वी सी सज्जनार,एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, अपराधी,आतंकी,नक्सली,बलात्कारी, कपड़े में पेशाब कर देते हैं नाम सुनकर

294
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में हुए रेप के चारों आरोपियों को शुक्रवार को हुए एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया। इस मामले में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के भाई डॉक्टर एनसी सज्जन ने कहा है कि उन्हें और उनके घरवालों को सज्जनार के इस ऐक्शन पर गर्व है। एनसी सज्जन ने यह भी कहा कि वह इस घटना के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।
हैदराबाद के बहुचर्चित रेप कांड के सभी चारों अभियुक्तों को पुलिस ने मार दिया है.
पुलिस इसे मुठभेड़ कह रही है जबकि अभियुक्त पुलिस हिरासत में थे. उन्हें वहां मारने का दावा किया जा रहा है, जहां महिला डॉक्टर का जला हुआ शव बरामद किया गया था.
हैदराबाद पुलिस का कहना है कि अभियुक्तों को वहां सीन रिक्रिएशन के लिए ले जाया गया था और उसी दौरान उन सभी ने पुलिस पर हमला कर दिया, जिसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी.
पिछले 10 सालों में हैदराबाद पुलिस इसे तीसरा एनकाउंटर बता रही है, जिसमें माओवादी शामिल नहीं हैं. इससे पहले साल 2008 और 2015 में भी पुलिस एनकाउंटर हुए थे.
साल 2008 और शुक्रवार की सुबह वाली घटना में काफ़ी समानता हैः
वीसी सज्जनार एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं.
1996 बैच के आईपीएस अधिकारी वीसी सज्जनार अविभाजित आंध्र प्रदेश के पुलिस विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं.
वो तेलंगाना के वारंगल और मेदक के एसपी भी रह चुके हैं. फ़िलहाल वो साइबराबाद के कमिश्नर हैं. साल 2018 में उन्होंने यह पद संभाला था.
मेदक के एसपी रहते हुए उन्होंने अफ़ीम तस्कर का एनकाउंटर किया था, जिन पर पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या के आरोप थे.
उनको नक्सल नेता नइमुद्दीन की हत्या के लिए भी याद किया जाता है.
उन्होंने नइमुद्दीन की हत्या तब की थी जब वो आईजी स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच थे.
2008 की वो घटना
साल 2008 में तेलंगाना के वारंगल में भी पुलिस ने इसी तरह के सीन क्रिएशन के दौरान एसिड अटैक के तीन अभियुक्तों को मार दिया था.
उस वक़्त भी पुलिस का कहना था कि सभी तीनों अभियुक्तों ने पुलिस पर हमला बोल दिया था और बचाव में ऐसी कार्रवाई करनी पड़ी थी.
साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार, जो हैदराबाद केस को देख रहे हैं, उस वक़्त वारंगल के एसपी हुआ करते थे.
पुलिस का दावा था कि सनसनीखेज एसिड अटैक के तीनों अभियुक्तों ने पुलिस पर बंदूक और चाकू से हमला बोल दिया था.
पुलिस के मुताबिक़ 2008 के एसिड अटैक कांड के तीनों अभियुक्तों को उस जगह पर ले जाया गया था, जहां उन्होंने घटना के दौरान इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल छिपाई थी.
उनका दावा है कि जैसे ही अभियुक्त मोटरसाइकिल के पास पहुंचे, उन्होंने उसमें छिपाए गए बंदूक और चाकू निकाल लिए और पुलिस वालों पर हमला कर दिया.
दावा है कि पुलिस ने अपने बचाव में जवाबी कार्रवाई की और वो मारे गए.
दरअसल साल 2008 में वारंगल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज की दो छात्राओं पर उनके साथ ही पढ़ने वाले तीन युवकों पर एसिड फेंकने के आरोप लगे थे.
एसिड अटैक में दोनों छात्राएं बुरी तरह घायल हो गई थीं.
यह बात सामने आई थी कि प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद एसिड अटैक की घटना को अंजाम दिया गया था.
दोनों पीड़िताओं में से एक की बाद में मौत हो गई थी.