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आरक्षण नही हटने दूंगा,चाहे कुछ हो-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया है।किसी भी हाल में आरक्षण खत्म नही होने देंगे हिंदुस्तान से।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस की तरफ से इस मसले पर मोदी सरकार पर दबाव बनाते हए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही जा रही है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi) ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा और आरएसएस के डीएनए को आरक्षण चुभता है।
राहुल गांधी (Rahul gandhi) ने कहा कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा आरक्षण के खिलाफ है, वह किसी भी तरीके से आरक्षण को भारत के संविधान से निकालना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले इन्होंने रविदास मंदिर तोड़ा क्योंकि जो एससी-एसटी कम्युनिटी है, ये लोग उसे आगे नहीं बढ़ने देना चाहते हैं। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की रणनीति आरक्षण को रद्द करने की है, लेकिन बीजेपी वाले कितना भी सपना देख लें, ऐसा कभी नहीं होगा।
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद शुरू हुआ है जिसमें उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया जिसमें राज्य सरकार से कहा गया था कि वह प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए डेटा जुटाए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से यह पता करने को कहा था कि एससी-एसटी कैटिगरी के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं, जिससे प्रमोशन में रिजर्वेशन दिया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है।

ANI

@ANI

Rahul Gandhi: BJP & RSS’s ideology is against reservations. They never want SC/STs to progress. They’re breaking the institutional structure. I want to tell SC/ST/OBC&Dalits that we’ll never let reservations come to an end no matter how much Modi Ji or Mohan Bhagwat dream of it.

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राहुल गांधी ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण को लेकर जो बयान दिया है उससे साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आरक्षण को खत्म करना चाहती है लेकिन कांग्रेस उसके सपने को पूरा नहीं होने देगी। उन्होंने संसद भवन परिसर में सोमवार को कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) लगातार संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब उन्होंने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को मिले आरक्षण के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस वर्ग के हितों की रक्षा करेगी और उनको मिले आरक्षण को खत्म नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोगों की आज़ादी को खत्म कर रही है। संसद में किसी को बोलने नहीं दिया जाता है। खुद उनको संसद में बोलने से रोक कर उनके एक चुने हुए प्रतिनिधि के हक को छीना गया है। राहुल गांधी ने कहा कि दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को चुभता है और वह किसी भी तरह से आरक्षण मिटाना चाहते हैं, लेकिन उनको ऐसा नहीं करने दिया जाएगा।

सनसनीखेज खुलासा: शाहीनबाग में बिरयानी के लिए फ्लैट बेचने वाला,भामाशाह नही ड्रामाशाह,असदुद्दीन ओवैसी की मजलिस का पुराना कार्यकर्ता

राजनेता और राजनैतिक पार्टियों से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं,सत्ता और भीड़ के लिए जितनी ड्रामेबाजी की जाए कम है।एक सरदार ने फ्लैट बेच दिया शाहीनबाग कि जनता के लिए खूब उछाला गया,भामाशाह शाह तक कहा गया।जबकि उपरोक्त व्यक्ति असदुद्दीन ओवैसी की मजलिस से सालो से जुड़ा हुआ है।

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ करीब दो महीने से धरना प्रदर्शन चल रहा है. इस प्रदर्शन में लोग विभिन्न तरीके से हिस्सेदारी कर रहे हैं. इनमें से ही एक शख्स हैं डीएस बिंद्रा जो प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर लगा रहे हैं. उन्होंने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के भोजन का इंतजाम करने के लिए उन्होंने अपना फ्लैट तक बेच दिया है.
शाहीन बाग में लंगर लगाने वाले डीएस बिंद्रा पेशे से दिल्ली हाई कोर्ट में वकील हैं. उनका दावा है कि प्रोटेस्ट में लोगों की सेवा करने के लिए उन्होंने अपना फ्लैट तक बेच दिया है. उनका कहना है कि वह गुरुद्वारे में भी लंगर लगाते हैं, लेकिन बेहतर यह है कि अब देश के उन लोगों की सेवा की जाए जो संविधान की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं.
डीएस बिंद्रा बताते हैं कि उन्होंने इसी तरह का आंदोलन कर रहे लोगों के लिए दिल्ली के खुरेजी और मुस्तफाबाद में लंगर लगाने की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में इसे वहीं के साथियों के हवाले कर दिया और अब वह शाहीन बाग में लंगर खिला रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह शाहीन बाग में पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘हम किसी से भी कैश नहीं ले रहे हैं. फिर भी पंजाबी के साथ अन्य सभी समुदायों के लोगों का साथ मिल रहा है. कोई सब्जी लेकर आ रहा है, कोई रिफाइंड तेल लेकर आ रहा है. इस तरह जनता से हर तरह की मदद मिल रही है.’
इन दिनों बिंद्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह खुद को AIMIM का सिपाही बता रहे हैं. इस बारे में सवाल पूछने पर बिंद्रा ने कहा, ‘मुझे किसी राजनीतिक दल से कोई मतलब नहीं है. मैं यहां पर सेवा करने आया हूं. मैंने कभी कहीं पर भी किसी पार्टी को सपोर्ट करने की बात नहीं कही है. हां, हर इंसान किसी न किसी राजनीतिक दल से प्रभावित जरूर होता है. मैं तो वीपी सिंह से लेकर राजबब्बर, जनमोर्चा, जेडीयू और AIMIM का समर्थन करता रहा हूं. लेकिन यहां पर मेरा किसी पार्टी से कोई लेनादेना नहीं है.’
डीएस बिंद्रा ने कहा कि जब हम परिवार के छह लोग गुरुद्वारा जाते हैं तो माथा टेकते हैं और 50-50 रुपये दान करते हैं. इससे बेहतर है कि हम मानवता के लिए काम करें.
आर्थिक स्थिति के बारे में वह कहते हैं कि वाहे गुरु ने जो दिया है कि उसे रखने का क्या फायदा है. जो ईश्वर ने दिया है उसे लोगों की सेवा में लगाने में ही भला है. फ्लैट इसीलिए बेच दिया कि लंगर का खर्च उठाने के लिए पैसों की जरूरत थी. कैश नहीं था. इसलिए प्रॉपर्टी बेचने का फैसला किया.

【LIVE VIDEOS】 राज ठाजरे की गरज- किसको दिखा रहे हो बे ताकत,रैली का रैली,और तलवार का तलवार से,अब तक की गयी रैली का बाप,

बाला साहेब ठाकरे के वास्तविक उत्तराधिकारी माने जाने वाले (सदैव से) ,राज ठाकरे ने मुम्बई में देश की सबसे बड़ी रैली कर चौंका दिया है,न विरोधियों न समर्थकों ने CAA के इतनी बड़ी रैली की थी।
ठाकरे ने कहा “रैली का जवाब रैली से,गाली का जवाब गाली से और तलवार का जवाब तलवार से दिया जाएगा।
राज ठाकरे ने अपने भगवा रंग को और गाढ़ा करते हुए रविवार को मुंबई के आजाद मैदान तक पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ महा रैली निकाली। नागरिकता कानून को अपना समर्थन देते हुए राज ठाकरे ने रैली में कहा कि यदि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को डर लगता है तो उन्हें भारत की नागरिकता देने में क्या बुराई है?
एनआरसी का समर्थन करते हुए राज ठाकरे ने अपनी रैली में कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है, न सिर्फ हम ने ही मानवता का सारा ठेका ले रखा है, दुनिया के सभी देशों में स्पष्ट प्रावधान हैं कि अगर आप गैर क़ानूनी ढंग से वहाँ रह रहे हैं तो फिर या तो आपको वापस जाना होगा या फिर जेल जाना होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार ठाकरे ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा, “उनकी पार्टी नागरिकता कानून का विरोध करते लोगों को सटीक जवाब देगी। आज का महामोर्चा, नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शनों के जवाब में निकाला गया है। रैली का जवाब रैली से दिया जाएगा, पत्थर का जवाब पत्थर से, और तलवार का जवाब तलवार से।”
रविवार की दोपहर मनसे ने अवैध पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों को देश से निकालने की माँग करते हुए गिरगाँव चौपाटी से आजाद मैदान तक एक विशाल रैली निकाली जिसमें हजारों की संख्या में मनसे कार्यकर्ता शामिल हुए।

कांग्रेस का बड़ा हमला अखिलेश यादव पर घर मे घुस के,कहां गए अखिलेश

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ (Azamgarh) में उनके लापत होने के पोस्टर लगे हैं. यह पोस्टर शनिवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की ओर से शहर में पोस्टर लगाए गए हैं. बता दें कि सीएए विरोध को लेकर जब से मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया है तबसे लोगो अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल खड़े कर रहे हैं, मौके को लपकते हुए कांग्रेस ने सपा चीफ पर पोस्टर वार किया है.
यह पोस्टर शहर के मुसाफिरखाना और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में पोस्टर चिपकाए गए हैं. पोस्टर में जिक्र किया गया है कि सीएए और एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम महिलाओं पर हुई पुलिसिया बर्बरता पर अखिलेश यादव क्यों चुप हैं? अखिलेश यादव 2019 के चुनाव के बाद से लापता हैं. पोस्टर में दिखाया गया है कि इसे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विभाग की ओर से जारी किया गया है.
पोस्टर पर अखिलेश यादव की फोटो लगाई गई है और फोटो के मुंह पर पट्टी लगाई गई है. कांग्रेस के पोस्टर वार को सियासी नजरिए से देखा जा रहा है, क्योंकि सपा मुसलमानों की हमेशा हितैषी होने का दावा करती रही है वहीं इस मुद्दे पर अखिलेश यादव की चुप्पी उनका वोटबैंक माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय को अखर सकती है, वहीं मौके को लपकते हुए कांग्रेस ने सपा के वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश की है.

100 छात्राओं के साथ मौलाना अब्दुल अजीज का मस्जिद पर कब्जा

100 छात्राओं के साथ दो सप्ताह से जमाए है कब्जा
सरकार कर रही निकालने की कोशिश
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की चर्चित लाल मस्जिद पर मौलाना अब्दुल अजीज ने 100 महिला छात्राओं के साथ कब्जा करते हुए खुद को वहां का मौलवी घोषित कर दिया है। अजीज वही मौलाना है, जिसने 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर आतंकी हमला कर 132 बच्चों को मारने वाले आतंकियों का समर्थन किया था।
इस घटना के बाद सरकार ने अजीज को मस्जिद से हटा दिया था, लेकिन वह प्रशासनिक लापरवाही का लाभ उठाकर दो सप्ताह पहले फिर से अंदर घुस गया। इस्लामाबाद के जी -7 इलाके में जामिया हफसा की लगभग 100 छात्राएं भी गुरुवार रात एच -11 स्थित शाखा की सील इमारत में प्रवेश कर गईं। डान समाचार पत्र की शनिवार की रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मस्जिद के चारों तरफ का इलाका सील कर दिया है।
इस्लामाबाद: बीती दो सरकारों की नाक में दम करने के बाद, एक बार फिर विवादास्पद मौलाना अब्दुल अजीज (Maulana Abdul Aziz) ने इस्लामाबाद (Islamabad) की लाल मस्जिद (Lal Masjid) पर कब्जा कर लिया है. अजीज का कहना है कि सरकारी नियंत्रण वाली इस मस्जिद का उन्हें फिर से इमाम बनाया जाए.
इस घटनाक्रम के बाद से इस्लामाबाद के मस्जिद के पास के इलाके में तनाव फैल गया है और मस्जिद के इर्द गिर्द बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात कर मौलाना को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है.
‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना अब्दुल अजीज के साथ उनके जामिया हफ्सा मदरसे की सौ से अधिक छात्राएं भी मस्जिद में मौजूद हैं और मौलाना का समर्थन कर रही हैं. इससे स्थिति और नाजुक हो गई है. चरमपंथी सोच वाले मौलाना अजीज को इस मस्जिद के इमाम के पद से हटा दिया गया था. उनकी मांग है कि उन्हें इस पर पर बहाल किया जाए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद में फिलहाल कोई इमाम या उप इमाम नहीं थे. मौके का फायदा उठाकर अजीज दो हफ्ते पहले मस्जिद में दाखिल हो गए. प्रशासन को इस बारे में बताया भी गया लेकिन कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई और अब नतीजा यह हुआ है कि वह सौ छात्राओं के साथ मस्जिद के बड़े हिस्से को बंद कर अंदर हैं और बाहर सुरक्षाकर्मी मस्जिद की घेराबंदी किए हुए हैं.
अधिकारी मौलाना से बात करने पहुंचे लेकिन मौलाना ने कहा कि वह संघीय मंत्री स्तर के कम किसी व्यक्ति से बात नहीं करेंगे. जुमे की नमाज सख्त पहरे में मस्जिद के एक हिस्से में पढ़ी गई. इस नमाज के बाद किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई.
मौलाना ने फोन पर डॉन से कहा, “अधिकारियों ने जामिया हफ्सा की जगह खाली करने के लिए कहा है और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी दी है. खाने-पीने के समान की सप्लाई भी रोक दी है. लेकिन, हम इस्लाम के लिए डटे रहेंगे. यह लोग देश में शरीयत को लागू नहीं कर रहे हैं.”
सरकार का कहना है कि जामिया हफ्सा जिस जगह पर बना है, उस पर अवैध कब्जा किया गया था. यह जगह प्राकृतिक पानी का स्रोत थी, जहां मदरसा बना दिया गया.

EXIT POLL FRAUD :सारे एग्जिट पोल पक्ष में,फिर केजरीवाल और टीम ने क्यों शुरू किया,EVM का रोना

केजरीवाल की पूरी टीम लगी हुई है EVM की शिकायत करने में,जब सरकार का इतना अच्छा काम और सारे एग्जिट पोल पक्ष में फिर ऐसा क्यों ,आइए बताते हैं।
एग्जिट पोल्स और अंतिम नतीजों के बीच बड़ा अंतर होगा। आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने ईवीएम गड़बड़ी का राग अलापना शुरू कर दिया है, जिससे पता चलता है कि सत्ताधारी पार्टी भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है।
एग्जिट पोल्स के डेटा में सबसे बड़ी गड़बड़ी ये हुई कि दोपहर 3 बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत काफ़ी तेज़ी से बढ़ा। जहाँ दोपहर तक ये लग रहा था कि दिल्ली में मतदाता सुस्त होकर बैठे हुए हैं और वो घरों से नहीं निकल रहे हैं, रात तक के आँकड़े उतने ख़राब भी नहीं हुए जितनी आशंका जताई जा रही है। दोपहर 3 बजे तक मात्र 30% वोटर टर्नआउट था। चुनाव आयोग ने 2:50 में जो आँकड़े ट्वीट किए, उसके हिसाब से उस समय तक महज 29.5% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
जैसा कि आज के दौर में हम देखते हैं, टीवी न्यूज़ चैनलों के बीच किसी भी ख़बर को पहले दिखाने के लिए बड़ी प्रतिस्पर्द्धा चलती है और इसके लिए वो हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लाजिमी है, पहले एग्जिट पोल्स के डेटा दिखाने के लिए भी उनमें होड़ मची होगी। न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों ने 3-4 बजे तक डेटा कलेक्शन का काम पूरा कर लिया होगा, जिसके बाद उस आधार पर टीवी प्रोग्राम्स की रूपरेखा तय की गई होगी। पूरी प्रक्रिया में समय लगना लाजिमी है क्योंकि आजकल न्यूज़ चैनलों में कुछेक बहस के अलावा बाकि कुछ भी पूर्णरूपेण लाइव नहीं होता।
स्क्रिप्टेड शो के जमाने में टीवी न्यूज़ चैनलों में लगी होड़ के बीच उन्होंने गड़बड़ी कहाँ की, आइए देखते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध फाइनल आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली विधानसभा चुनाव में 61.75% वोटिंग हुई है। अगर हम मानते हैं कि लगभग 3 बजे तक के डेटा को न्यूज़ चैनलों ने ध्यान में रखा होगा तो इसका अर्थ ये है कि 32.25% मतदाताओं के एक बड़े समूह में से किसी की राय जाने बिना ही एग्जिट पोल्स जारी कर दिए गए।यानी, लगभग एक तिहाई मतदाताओं को एग्जिट पोल्स में नज़रअंदाज़ कर दिया गया।
3 बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत में तेज़ी से इजाफा हुआ और अगले 1 घंटों में ही आँकड़ा 40.51% पहुँच गया। यानी, 1 घंटे में लगभग 12% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जब आँकड़े इतनी तेज़ी से बढ़ रहे थे, तब न्यूज़ चैनलों ने एग्जिट पोल्स की तैयारी शुरू कर दी थी।
अगर मीडिया ने 4 बजे तक का डेटा लिया होगा, फिर भी 21.24% मतदाताओं में से किसी की राय नहीं जानी गई। यानी, लगभग एक चौथाई मतदाता फिर से एग्जिट पोल्स के दायरे में नहीं आए। कहते हैं, साइलेंट वोटर्स दोपहर के बाद ही निकलते हैं। ये वोटर अगर भाजपा के हुए तो? क्या एग्जिट पोल्स के परिणाम एकदम से नहीं पलट जाएँगे?

7 बंगलादेशी मुसलमान पकड़े योगी पुलिस ने,पार्सल करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश झाँसी के बबीना इलाके में शनिवार (फरवरी 8, 2020) को पुलिस ने 7 बांग्लादेशी लोगों को पकड़ा है। पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे मछली का तेल बेचने के लिए झाँसी आए थे और बस स्टैंड के पास स्थित कर्मा होटल में सभी रुके थे। इनके पास न तो पासपोर्ट थे और न ही कोई भी वैध दस्तावेज, जो कि ये साबित कर सके कि वो भारत के नागरिक हैं। पुलिस ने इन बांग्लादेशियों के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।
पुलिस को इनके यहाँ पर अवैध रूप से रहने की सूचना मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार बांग्लादेशियों की पहचान ढाका के नादौर सिंगरा निवासी मामून शेख, मिलन शेख, मुकुल शेख, मोनू वैध, सीजर शेख, असलम शेख, पालन शेख के रूप में हुई है। इसके साथ ही इनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल सातों बांगलादेशी को जेल भेज दिया गया है।
बबीना पुलिस स्टेशन के एसओ ईश्वर सिंह ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जाँच में यह पाया गया कि ये लोग यहाँ पर अवैध रूप से मछली का तेल बेच रहे थे। उन्होंने कहा कि ये लोग पिछले 7-8 दिन से यहाँ पर रह रहे थे। नगर में अभी और बांग्लादेशियों के मौजूद होने की आशंका जताई जा रही हैं और पुलिस उनकी छानबीन भी कर रही है। पुलिस ने बताया कि जाँच जारी है और अन्य पहलुओं का भी ध्यान रखा जा रहा है। उस होटल संचालक से भी पूछताछ कर रही है जहाँ ये लोग रुके हुए थे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 25 जनवरी को यूपी के मथुरा से साधु के वेश में रह रहे दो बांग्लादेशी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ये दोनों पिछले कई सालों से वृंदावन में साधु बनकर भजन-कीर्तन किया करते थे। दोनों ने दिल्ली में फर्जी कागजात पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिया थ

केजरीवाल सतर्क,पंजाब जैसा हाल न हो जाये,2017 में हर एग्जिट पोल ने बनवा दी थी पंजाब सरकार

एग्जिट पोल के सारे नतीजे वैसे के वैसे ही आप पार्टी के पक्ष में हैं जैसे पंजाब चुनाव में थे और संजय सिंह ने भगवंत मान को शपथ भी दिलवा दी थी मुख्यमंत्री पद की।EVM राग भी चालू कर दिया है आम आदमी पार्टी ने। संजय सिंह ने एक वीडियो ट्वीट कर कहा था, “चुनाव आयोग इस घटना का संज्ञान ले ये किस जगह EVM उतारी जा रही हैं। आस पास तो कोई सेंटर है नहीं।” वहीं, गोपाल राय ने ट्वीट किया, “हमारी विधानसभा बाबरपुर में वोटिंग खत्म होने पर सभी EVM मशीन स्ट्रॉन्ग रूम भेज दी गई। उसके बाद सरस्वती विद्या निकेतन पोलिंग स्टेशन पर एक अधिकारी EVM के साथ पकड़ा गया है। मैं इलेक्शन कमीशन से अपील करता हूॅं कि कि इस पर तुरंत कार्रवाई किया जाए।”
दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के नतीजे 11 फरवरी को आएँगे। शनिवार को करीब 60 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। उसके बाद एग्जिट पोल्स में सत्ता में आप की वापसी का अनुमान लगाया गया है। सभी एग्जिट पोल में आप आसानी से बहुमत के पार जाते दिखाई गई है। बीजेपी की सीटों में 2015 के मुकाबले इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है। हालॉंकि पार्टी बहुमत के करीब पहुॅंचती नहीं दिख रही। एग्जिट पोल की माने तो कॉन्ग्रेस का इस बार भी खाता नहीं खुल सकता है।
हालॉंकि बीजेपी और कॉन्ग्रेस ने एग्जिट पोल को खारिज कर दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि पार्टी को 48 सीटें मिलेंगी। वहीं, कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा का कहना है कि एग्जिट पोल में जैसा अनुमान लगाया गया है कि उससे कहीं बेहतर पार्टी का प्रदर्शन होगा। उनके अनुसार आप बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी।
11 फरवरी को जब नतीजे आएँगे तो असल तस्वीर दूसरी अनुमानों के बिल्कुल उलट भी हो सकती है। फिलहाल आसानी से बहुमत पाती दिख रही आप जादुई आँकड़े से पहले भी ठिठक सकती है। इसके कारणों की पड़ताल करने से पहले 2017 की एक घटना पर गौर करते हैं।
2017 में पंजाब में विधानसभा के चुनाव हुए थे। जैसे इस बार मतदान से दो महीने पहले तक दिल्ली विधानसभा चुनाव को एकतरफा बताया जा रहा था, उसी तरह राजनीतिक पंडित पंजाब में आप की सरकार बनने की भविष्यवाणी कर रहे थे। बीजेपी-शिअद गठबंधन की सरकार पंजाब में 10 साल से चल रही थी। एंटी इंकबेंसी फैक्टर काम कर रहा था। कॉन्ग्रेस गुटबाजी से उसी तरह त्रस्त बताई जा रही थी, जैसे आज दिल्ली में उसकी हालत है। 11 मार्च को पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आने थे। आप जीत को लेकर इस कदर आश्वस्त थी कि रूझानों के आने से पहले ही दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर बैनर और गुब्बारों से सजावट कर दी गई थी। मंच तैयार था। बैंड बाजे सब रेडी। पार्टी नेता मीडिया से बातचीत में लगातार पंजाब में सरकार बनाने का दावा कर रहे थे। उस समय आप में रहे कुमार विश्वास ने दावा किया था कि 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में 75 से ज्यादा सीटें जीत पार्टी दिल्ली की तरह सरकार बनाएगी।
लेकिन, रूझानों के साथ ही आप का जश्न काफूर हो गया। नेता, कार्यकर्ता सब गायब। केजरीवाल के घर के बाहर सन्नाटा पसरा गया। जब अंतिम नतीजे आए तो 77 सीटों के साथ कॉन्ग्रेस पंजाब की सत्ता में लौटी थी। आप 20 सीटों पर सिमट गई थी।
पंजाब जीतने को लेकर आप का आत्मविश्वास और राजनैतिक पंडितों के दावे कितने ऊँचे थे इसकी एक और मिसाल देखिए। आप नेता संजय सिंह जो फिलहाल राज्यसभा के सांसद हैं का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें पार्टी नेता पंजाब में जीत की खुशी मनाते दिख रहे थे। साथ ही पार्टी के कुछ नेताओं का मजाक भी उड़ाया जा रहा था। वीडियो में संजय सिंह यह भी कहते दिख रहे थे कि पार्टी 100 से ज्यादा सीट जीत रही है और सरकार बनाने के लिए तैयार है।
अब 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए हुए चुनावों पर लौटते हैं। बीते साल के आखिर तक हर कोई दिल्ली के विधानसभा चुनावों में आप के प्रचंड जीत का दावा करता नजर आ रहा था। इसमें कथित गोदी मीडिया भी शामिल है। लेकिन, शनिवार (8 फरवरी 2020) को आए एग्जिट पोल्स में भले बीजेपी बहुमत से दूर दिख रखी है, पर सभी पोल में उसकी सीटें 2015 की 3 सीटों से काफी ज्यादा बताई गई है। मसलन, टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल में बीजेपी को 26, न्यूजएक्स-पोलस्टार्ट में 14, इंडिया न्यूज नेशन में 14, रिपब्लिक-जन की बात में 9-21, एबीपी न्यूज-सी वोटर में 12, टीवी9-सिसरो में 15 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। जाहिर है कि यह चुनाव उतना तो एकतरफा नहीं है जितना दावा किया जा रहा था।

【2 LIVE VIDEOS】 मौत के खौफ से चीखता शहर,सुनकर ,देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे,1 करोड़ 10 लाख की आबादी घरों में बंद

महामारी का रूप लेते जा रहे कोरोना वायरस से चीन के वुहान शहर में पहली बार दो विदेशी नागरिकों की मौत हुई है। इनमें अमेरिका की एक महिला और जापान का एक पुरुष शामिल है। इनको मिलाकर शनिवार तक चीन में मरने वालों की संख्या 723 हो गई है, जबकि 34,598 लोग इससे संक्रमित पाए गए हैं। यह आंकड़ा 200-03 में सार्स नामक बीमारी से हुई 774 लोगों की मौत के करीब पहुंचते जा रहा है। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने शनिवार को अपने नागरिक की मौत की पुष्टि की है।
प्रवक्ता ने कहा कि 60 साल की अमेरिकी महिला की छह फरवरी को वुहान के एक अस्पताल में मौत हो गई। वुहान में अधिकारियों ने कोरोना वायरस से किसी विदेशी नागरिक की मौत का यह पहला मामला बताया है। हालांकि, वुहान के अस्पताल में जापान के 60 साल के एक नागरिक की भी मौत हुई है। उसे निमोनिया की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में कोरोना वायरस के लक्षण भी उसमें पाए गए थे। जापान के विदेश मंत्रालय ने टोक्यो में इसकी घोषणा की। मंत्रालय ने कहा कि बीमारी की पहचान में मुश्किल के चलते जापानी व्यक्ति की मौत का कारण वायरल निमोनिया बताया गया है। इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि 19 विदेशी नागरिकों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है ।
चीन ने रहस्यमय कोरोना वायरस के प्रसार का केंद्र माने जा रहे एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले वुहान समेत पांच शहरों में आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी गई है। इनमें 75 लाख की आबादी वाले हुआंगगांग, इझोऊ, झिजियांग और कियानजियांग शहर शामिल हैं। गुरुवार से इन पांचों शहरों में सभी तरह के सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगा दी गई। सांस लेने में परेशानी का कारण बनने वाला यह वायरस चीन के कई शहरों को अपनी चपेट में लेने के बाद अमेरिका तक पहुंच गया है।
वुहान शहर का नाम भले ही चीन के बीजिंग या शंघाई जैसे शहरों की लिस्ट में नहीं लिया जाता है लेकिन दुनिया के नक़्शे पर इसका अपना वजूद है.वो जगह जहां से कोरोना वायरस की महामारी की शुरुआत हुई, हक़ीक़त में वो एक ऐसा महानगर है जो दुनिया के सभी हिस्सों से जुड़ा हुआ है.वुहान की आबादी को लेकर अलग-अलग आंकड़ें हैं, इसलिए इस पर एक राय बनाना थोड़ा मुश्किल है.
सरकारी आंकड़ों की मानें तो वुहान की जनसंख्या तक़रीबन एक करोड़ 10 लाख है.हालांकि साल 2018 के संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक़ इस शहर में 89 लाख लोग रहते हैं.

 

लंदन के बराबर
चाहे जो हो, ये शहर आकार में लंदन के बराबर है और वाशिंगटन डीसी से कहीं बड़ा.एक अनुमान के मुताबिक़ वुहान दुनिया का 42वां और चीन का सातवां सबसे बड़ा शहर है.वुहान के आकार और इसकी आर्थिक अहमियत से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आख़िर इस शहर से निकला वायरस कितनी तेज़ी से एशिया भर में फैल गया.
यहां तक कि अमरीका भी इससे अछूता नहीं रहा.
थोड़े शब्दों में कहें तो कोरोना वायरस इतनी तेज़ी से इसलिए फैल पाया क्योंकि बड़ी तादाद में लोग इस शहर में आते हैं और यहां से कोरोना का संक्रमण लेकर घर चले गए।वुहान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साल 2016 में दो करोड़ यात्रियों की आमद-रफ़्त हुई.यहां से लंदन, पैरिस, दुबई और दुनिया के तमाम बड़े शहरों के लिए सीधी उड़ान सेवाएं ली जा सकती हैं.यांग्त्ज़ी नदी के किनारे बसे इस शहर में हाईटेक मैन्युफ़ैक्चरिंग से लेकर पारंपरिक चीज़ों का निर्माण होता है.यहां कई औद्योगिक क्षेत्र हैं, उच्च शिक्षा के 52 संस्थान हैं. ऐसा दावा है कि चीन में सबसे ज़्यादा अंडरग्रैजुएट छात्र इसी शहर में पढ़ते हैं.
दुनिया की 500 बड़ी कंपनियों में से 230 कंपनियों ने वुहान में निवेश कर रखा है. वुहान में निवेश करने वाले देशों में फ्रांस प्रमुख है.
वायरस कैसे फैला1886 से 1943 के बीच जब वुहान हांकोउ के नाम से जाना जाता था, तब फ्रांस को यहां विशेष रियायत हासिल थी. फ्रांस की सौ कंपनियों ने वुहान में निवेश किया है.जिनमें कुछ ज्वॉयंट वेंचर्स भी हैं. वुहान में एक बहुत बड़ी पनबिजली परियोजना है. यहां दुनिया भर से सैलानी भी बहुत आते हैं.भले ही कोरोना वायरस इस शहर के स्थानीय सीफूड मार्केट से फैला लेकिन यहां आने-जाने वाले लोगों ने अनजाने में इस वायरस को फैलने का मौक़ा दे दिया.
उदाहरण के लिए जिस अमरीकी शख़्स को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था, उसने हाल ही में वुहान की यात्रा की थी.
कोरोना से संक्रमित होने वाले दोनों जापानी भी वुहान से होकर आए थे. कोरियाई मरीज़ तो वहीं रह रहा था.थाईलैंड में संक्रमण का जो मामला सामने आया वो वुहान से आया एक चीनी सैलानी था.वुहान आने-जाने वाले लोग और वुहान से होकर गुज़रने वाले लोगों की संख्या इतनी बड़ी है कि आने वाले चीनी नव वर्ष के मद्देनज़र, इससे कोरोना वायरस के फैलने की रफ़्तार बढ़ गई है.चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने लोगों को वुहान से बचने की सलाह दी और कहा है कि वुहान के लोगों को शहर नहीं छोड़ना चाहिए.

दिल्ली चुनाव का अलका लांबा कांड 【LIVE VIDEO】,दूसरा【live VIDEO】 भी,बदतमीजी लड़के की

दिल्ली के चांदनी चौक से कांग्रेस कैंडिडेट अलका लांबा ने एक AAP कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया है. अलका का आरोप है कि उस शख्स ने उनके बेटे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है.
वाकया नार्थ दिल्ली के ‘मजनू का टीला’ का है, जहाँ आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच की राजनीतिक लड़ाई मारपीट में बदल गई। अलका लम्बा ने न सिर्फ़ केजरीवाल की पार्टी के एक कार्यकर्ता को खदेड़ा बल्कि खींच कर एक चाँटा भी मारा। हालाँकि, वो चाँटा उसे लगा नहीं। अलका लाम्बा कुछ महीनों पहले तक आम आदमी पार्टी में थी लेकिन फिर वो अपनी पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस में चली गईं। लाम्बा ने सोनिया गाँधी से मुलाक़ात भी की थी।
सोशल मीडिया पर अलका लम्बा का AAP कार्यकर्त्ता को चाँटा मारने की कोशिश करते हुए हुए वीडियो भी वायरल हो गया। पुलिसकर्मी AAP कार्यकर्ता को वहाँ से ले गए लेकिन अंत तक अलका लाम्बा उसे वहाँ से खदेड़ती रहीं। उनका आरोप है कि उक्त AAP कार्यकर्ता ने उनके बेटे को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहे थे। अलका लम्बा फ़िलहाल दिल्ली के चाँदनी चौक से कॉन्ग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ रही हैं। पिछली बार वो इसी क्षेत्र से केजरीवाल की पार्टी से विधायक बनी थीं। अब चाँदनी चौक से उम्मीदवार एक्सचेंज हो गए हैं। अर्थात, पछली बार कॉन्ग्रेस की तरफ से मैदान में उतरे प्रह्लाद साहनी इस बार AAP से मैदान में हैं।
अलका लम्बा का केजरीवाल के प्रति गुस्सा हाल ही में तब देखने को मिला था, जब उन्होंने दिल्ली के सीएम के बारे में कहा था कि उन्होंने लड़ाई-झगड़े में ही 5 साल निकाल दिए। आम आदमी पार्टी के नारे ‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’ को अलका लाम्बा ने मजाक करार दिया था। लाम्बा ने कहा था कि बीते 5 साल लड़ाई-झगडे और कोर्ट-कचहरी में नज़र आने वाले केजरीवाल को अब बस भी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार तो जामा मस्जिद के पास भूमाफियाओं से ज़मीन भी खाली नहीं करा पाई। अलका लाम्बा ने दावा किया था कि जहाँ मोहल्ला क्लिनिक बनाए गए, वहाँ कूड़े का ढेर लगा हुआ है।
अलका लम्बा द्वारा आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता को थप्पड़ मारने की घटना के बाद AAP नेता संजय सिंह ने कहा है कि पार्टी उनके ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराएगी। वायरल वीडियो में अलका लम्बा और AAP कार्यकर्ताओं के बीच गाली-गलौज होते हुए भी देखा जा सकता है।
अलका लम्बा का केजरीवाल के प्रति गुस्सा हाल ही में तब देखने को मिला था, जब उन्होंने दिल्ली के सीएम के बारे में कहा था कि उन्होंने लड़ाई-झगड़े में ही 5 साल निकाल दिए। आम आदमी पार्टी के नारे ‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’ को अलका लाम्बा ने मजाक करार दिया था। लाम्बा ने कहा था कि बीते 5 साल लड़ाई-झगडे और कोर्ट-कचहरी में नज़र आने वाले केजरीवाल को अब बस भी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार तो जामा मस्जिद के पास भूमाफियाओं से ज़मीन भी खाली नहीं करा पाई। अलका लाम्बा ने दावा किया था कि जहाँ मोहल्ला क्लिनिक बनाए गए, वहाँ कूड़े का ढेर लगा हुआ है।