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BREAKING NEWS : दिल्ली से एक फोन 30 सेकेंड का,संजय राउत ने माफी मांगी,उद्धव ठाकरे के तोते उड़े,

दिल्ली से सिर्फ एक फोन आया 30 सेकेंड का उद्धव ठाकरे संजय राउत से लेकर सारे नेता सांस रोके माफी मांगने लगे।
संजय राउत समेत उद्धव ठाकरे को मुंह की खानी पड़ी है,बाहर से बैठ कर बयानबाज़ी और सत्ता में रह कर साझीदार को सम्हालने का फर्क पता पड़ गया है।
इंदिरा गांधी से जुड़े बयान पर संजय राउत का यू-टर्न, कहा- मैं माफी मांगता हूंकांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा और संजय निरुपम ने गुरुवार को शिवसेना सांसद संजय राउत से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई उनकी कथित टिप्पणी वापस लेने को कहा था.
 इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) पर दिये एक विवादित बयान को शिवसेना (Shiv sena) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने वापस ले लिया है. उन्होंने कहा, ‘अगर मेरे बयान से कोई भी आहत हुआ है तो मैं माफी मांगता हूं. मैंने हमेशा कांग्रेस के नेताओं का समर्थन किया है.’
कांग्रेस की आपत्ति पर संजय राउत ने कहा, ‘मैंने हमेशा इंदिरा गांधी, पंडित नेहरू, राजीव गांधी और गांधी परिवार के प्रति जो सम्मान दिखाया, वह विपक्ष में होने के बावजूद किसी ने नहीं किया. जब भी लोगों ने इंदिरा गांधी पर निशाना साधा है, मैं उनके लिए खड़ा हुआ हूं.’
बता दें कि एक कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य राउत ने बुधवार को दावा किया था कि इंदिरा गांधी करीम लाला से मुंबई में मुलाकात करती थीं. करीम लाला, मस्तान मिर्जा उर्फ हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार मुंबई के बड़े माफिया सरगना थे, जो 1960 से लेकर अस्सी के दशक तक सक्रिय रहे.
मिलिंद देवड़ा ने जताई आपत्ति
कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा और संजय निरुपम ने इस बयान पर आपत्ति जताई थी. देवड़ा ने कहा कि नेताओं को उन प्रधानमंत्रियों की विरासत गलत तरीके से पेश करने से बचना चाहिए, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन्होंने ट्वीट किया, ‘इंदिरा जी एक सच्ची देशभक्त थीं, जिन्होंने कभी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया.’ देवड़ा ने कहा, ‘कांग्रेस की मुंबई इकाई का पूर्व अध्यक्ष होने के नाते मैं संजय राउत जी से उनके गलत बयान को वापस लेने का अनुरोध करता हूं. राजनेताओं को दिवंगत प्रधानमंत्रियों की विरासत को गलत तरीके से पेश करने से बचना चाहिए.’
संजय निरुपम ने बताया- ‘मिस्टर शायर’
मुंबई कांग्रेस के एक और पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने कहा कि राउत ने गांधी के खिलाफ अगर ‘झूठा अभियान’ जारी रखा तो उन्हें ‘पछताना’ पड़ेगा. राउत द्वारा ट्विटर पर अक्सर दूसरों की कविताएं साझा किए जाने का संदर्भ देते हुए निरुपम ने ट्वीट किया, ‘बेहतर होगा कि शिवसेना के मिस्टर शायर दूसरों की हल्की-फुल्की शायरी-कविताएं सुनाकर महाराष्ट्र का मनोरंजन करते रहें. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार करेंगे तो उन्हें पछताना पड़ेगा. कल उन्होंने इंदिरा गांधी के बारे में जो बयान दिया है वह उन्हें वापस लेना चाहिए.’

वो शख्स जिसने दाऊद इब्राहिम को पांव के नीचे दबा कर मारे थे 101 चांटे, दाऊद इब्राहिम माफी मांगता भाग था

पहला डॉन भले ही हाजी मस्तान मिर्जा को कहा जाता हो लेकिन सच तो यह है कि उसके भी पहले मुंबई पर अगर कोई राज करता थआ तो वह था करीम लाला। जिस वक्त करीम लाला का रुतबा शबाब पर था उस वक्त उसकी पठान गैंग की मुंबई में तूती बोलती थी। हाल ही में शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एक विवादित बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि खुद इंदिरा गांधी करीमा लाला से मिलने आती थीं। इस बयान के बाद एक बार फिर करीम लाला का नाम चर्चा में आ गया है।
अफगानिस्तान से आया था करीम लाला
अफगानिस्तान के कुनाप से 1930 के दशक में अब्दुल करीम शेर खान मुंबई (तब का बंबई) आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखने वाले करीम लाला को शोहरत और ताकत की जुनून की हद तक चाहत थी। इसी वजह से पहले वह पेशावर गया उसके बाद मुंबई आ गया था। जिस वक्त उसने पहली बार मुंबई में कदम रखा वह 21 साल का था। साउथ दिल्ली के ग्रांट रोड स्टेशन के किराए के मकान में रहने वाले करीम ने सबसे पहले वहीं जुए का एक अड्डा खोला। इसी अड्डे से मुंबई के पहले माफिया करीम लाला का उदय हुआ था।
मुंबई का अंडरवर्ल्ड डॉन रहा पठान गैंग का मुखिया करीम लाला फिर चर्चा में है। बुधवार को शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा दावा किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में पुराने डॉन करीम लाला से मिलने आती थीं। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में राउत के इस बयान ने खलबली मचा दी है।
कहा जाता है कि करीम लाला ने एक बार डी कंपनी का सरगना दाऊद इब्राहिम को लात-घूसों से जमकर पीटा था। वह डॉन हाजी मस्तान से पहले मुंबई में अपराधियों का सरगना था। करीम लाला का असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था।
काम की तलाश में अफगानिस्तान से पहुंचा था मुंबई
करीम लाला अफगानिस्तान में पैदा हुआ था। वह पश्तून था और करीब 21 साल की आयु में काम की तलाश में भारत आया था। 1930 में पेशावर से मुंबई (तत्कालीन बंबई) पहुंचकर उसने छोटे मोटे काम धंधे करना शुरू किया लेकिन उसे यह रास नहीं आया।
करीम लाला घर से संपन्न था और उसे ज्यादा पैसा कमाने की बहुत चाहत थी। इसके लिए उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। सबसे पहले उसने मुंबई के ग्रांट रोड स्टेशन के पास एक मकान किराए पर लेकर उसमें सोशल क्लब नाम से जूए का अड्डा खोला। इस क्लब ने देखते ही देखते मुंबई में अपनी धाक जमा ली।
उसके इस क्लब में जुआ खेलने मुंबई के कई नामी गिरामी सेठ आते थे। जहां से उसकी जान-पहचान भी बनने लगी। जुए के अलावा उसने मुंबई पोर्ट पर कीमती गहनों, सोने, हीरों की तस्करी में भी हाथ आजमाया। आजादी के पहले तक उसने इस धंधे से बहुत पैसा कमाया।
करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदाराजन में वर्चस्व की लड़ाई
मुंबई में उन दिनों करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदाराजन अपना-अपना वर्चस्व स्थापित करने में लगे हुए थे। खून-खराबे और धंधे को हो रहे नुकसान को देखते हुए तीनों ने मिलकर काम और इलाकों का आपस में बंटवारा कर लिया। इससे तीनों अपने-अपने क्षेत्र में शांति से काम करने लगे।
जब दाऊद इब्राहिम को करीम लाला ने लात-घूसों से पीटा
कुछ समय बाद मुंबई पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल इब्राहिम कासकर के दो बेटे दाऊद इब्राहिम कासकर (दाऊद इब्राहिम) और शब्बीर इब्राहिम कासकर हाजी मस्तान की गैंग से जुड़ गए। दोनों ने करीम लाला के एरिया में तस्करी का धंधा शुरू कर दिया।
इससे नाराज होकर करीम लाल ने दाऊद को पकड़कर खूब पीटा था। यहां से भागकर दाऊद ने किसी तरह अपनी जान बचाई थी। लेकिन, बाद में फिर एक बार दाऊद ने करीम लाला के इलाके में धंधा शुरू किया। जिसके बाद दाऊद को कड़ा सबक सिखाने के लिए 1981 में पठान गैंग ने दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या कर दी। इसके बाद दाऊद ने करीम लाला के भाई रहीम खान की 1986 में हत्या कर दी।
90 साल की उम्र में 19 फरवरी 2002 को मुंबई में करीम लाला की मौत हो गई।

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दिल्ली के शाहीन बाग़ में। वही शाहीन बाग़ जहाँ पुलिस पर पत्थर फेंके गए, आगजनी की गई, दंगे किए गए और सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी सस्ता प्रचार स्टंट करते हुए दिखते हैं और मीडिया उन्हें देश-विदेश में आंदोलनकारियों के रूप में दिखाता है। क्यों? क्योंकि एक 20 दिन की नवजात बच्ची वहाँ मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज कराने पहुँची है। चौंक गए न? मीडिया में तो यही चल रहा है- सीएए की सबसे कम उम्र की प्रदर्शनकारी उम्मी हबीबा, जिसका जन्म हुए अभी महीना भर भी नहीं हुआ। वो मोदी के ख़िलाफ़ धरना दे रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के चलते 15 दिसंबर से बंद कालिंदी कुंज-शाहीन बाग मार्ग को खोलने की जनहित याचिका पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई की। दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को 15 दिसंबर से बंद कालिंदी कुंज-शाहीन बाग मार्ग मामले को देखने का निर्देश दिया है। बंद पड़े कालिंदी कुंज-शाहीन बाग मार्ग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि जनहित का ध्यान रखें और कानून-व्यवस्था कायम करें। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष याचिका आई, जिसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि सड़क बंद होने से रोजाना लाखों लोगों को कठिनाई होती है और वे पिछले एक महीने से अलग-अलग रास्तों से जाने के लिए बाध्य हैं। वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दाखिल याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त को कालिंदी कुंज-शाहीन बाग पट्टी और ओखला अंडरपास को बंद करने के आदेश को वापस लेने का निर्देश देने की मांग की गयी है।
अब से एक महीने पहले तक शायद दिल्ली के ही बहुत से लोगों ने शाहीन बाग का नाम नहीं सुना होगा. आज हालत ये है कि ट्विटर पर हर शहर शाहीन बाग ट्रेंड कर रहा है. इसकी वजह है पिछले एक महीने से शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहा अनोखा प्रदर्शन. बड़ी संख्या में महिलाएं यहां शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रही है. और अब यही देश के कई शहरों में हो रहा है. कोलकाता के पार्क सर्कस मैदान से, गया के शांति बाग से, यूपी के प्रयागराज से, कर्नाटक के मैंगलोर से ऐसी तस्वीरें आती जा रही हैं. हर जगह शाहीन बाग की तरह ही महिलाओं ने प्रदर्शन का मोर्चा संभाला हुआ है…सवाल है कि क्या ये सिर्फ लोगों का आंदोलन है ये इसके पीछे कोई बड़ा सियासी खेल खेला जा रहा है.
राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है. दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को हटने की अपील की जा रही है, लेकिन सभी लोग अभी भी डटे हुए हैं. बुधवार दोपहर यहां प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर तैयार किया गया और खिलाया भी गया. बता दें कि 15 दिसंबर से हजारों की संख्या में लोग शाहीन बाग इलाके में जुटे हुए हैं.
हटने को तैयार नहीं लोग, तैयार हुआ लंगर
दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से मंगलवार को दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को आदेश दिया गया था कि वह कानून के मुताबिक फैसला ले और जनहित को ध्यान में रखे. शाहीन बाग पर जो प्रदर्शन हो रहा है उसकी वजह से दिल्ली से नोएडा आने वाला रास्ता बंद है. पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों से अपील की गई है कि वो खुद हट जाएं.
हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने CAA वापस होने तक प्रदर्शन ना रोकने को कहा है. दोपहर को यहां जब प्रदर्शन जारी था तो वॉलेंटियर्स ने सभी के लिए लंगर तैयार किया और खिलाया

दलित महिला से महीनों गैंगरेप करते रहे,मोहम्मद ज़ाहिद,मोहम्मद अतहर,मुसलमान बनाने दबाव,नाबालिग बेटी की मांग

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh) से महिला का गैंगरेप कर अश्लील वीडियो बनाने का मामला सामने आ रहा है. इतना ही नहीं आरोपियों ने पीड़िता को ब्लैकमेल कर उसकी बेटी से नाजयज संबंध बनाने और धर्मपरिवर्तन का दबाव भी बनाया. पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, लूट, एससी-एसटी एक्ट, अभद्रता, धमकाने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. आरोपियों की तलाश की जा रही है.
जानें पूरा मामला
अलीगढ़ में थाना जवां क्षेत्र के एक गांव की अनुसूचित जाति की महिला ने गांव के मुस्लिम समुदाय के दो युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म कर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है. महिला का आरोप है कि युवकों ने उसकी घिनौनी वीडियो बना ली है. फ‍िर उसे वायरल करने की धमकी दे रहे हैं. इतना ही नहीं बदनाम करने की धमकी देकर बेटी के साथ भी संबंध बनवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं.
गैंगरेप कर बनाया अश्लील वीडियो
एसएसपी कार्यालय पहुंची पीड़िता ने बताया कि उसका पति एक मुकदमे में दोषी करार होने के बाद जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. परिवार में वह और एक बेटी है. वह खेत में काम कर परिवार का पालन पोषण करती है. दो माह पहले खेत में काम करने के दौरान गांव के मोहम्मद अफतर ने उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की. एक परिचित से शिकायत करने पर उसने माफी मांग ली. पीड़िता के मुताबिक इसके बाद अफतर ने अपने दोस्त मोहम्मद जाहिद के साथ मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया.
ब्लैकमेल कर बेटी से संबंध और धर्मपरिवर्तन का दबाव
पीड़िता ने बताया कि दरिंदों ने उससे पैसे भी लूट लिए और उसकी अश्लील वीडियो बना ली. अब वे वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर दो माह से लगातार रेप कर रहे हैं. दरिंदो की हवस यहीं शान्त नहीं हुई अब वे बेटी संग भी संबंध बनवाने और धर्म परिवर्तन कराने के लिए दबाव बना रहे हैं.
आरोपियों की तलाश जारी
महिला की शिकायत पर एसएसपी ने मामले में जवां थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश द‍िया. जवां इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने बताया कि अफतर और जाहिद पर सामूहिक दुष्कर्म, लूट, एससी-एसटी एक्ट, अभद्रता, धमकाने आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. आरोपी फरार हैं. गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है.

22 जनवरी को फांसी पर लटकने से बच सकते हैं गैंगरेप आरोपी,कोर्ट में चली चाल कानून में फंसी,वकीलों ने उलझाया पेंच

निर्भया कांड के एक दोषी मुकेश ने निचली अदालत की ओर से जारी डेथ वारंट को रुकवाने के लिए दिल्‍ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. इस पर बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान दिल्‍ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि दोषियों को 22 जनवरी को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती है. उन्‍होंने दलील दी कि दया याचिका खारिज होने के 14 दिनों बाद फांसी होगी, ऐसे में मुकेश की याचिका प्रीमेच्‍योर (समयपूर्व) है. बता दें कि निचली अदालत ने निर्भया कांड के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी देने का फैसला सुनाया है.
मामले में दिल्‍ली सरकार की ओर से हाई कोर्ट में पेश हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राहुल मेहरा ने कहा कि 21 जनवरी को ट्रायल कोर्ट के पास जाया जाएगा. यदि तब तक दया याचिका खारिज होती है तब भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, 14 दिन की मोहलत वाला नया डेथ वारंट जारी करना होगा. ऐसे में किसी भी सूरत में 22 जनवरी को डेथ वारंट पर अमल करना संभव नहीं है, लिहाजा यह याचिका (डेथ वारंट रुकवाने वाली अर्जी) प्रीमेच्‍योर है.
कोर्ट ने भी उठाया सवाल
मुकेश की याचिका पर दिल्‍ली हाई कोर्ट ने भी सवाल उठाया. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस मनमोहन ने कहा कि (तिहाड़) जेल अधिकारियों की ओर से दोषियों को पहला नोटिस जारी करने इतनी देर क्‍यों हुई? साथ ही तल्‍ख‍ टिप्‍पणी करते हुए जज ने कहा कि यह साफ है कि दोषियों ने कैसे सिस्‍टम का दुरुपयोग किया…ऐसे में तो लोग सिस्‍टम पर भरोसा ही खो देंगे.
दिल्‍ली पुलिस ने भी जताई आपत्ति
कोर्ट में मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्‍ली पुलिस ने भी डेथ वारंट रुकवाने संबंधी दोषी मुकेश की याचिका पर आपत्ति जताई. पुलिस की ओर से दलील दिया गया, ‘वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट दोषियों की अपील खारिज करता है और साल 2020 में दया याचिका दाखिल की जाती है. यह एक बड़ा गैप है. दोषी ने इस मामले में जानबूझकर देरी की. जेल मैनुअल के हिसाब से अपील खारिज होने के बाद दोषी को दया याचिका दाखिल करने के लिए सात दिन का वक्‍त मिलता है.
निर्भया गैंगरेप (Nirbhaya Gang Rape) मामले में दोषी मुकेश की याचिका दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने खारिज कर दी है. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा कि दिल्ली सरकार के समक्ष (सामने) जैसे ही ये याचिका आई, उसे फौरन खारिज करते हुए बिजली की गति (तीव्रता) से उपराज्यपाल (एलजी) अनिज बैजल को भेज दी गई. उन्होंने कहा कि वो निर्भया मामले में दोषियों को सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.
बता दें कि दोषी मुकेश ने दिल्ली हाईकोर्ट से डेथ वॉरंट को रद्द करने की मांग की है. उसकी याचिका पर बुधवार को अदालत में सुनवाई हुई. दिल्ली सरकार ने इस दौरान कहा कि 22 जनवरी को निर्भया के चारों दोषियों की फांसी नहीं होगी, क्योंकि इनमें से एक की दया याचिका लंबित है. दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि दोषियों का दया याचिका अलग-अलग अगर दाखिल करना, वयस्था को हताश करने वाला है. उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को निर्भया के दोषियों को फांसी नहीं हो सकती क्योंकि फांसी दया याचिका के खारिज होने के 14 दिन के बाद होगी ऐसे में मुकेश की याचिका प्री-मैच्योर है.

BREAKING NEWS :10 करोड़ रुपये मांगे उप मुख्यमंत्री ने टिकट के लिए

यह सनसनीखेज आरोप लगाने वाला कोई पार्टी का साधारण कार्यकर्ता नही,उस सीट का विधायक है।
दिल्ली की बदरपुर सीट से विधायक एनडी शर्मा ने आम आदमी पार्टी के नेता और उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने टिकट के लिए 10 करोड़ रुपए की मांग की थी।
एएनआई के मुताबिक शर्मा ने कहा कि आप नेता सिसोदिया ने मुझे अपने घर पर बुलाया था और कहा था कि रामसिंह बदरपुर से टिकट चाहता है और इसके लिए वह 20-21 करोड़ रुपए भी दे रहा है। शर्मा ने कहा- उन्होंने मुझसे टिकट के लिए 10 करोड़ रुपए की मांग की थी। मैंने उनका प्रस्ताव मानने से इंकार कर दिया।
आम आदमी पार्टी ने रामसिंह को बदरपुर विधानसभा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। शर्मा ने कहा कि मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और अब मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगा।
उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। मुख्‍यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एक बार फिर नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सिसोदिया पटपड़गंज सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

दिल्ली चुनाव: केजरीवाल ने घोषित कर दिए पूरे 70 नाम,देखिए पूरी सूची,कई विधायकों की टिकट कटी

केजरीवाल ने सबको पीछे छोड़ते हुए एक मुश्त 70 सीट पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
लोकसभा का चुनाव हार चुके दिलीप पांडे, आतिशी, चड्ढा पर AAP का दांव, कई विधायकों के कटे टिकट
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने 46 मौजूदा विधायकों पर फिर से भरोसा जताया है। खास बात यह है कि AAP ने पिछले साल लोकसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके 3 उम्मीदवारों को विधायकी का चुनाव भी लड़ाने का फैसला किया है
AAP ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए घोषित किए उम्मीदवार, कई विधायकों के टिकट कटेलोकसभा चुनाव हार चुके दिलीप पांडे, राघव चड्ढा और आतिशी पर AAP ने विधानसभा चुनाव में भी खेला दांव,हाल ही में कांग्रेस छोड़कर AAP में आए शोएब इकबाल और राम सिंह नेताजी को भी दिया टिकट।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने 46 मौजूदा विधायकों पर फिर से भरोसा जताया है। खास बात यह है कि AAP ने पिछले साल लोकसभा चुनाव में शिकस्त खा चुके 3 उम्मीदवारों को विधायकी का चुनाव भी लड़ाने का फैसला किया है। कांग्रेस छोड़कर आए राम सिंह और शोएब इकबाल जैसे नेताओं को पार्टी ने टिकट का इनाम दिया है।
लोकसभा चुनाव लड़ चुके 3 उम्मीदवारों पर दांव
कहा जा रहा था कि पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं देगी। लेकिन AAP की लिस्ट में 3 ऐसे नाम हैं जो दिल्ली में पिछले लोकसभा चुनाव में उतरे थे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दिलीप पांडे को पार्टी ने तिमारपुर सीट से मैदान में उतारा है। वह 2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से उतरे थे। इसी तरह लोकसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार रहीं आतिशी को कालकाजी विधानसभा सीट से उतारा गया है। दक्षिणी दिल्ली सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके राघव चड्ढा को राजेंद्र नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
पंकज पुष्कर, एनडी शर्मा, असीम के कटे टिकट
पिछली बार 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने अपने कई विधायकों के टिकट काट दिए हैं। इनमें तिमारपुर से पंकज पुष्कर, मटिया महल से असीम अहमद खान और बदरपुर से नारायण दत्त शर्मा का नाम प्रमुख है। दिल्ली कैंट से कमांडो सुरेंद्र का टिकट काटकर वीरेंद्र सिंह कादियान को टिकट दिया गया है। इसी तरह त्रिलोकपुरी से राजू धिंगान का टिकट काटकर रोहित कुमार मैहरोलिया को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस से आए शोएब और राम सिंह को टिकट
हाल ही में कांग्रेस छोड़कर AAP का दामन थामने वाले पूर्व विधायक शोएब इकबाल को मटिया महल और राम सिंह नेताजी को बदरपुर सीट से मैदान में उतारा गया है। इसी तरह विनय मिश्रा को विधायक आदर्श शास्त्री का टिकट काटकर द्वारका से उम्मीदवार बनाया गया है।
मौजूदा विधायक की जगह नए नाम
1.तिमारपुर से मौजूदा विधायक पंकज पुष्कर का टिकट काटकर दिलीप पांडे को उम्मीदवार बनाया गया
2.बवाना से मौजूदा विधायक रामचंद्र का टिकट काटकर जय भगवान उपकार को उम्मीदवार बनाया गया
3. मुंडका से सुखबीर दलाल का टिकट काटकर धर्मपाल लाकड़ा को उम्मीदवार बनाया गया
4. पटेल नगर से हजारीलाल चौहान का टिकट काटकर राजकुमार आनंद को उम्मीदवार बनाया गया
5. हरी नगर से जगदीप सिंह का टिकट काटकर राजकुमारी ढिल्लों को उम्मीदवार बनाया गया
6. द्वारका से आदर्श शास्त्री का टिकट काटकर विनय मिश्रा को टिकट दिया गया
7. दिल्ली कैंट से कमांडो सुरेंद्र का टिकट काटकर वीरेंद्र सिंह कादियान को टिकट दिया गया
8. राजेंद्र नगर से विजेंद्र गर्ग का टिकट काटकर राघव चड्ढा को उम्मीदवार बनाया गया
9. कालकाजी से अवतार सिंह का टिकट काटकर आतिशी को उम्मीदवार बनाया गया
10. बदरपुर से नारायण दत्त शर्मा का टिकट काटकर राम सिंह नेताजी को टिकट दिया गया
11 त्रिलोकपुरी से राजू धिंगान का टिकट काटकर रोहित कुमार मैहरोलिया को टिकट दिया गया
12. कोंडली से मनोज कुमार की जगह कुलदीप कुमार को टिकट दिया गया
13. सीलमपुर से हाजी इशराक का टिकट काटकर अब्दुल रहमान को उम्मीदवार बनाया गया
14. गोकुलपुर से चौधरी फतेह सिंह का टिकट काटकर चौधरी सुरेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया गया
15. मटिया महल से आसिम अहमद खान की जगह शोएब इकबाल को टिकट दिया गया

कांग्रेस का शर्मनाक बयान,सरदार पकड़ाया इसलिए चुप भाजपा,आरएसएस,मुसलमान होता तो आसमान फाड़ देते

राजनीति में नेताओं का प्रिय हथियार है जातिवाद धर्म और बंटवारा।कांग्रेस ने फिर साबित कर दिया।देवेन्द्र सिंह के सिख होने पर चुप रहने का आरोप कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया है।अधीर रंजन चौधरी के DSP खान वाले बयान पर बीजेपी लाल, कहा- कांग्रेस का पाकिस्तान से है कनेक्शन।
जम्मू-कश्मीर के डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और बीजेपी में तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस ने जहां देविंदर की गिरफ्तारी में धार्मिक ऐंगल निकाला वहीं, बीजेपी ने आरोप लगाया कि इस पार्टी का जरूर पाकिस्तान के साथ कोई न कोई कनेक्शन है।
 
navbharat times

आतंकियों की मदद करने में गिरफ्तार j& K के डीएसपी देविंदर सिंह पर BJP और CONGRESS में जुबानी जंग शुरू हो गई है। बीजेपी ने आज कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि देश की इस सबसे पुरानी पार्टी का पाकिस्तान के साथ कुछ न कुछ कनेक्शन जरूर है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी में धर्म ढूंढने पर करारा प्रहार करते हुए बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस ने वही किया है जिसमें वह निपुण है, भारत के ऊपर हमला और पाकिस्तान को बचाने की कोशिश। दरअसल, अधीर ने कहा था कि आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार डीएसपी का नाम देविंदर सिंह की जगह देविंदर खान होता तो सोशल मीडिया पर आरएसएस की ट्रोल आर्मी हंगामा बरपा देती।
‘कांग्रेस ने धर्म भी ढूंढ लिया’
इस पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘आव देखा न ताव, कांग्रेस ने धर्म ढूंढ लिया है। आतंकवाद पर धर्म की राजनीति करना कांग्रेस का राजनीतिक तरीका रहा है। भगवा आतंकवाद, हिंदू आतंकवाद जैसे शब्द कांग्रेस ने ही गढ़े हैं। सोनिया गांधी के इशारे पर यह सब हो रहा है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कुछ तो गड़बड़ है, कुछ तो कनेक्शन पाकिस्तान के साथ है। वरना, बार-बार वही जुबान पाकिस्तान बोलता है। शाम तक हाफिज सईद और इमरान खान, दोनों का ट्वीट आ जाएगा समर्थन में। हेडलाइंस चलने शुरू हो गए हैं पाकिस्तान के मीडिया में। वहां के मीडिया ने इस विषय को उठा लिया है। आप इंतजार कीजिए आज फिर से हाफिज सईद कहेगा, ‘आई लव यू कांग्रेस।’ वह पहले भी कह चुका है कि मैं कांग्रेस से बहुत प्यार करता हूं। वह फिर से कांग्रेस के साथ मोहब्बत का इजहार करेगा।

आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार डीएसपी का नाम देविंदर सिंह की जगह देविंदर खान होता तो सोशल मीडिया पर आरएसएस की ट्रोल आर्मी हंगामा बरपा देती। अब पुलवामा हमले की भयावह घटना के पीछे असल में किसका हाथ था, इसकी भी दोबारा जांच जरूरी है।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी

DSP का आंतकियों के साथ कनेक्शन, इसलिए गिरफ्तार
पात्रा ने कहा कि डीएसपी का आतंकियों के साथ कनेक्शन निकला और इसीलिए उसकी गिरफ्तारी हुई है। कांग्रेस हिंदुओं को आंतकवादी साबित करने की लगातार कोशिश करती रही है। शशि थरूर, रणदीप सुरजेवाला और पी. चिदंबरम कहते रहे हैं कि भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा। तरुण गोगोई ने कहा था मोदी जी हिंदू जिन्ना हैं।

क्या राहुल, सोनिया को पुलवामा हमलावरों पर शक है?

पात्रा ने कहा कि अधीर और सुरजेवाला ने अब दूसरा सवाल उठाया है कि पुलवामा अटैक की फिर से जांच की जाए। उन्होंने कहा, ‘मैं राहुल गांधी और सोनिया गांधी से पूछता हूं कि क्या आपको पुलवामा के हमलावरों को लेकर रत्ती भर भी संशय है?’

देविंदर सिंह कौन है? 2001 संसद हमले में उसकी क्या भूमिका है? पुलवामा हमले में उसकी क्या भूमिका है जहां वह डीएसपी था? क्या वह हिज्बुल आतंकियों को अपनी मर्जी से ले जा रहा था या वह सिर्फ एक मोहरा था और मुख्य साजिशकर्ता कहीं और है? क्या यह बड़ी साजिश है।
सोमवार को कांग्रेस नेता सुरजेवाला का ट्वीट


अधीर ने बयान पर दी सफाई

अपने बयान पर मचे बवाल के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी नेता कह रहे हैं कि हमें यूपी, कर्नाटक की मिसाल का पालन करना चाहिए। इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने फायरिंग की जिसमें लोग मारे गए। इन्हीं कारणों से मैं यह कहने पर विवश हुआ कि क्यों आरएसएस-बीजेपी देविंदर सिंह मुद्दे पर चुप है। क्या देविंदर खान नाम होने पर भी ये ऐसे ही चुप रहते।’

CAA विरोधियों ने चालू किया फर्जीवाड़ा, जनता का समर्थन खत्म होने पर

दिल्ली पुलिस के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी फोटो डाल कर CAA विरोधी अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।सजगता के कारण कामयाब नही हो पाए

इन तस्वीरों को फेसबुक और ट्विटर पर हज़ारों बार शेयर किया गया। दरअसल, इन तस्वीरों को फोटोशॉप किया गया है। तख्तियों में लिखी गई बातों को एडिट कर के पूरी तरह बदल दिया गया है। ये फोटो तब का है, जब वकीलों और दिल्ली पुलिस के बीच संघर्ष भड़क गया था।

फैक्ट चेक पुलिस
फ़र्ज़ी फोटो: इसे फेसबुक और ट्विटर पर हज़ारों बार शेयर किया गया
नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध के नाम पर जहाँ एक तरफ़ खुल कर हिन्दू विरोधी अजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ वामपंथियों की मंडली दुष्प्रचार व अफवाह फैलाने में भी लगी हुई है। इसी क्रम में कुछ फोटो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कुछ पुलिसवालों को सीएए विरोधी तख्तियाँ लेकर सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इन तस्वीरों में पुलिसकर्मी “नो सीएए, नो एनआरसी”, “वी अपोज एनआरसी एन्ड सीएए”, “मासूमों पर लाठीचार्ज अब हमसे न हो पाएगा” और “नो एनआरसी, नो कैब” लिखी तख्तियाँ लेकर धरना देते हुए दिख रहे हैं।
इन तस्वीरों को फेसबुक और ट्विटर पर हज़ारों बार शेयर किया गया। दरअसल, इन तस्वीरों को फोटोशॉप किया गया है। तख्तियों में लिखी गई बातों को एडिट कर के पूरी तरह बदल दिया गया है। ये फोटो तब का है, जब वकीलों और दिल्ली पुलिस के बीच संघर्ष भड़क गया था। वकीलों ने दिल्ली पुलिस पर हमला कर दिया था और उन पर पत्थरबाजी की थी। यहाँ तक कि इस फोटोशॉप्ड तस्वीर को फ़िल्म निर्माता अपर्णा सेन ने भी शेयर किया:
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इस फोटो को ‘द वीक’ ने नवंबर 5, 2019 को शेयर किया गया था। ख़बर थी कि वकीलों द्वारा की गई हिंसा के ख़िलाफ़ पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है। इस तरह से नवंबर 2019 की ख़बर को जनवरी 2020 में बदल कर पेश किया जा रहा है। असली तस्वीर में तख्तियों पर लिखा हुआ है- “Policemen are also humans” और एक वकील के फोटो साथ “Arrest Him” भी लिखा हुआ है। असली तस्वीर को यहाँ देखें:
असली फोटो: वकीलों के ख़िलाफ़ धरना देती पुलिस
उस समय दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच विवाद हो गया था, जिसमें बाद में हिंसक संघर्ष के रूप ले लिया था। उसके बाद वकीलों ने पुलिसकर्मियों को पीटना शुरू कर दिया था। इसीलिए, ये सीएए विरोधी पोस्ट की फोटो नहीं है।

गद्दार DSP देवेंद्र सिंह का 5वा राउंड था,हर राउंड के 12 लाख,घर से लाकर पहनाता था पगड़ी,ठहराता था घर मे,छिनेगा पदक

पुलिस इन सभी के पीछे पिछले दो-तीन दिनों से लगी हुई थी। तीनों कार (नंबर जेके 03 एच 1738) से श्रीनगर से दोपहर बाद निकले। इनके पीछे पुलिस भी लगी हुई थी। अनंतनाग के वानपोह इलाके में गाड़ी रोक ली गई। गाड़ी में सवार सभी पगड़ी लगाए हुए थे ताकि किसी को शक न होने पाए। इनके चंडीगढ़ जाने की बात भी सामने आ रही है। फिलहाल, पुलिस सारी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश में जुटी हुई है।
एयरपोर्ट पर तैनात डीएसपी को गत 15 अगस्त को राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला था। आतंकवाद के खिलाफ सफल ऑपरेशन चलाने के लिए एसओजी में तैनाती के दौरान आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर से डीएसपी बनाया गया। बाद में फिरौती मांगने की शिकायत पर एसओजी से हटाने के साथ ही निलंबित किया गया था। लेकिन बाद में बहाल कर श्रीनगर पुलिस कंट्रोल रूप में तैनात कर दिया गया। यहां से पिछले साल श्रीनगर एयरपोर्ट पर तैनात किया गया।
आतंकी नवीद शोपियां इलाके में कई पुलिसकर्मियों की हत्या में शामिल रहा है। इसके साथ ही अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सेब की खरीद के लिए बाहरी राज्यों से पहुंचे ट्रक चालकों की शोपियां में हत्या की घटनाओं में भी शामिल था। शोपियां में वह डीएसपी आशिक टाक के वाहन पर हमले में भी शामिल था, जिसमें तीन पीएसओ और ड्राइवर की मौत हो गई थी। बटगुंड में तीन अन्य पीएसओ की हत्या में भी वह शामिल रहा था।
एक पुलिस अधिकारी ने सूत्रों को बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि देविंदर सिंह आतंकियों से पैसे लेकर उन्हें बनिहाल सुरंग पार कराते थे। इस बार भी 12 लाख रुपये में डील हुई थी। वह खुद गाड़ी में इसलिए बैठे थे ताकि कोई पुलिस अधिकारी को वाहन में बैठा देखकर न रोकेगा न टोकेगा। जांच में यह भी पता चला कि नवीद बाबू ने ये पैसे न सिर्फ रास्ता पार कराने बल्कि जम्मू में शेल्टर देने के लिए भी दिए थे। सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि कम से कम पांच बार डीएसपी ने आतंकियों को बनिहाल सुरंग पार कराने और जम्मू में शेल्टर देने के बदले पैसे वसूले हैं।
इस बीच इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को सौंप दी गई है। इस बात को जांच के दायरे में रखा गया है कि कहीं आतंकी दिल्ली में 26 जनवरी से पहले कोई वारदात करने तो नहीं आ रहे थे? डीएसपी देविंदर सिंह को हिजबुल कमांडर सैयद नवीद मुश्ताक उर्फ बाबू और इरफान शफी मीर के साथ शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को एजेंसियों ने श्रीनगर में इंदिरा नगर स्थित उसके घर की तलाशी ली। यहां से कई चीजें बरामद हुई हैं, लेकिन पुलिस ने उसका ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। नवीद के साथ पकड़ा गया दूसरा शख्स वकील है और वह पांच बार पाकिस्तान जा चुका है। आरोप है कि वह वहां ‘हैंडलरों’ के संपर्क में था।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ अरेस्ट किए गए डीएसपी देविंदर सिंह को पद से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त डीएसपी देविंदर पर आरोप है कि उसने श्रीनगर के बादामी बाग कैन्टोन्मेंट के बगल में स्थित अपने घर में आतंकियों को पनाह दी और उनके जम्मू जाने का इंतजाम भी किया। सुरक्षा एजेंसियों को शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि डीएसपी आतंकियों को जम्मू ले जाने के लिए 12 लाख रुपये लिया करता था। पद से निलंबन की कार्रवाई के बाद एजेंसियों ने डीएसपी देविंदर के श्रीनगर एयरपोर्ट स्थित ऑफिस को सील किया जा सकता था।
देविंदर सिंह जम्मू-कश्मीर पुलिस के आतंकवाद रोधी विशेष अभियान समूह (एसओजी) में एक सब-इन्स्पेक्टर के रूप में शामिल हुए थे और वह वीरता के लिए प्रतिष्ठित पुलिस पदक हासिल करने के साथ डीएसपी रैंक पर तेजी से पहुंचे। उन्हें यह वीरता पुरस्कार आतंकवाद रोधी ड्यूटी के लिए मिला। देविंदर सिंह से अब खुफिया ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग व मिलिट्री इंटेलिजेंस टीम पूछताछ करेगी। सूत्रों ने कहा कि देविंदर सिंह से उनका राष्ट्रपति वीरता पदक पुरस्कार लिया जा सकता है। इस प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
इस मामले की जांच में एनआईए ने भी दिलचस्पी दिखाई है और वह पुलिस रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद देविंदर, नवीद और दूसरे आतंकियों को हिरासत में लेने की मांग कर सकती है। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि कहीं वे कोई बड़े हमले को तो अंजाम देने नहीं जा रहे थे।
आतंकवादियों को कार में ले जाते हुए गिरफ्तार हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह से पूछताछ में पता चला है कि वह लंबे समय से इन आतंकियों के संपर्क में थे। साथ ही यह भी खुलासा हुआ कि वह 2018 में भी इन आतंकियों को लेकर जम्मू गया था। यही नहीं, वह आतंकियों को अपने घर में पनाह भी देता था। जम्मू कश्मीर पुलिस फिलहाल देविंदर और उसके साथ पकड़े गए आतंकी नवीद से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि कहीं वे कोई बड़े हमले को तो अंजाम देने नहीं जा रहे थे।
देविंदर को 13 जनवरी को कुलगाम जिले में श्रीनगर-जम्मू नैशनल हाइवे पर एक कार में गिरफ्तार किया गया था। वह हिज्बुल कमांडर सईद नवीद, एक दूसरे आतंकी रफी रैदर और हिज्बुल के एक भूमिगत कार्यकर्ता इरफान मीर को लेकर जम्मू जा रहा था। बता दें कि अगस्त 2019 में देविंदर को राष्ट्रपति के हाथों वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है। अब यह पदक छीन सकता है।
पंजाब में पढ़ता है नवीद का दूसरा भाई
इस मामले की जांच में एनआईए ने भी दिलचस्पी दिखाई है और वह पुलिस रिमांड की अवधि खत्म होने के बाद देविंदर, नवीद और दूसरे आतंकियों को हिरासत में लेने की मांग कर सकती है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नवीद की मां और उसका भाई फिलहाल जम्मू में हैं और वह शायद जवाहर टनल के जरिए सुरक्षित जम्मू जाने और वहां कुछ दिन बिताने के लिए सिंह को पैसे देता था। पुलिस ने बताया कि नवीद का एक दूसरा भाई पंजाब में पढ़ाई करता है।
अपने घर पर नवीद को लेकर गया था
अभी तक की जांच के मुताबिक देविंदर शुक्रवार को इंदिरा नगर स्थित अपने आवास में नवीद को लेकर आया था। वे यहां से शनिवार को जम्मू के लिए रवाना हुए थे। सिंह इंदिरा नगर में एक नया घर बनवा रहा है और उसका परिवार बगल में एक रिश्तेदार के घर रहता है। देविंदर पर इससे पहले भी कथित गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्तता, भ्रष्टाचार, उत्पीड़न, अधीनस्थ कर्मचारियों से हथियार छीनना और अपने पोस्टिंग इलाके में स्थानीय लोगों के उत्पीड़न जैसे कई आरोप लगे हैं।
नवीद वांछित कमांडरों में था
नवीद दक्षिणी कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक सबसे वांछित कमांडरों में से एक था। पुलिस को काफी समय से उसकी तलाश थी। खासतौर से 2018 में सेब बागानों में काम करने वाले गैर-कश्मीरी लोगों की हत्या में उसका नाम आने के बाद से। नवीद ने ‘सुरक्षित यात्रा’ के बदले में कितनी रकम दी थी, इसकी जांच अभी की जा रही है। देविंदर के साथ पकड़े गए दोनों आतंकियों पर करीब 20 लाख रुपये का इनाम था।
‘पिछले साल भी आतंकियों को लेकर जम्मू गया था’
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘देविंदर पिछले साल भी इन आतंकियों को लेकर जम्मू गया था। इसलिए वे एक दूसरे पर भरोसा करते थे। पिछले साल की घटना के बारे में संभवत: किसी को भनक नहीं लग पाई। मीर शायद इस डील में बिचौलिए के तौर पर जुड़ा था।’ जम्मू कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर में देविंदर के आवास पर छापा मारा और वहां से हथियार बरामद हुआ है। देविंदर इससे पहले पुलवामा में तैनात थे, जहां नवीद और वे एक दूसरे के संपर्क में आए थे।