जांच प्रारम्भ कर सबूत जुटाए। उस समय पुलिस ने इस घटना के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा और गंगाधरन को अगली सुबह पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया।
जब गंगाधरन अगली सुबह स्टेशन पहुंचे, तो एफआईआर पहले से ही तमिल में लिखी जा चुकी थी। बता दें की केरल के मूल निवासी गंगाधरन को न तो तमिल पढ़ना आता था और न ही लिखना फिर भी उसे एफआईआर पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया ताकि वह शव को वापस लेकर अपने घर थानास्सेरी, कन्नूर जा सके।
इसकी शिकायत कुनियामुथुर पुलिस स्टेशन में की गई थी। गंगाधरन ने आरोप लगाया कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और मेरी बेटी की हत्या कर जफर खुले आम घूम रहा हैं। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने लव जिहाद ’मामले में तत्काल कार्रवाई करने का फैसला किया।
इसके अलावा गंगाधरन ने यह भी आरोप लगाया है कि जफर पांच सदस्यीय मुस्लिम गिरोह का हिस्सा है जो लड़कियों को लव जिहाद के लिए हिंदू लड़कियों को फंसा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से डरती है क्योंकि वे मुस्लिम समुदाय से हैं।
हालांकि, पुलिस के सूत्रों ने कहा है कि इस मामले में कोई धार्मिक एंगल नहीं था और उन्होंने दावा किया है कि आत्महत्या प्रेम विवाद के कारण हुई थी।

मध्यप्रदेश में निर्दलीय विधायकों की चमकने वाली है किस्मत

मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार गिराने की कथित कोशिशों पर विराम लगाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ जल्द ही अपने मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि कई पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लेकर नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।
कमलनाथ द्वारा हाल ही में यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र से ये संकेत मिले हैं। पत्र में उन्होंने लिखा है कि प्रदेश के बड़े नेता (कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया) अपने कोटे से दो-दो मंत्रियों की संख्या कम कर दें तो 6 पद खाली हो जाएंगे।
इन पदों पर निर्दलियों को मंत्री बना दिया जाए। इससे भाजपा द्वारा सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिशों पर रोक लगाई जा सकती है। पत्र में यह भी कहा गया है कि अब प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है।
बता दें कि अभी कमलनाथ के मंत्रिमंडल में 28 मंत्री हैं। जबकि 6 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावनाएं हैं। मंत्रिमंडल में अभी सबसे ज्यादा 10 मंत्री कमलनाथ कोटे से हैं, जबकि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कोटे से सात-सात मंत्री हैं।
मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल कांग्रेस के 114, भाजपा के 108, 4 निर्दलीय, 2 बसपा और 1 सपा से विधायक हैं। मुख्यमंत्री ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल विस्तार में ही चौथी बार के निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया था, जिससे सरकार के सर्मथन में 115 विधायक हो गए हैं।

मध्यप्रदेश के एक पुलिस अधिकारी ने दूसरी बार ठुकराया BIG BOSS में जाने का मौका

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात सचिन अतुलकर अपनी फिटनेस और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण चर्चा में छाए रहते हैं। एक बार फिर वह सुर्खियों में हैं। दरअसल, उन्होंने दूसरी बार रिएलिटी शो बिग बॉस का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है।
उन्हें बिग बॉस के 13वें सीजन के लिए आमंत्रण मिला था लेकिन उन्होंने शासकीय सेवा और व्यवस्तता का हवाला देते हुए इस ऑफर को ठुकरा दिया है। सलमान खान के फैन सचिन अतुलकर के सोशल मीडिया पर लाखों फैन हैं। इसी कारण उन्हें बिग बॉस में शामिल होने के दो बार ऑफर दिए गए। उनकी कार्यशैली और कार्य करने का तरीका पुलिस विभाग के लिए एक मिसाल है।
फिटनेस के मामले में पुलिस विभाग में उन्हें एक आदर्श के तौर पर देखा जाता है। अपनी फिटनेस को लेकर सजग अतुलकर दो से तीन घंटे जिम में बिताते हैं। इंस्टाग्राम पर उनके दो लाख फॉलोवर्स हैं। इसके अलावा गूगल, और यूट्यूब पर भी उन्हें सर्च किया जाता है।
सचिन अतुलकर का जन्म मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आठ अगस्त 1985 को हुआ था। 2007 में केवल 22 साल की उम्र में वह आईपीएस अधिकारी बन गए थे। उन्हें बतौर एसपी उज्जैन तीसरा जिला मिला है। इससे पहले वह बालाघाट और सागर जिले में तैनात रह चुके हैं। उनके पिता सेवानिवृत्त वन अधिकारी हैं जबकि उनका भाई भारतीय नौसेना में है।

मोहम्मद अज़ाज़ ने पुलिस अधिकारी सौम्या पुष्करणा को जिंदा जला दिया,3 बच्चे हुए अनाथ

 महिला पुलिस अधिकारी को ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाया, खुद भी झुलसा
महिला पुलिस अधिकारी जब ड्यूटी के बाद घर लौट रही थी तब आरोपी ने उस पर कथित रूप से पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया,
जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
केरल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. केरल के मावेलिक्कारा में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर महिला पुलिस अधिकारी पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 34 वर्षीय महिला पुलिस अधिकारी की शनिवार को मौत हो गई.
नागरिक पुलिस अधिकारी (सीपीओ) के तौर पर तैनात सौम्‍या पुष्‍पाकरन मावेलिक्कारा के वल्लीकुन्नम पुलिस थाने में तैनात थी. न्‍यूज वेबसाइट मातृभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, सौम्‍या के तीन बच्‍चे हैं और उनके पति विदेश में नौकरी करते हैं. दरअसल, महिला पुलिस अधिकारी जब ड्यूटी के बाद घर लौट रही थी तब आरोपी ने उस पर कथित रूप से पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
कुल्हाड़ी लेकर आया था आरोपी
रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय सौम्‍या पुष्‍पाकरन दोपहिया वाहन से घर जा रही थी. उसी दौरान एक कार ने उसे टक्‍कर मार दी. आरोपी कार से कुल्‍हाड़ी लेकर बाहर निकला. आरोपी की पहचान मोहम्मद अज़ाज़ के तौर पर की गई है. सौम्‍या अपनी जान बचाने के लिए भागकर पास के एक मकान में छुप गई.
मोहम्मद अज़ाज़ भी वहां पहुंच गया और उसने सौम्‍या को दबोच लिया. उसके बाद उसने पेट्रोल छिड़क कर उसे आग के हवाले कर दिया. भयानक रूप से जलने के कारण सौम्‍या की मौके पर ही मौत हो गई. फॉरेंसिक अधिकारी घटना स्‍थल पर जांच कर रहे हैं.
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. महिला को जलाने के दौरान आरोपी भी झुलस गया था और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने कहा कि हमले के कारण का पता लगाया जा रहा है. अधिकारी ने कहा कि आरोपी को अलप्पुझा में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उससे पूछताछ के बाद ही वारदात की वजह का पता चल सकेगा

इमरान खान को फिर पाकिस्तान में लोगो ने कहना शुरू किया,इमरान चरसी

इमरान खान की हरकतों का दुनियाभर में उड़ा मजाक।क्रिकेट खिलाड़ी रहते इमरान खान पर अक्सर ड्रग्स लेने के आरोप लगते रहे हैं,अपने खेल जीवन के उतर्रार्ध में तो सब इमरान को चरसी कह कर बुलाते थे लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद अजीबोगरीब हरकतों ने इमरान खान को मज़ाक बना दिया है।
बिश्केक (किर्गिस्तान)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शंघाई सहयोग सम्मेलन (SCO) में जो हरकतें कीं, उसका पूरी दुनिया में खासा मजाक उड़ाया जा रहा है। इमरान के व्यवहार पर सोशल मीडिया पर लोग चटखारे लेकर कमेंट्‍स कर रहे हैं। खुद पाकिस्तान में भी उनकी जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है, क्योंकि वे इस सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर शिष्टाचार तक भूल गए थे।
गुरुवार को एससीओ सम्मेलन का शुभारंभ था और इस दौरान समिट हॉल में नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन समेत तमाम नेताओं का परिचय दिया गया और फिर सभी ने क्रमानुसार हॉल में प्रवेश किया। परंपरा के अनुसार सभी नेताओं के आगमन पर उपस्थित लोग खड़े थे। इमरान खान आए और आखिरी पंक्ति में कुर्सी पर बैठ गए।
इमरान खान को या तो परंपरा की जानकारी नहीं थी या फिर वे जान-बूझकर ऐसा कर रहे थे। कुछ वक्त बाद समिट हॉल में वे अपने हाथ में माला जपते नजर आए। उनकी यह अशिष्टता कैमरों में कैद हो गई और वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की पत्रकार शमा जुनेजो ने ट्‍वीट किया कि इमरान ने एससीओ में एक बार फिर देश को नीचा दिखाया। जब बड़े नेता खड़े थे तो वे बैठे रहे। चंद सेकंड के लिए सिर्फ तब खड़े हुए, जब उनका नाम लिया गया। इसके बाद वे फिर बैठ गए।
शुक्रवार को जब सभी नेताओं को लाल कारपेट से गुजरकर हॉल में पहुंचना था, वहां भी इमरान की भद पिटी। असल में कार से उतरने के बाद उनके हाथों में कागजों के रूप में कुछ नोट्‍स थे। वे नोट्‍स लेकर ही हॉल में जाने लगे तभी उनके देश के एक अधिकारी ने उनसे ये नोट्‍स ले लिए ताकि वे सम्मान के साथ हॉल में प्रवेश कर सकें।
18 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बने इमरान खान इतने विचलित थे कि फोटो सेशन में खुद को कहां खड़े रखना है, यह तक भूल गए। उन्हें पुतिन के पास खड़े होना था लेकिन वे कोने में जाने लगे। तभी उन्हें उचित स्थान का खयाल आया। यही नहीं, अंत में ग्रुप फोटो में सभी नेताओं ने विक्ट्री का साइन बनाते हुए फोटो खिंचवाया लेकिन इमरान ने हाथ नीचे ही रखे।

मेट्रो मैन की खरी खरी केजरीवाल को,महिलाओं की मदद करनी है तो सीधे खाते में पैसा डाल,नौटंकी मत पेल

‘मेट्रो मैन’ श्रीधरन ने अनुरोध किया कि पीएम, केजरीवाल सरकार की महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा योजना के लिए सहमत न हों
श्रीधरन ने पीएम को पत्र लिखकर, मेट्रो में मुफ्त यात्रा की अनुमति नहीं देने का आग्रह
दिल्ली मेट्रो में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP सरकार के प्रस्ताव को ‘गैर-व्यवहार्य’ करार देते हुए, दिल्ली मेट्रो के पूर्व प्रमुख ई श्रीधरन ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्ताव के लिए सहमत नहीं होने का आग्रह किया क्योंकि यह “खतरनाक की घण्टी” साबित होगी। प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में, ‘मेट्रो मैन‘ के रूप में लोकप्रिय श्रीधरन ने कहा, अगर दिल्ली सरकार महिला यात्रियों की मदद करने के लिए “इतनी उत्सुक” है, तो वह मेट्रो पर यात्रा मुफ्त करने के बजाय सीधे उनकी यात्रा की लागत का भुगतान कर सकती है।
श्रीधरन ने कहा कि जब 2002 में दिल्ली मेट्रो का पहला खंड खोला जाना था, तो उन्होंने दृढ़ निर्णय लिया था कि किसी को यात्रा रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा – यहां तक कि तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहार वाजपेयी ने उस स्टेशन की यात्रा करने के लिए खुद एक टिकट खरीदा था जहां से मेट्रो के पहले खंड का उद्घाटन किया गया था।
श्रीधरन ने कहा – “मैं बहुत ईमानदारी से आपसे अनुरोध करता हूं कि महोदय, दिल्ली सरकार की मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के प्रस्ताव से सहमत नहीं हों। अगर दिल्ली सरकार महिला यात्रियों की मदद करने के लिए उत्सुक है, तो मैं सुझाव दूंगा कि दिल्ली सरकार मेट्रो में यात्रा मुफ्त करने के बजाय महिला यात्रियों को उनकी यात्रा की लागत का सीधे भुगतान कर सकती है,”।
श्रीधरन का दो पन्नों का पत्र ।
“अब, अगर महिलाओं को दिल्ली मेट्रो में मुफ्त यात्रा रियायत दी जाती है, तो यह देश में अन्य सभी महानगरों के लिए एक खतरनाकमिसाल कायम करेगा। दिल्ली सरकार का तर्क है कि राजस्व घाटे की डीएमआरसी को प्रतिपूर्ति की जाएगी, यह एक खराब समाधान है,” पूर्व डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक ने कहा।
डीएमआरसी केंद्र और दिल्ली सरकार का एक संयुक्त उद्यम है, और एक शेयरधारक समुदाय के एक हिस्से को रियायत देने और दिल्ली मेट्रो को “अक्षमता और दिवालियापन” में धकेलने के लिए एकतरफा निर्णय नहीं ले सकता है, श्रीधरन ने कहा।
उन्होंने कहा – यहां तक कि डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सहित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी टिकट खरीदते हैं, जब वे आधिकारिक कर्तव्यों पर मेट्रो में यात्रा करते हैं।