रेहाना फातिमा सुलेमान जा रही है सबरीमाला सोशल एक्टिविस्ट

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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर तीसरे दिन भी विवाद जारी है। मंदिर के कपाट बुधवार शाम को ही खोल दिए गए थे, लेकिन अभी भी यहां महिलाओं का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। शुक्रवार को भी मंदिर के बाहर जमकर हंगामा और नारेबाजी हो रही है। भारी हंगामे के बीच दो महिलाएं कड़ी सुरक्षा में मंदिर की ओर बढ़ रही हैं। रेहाना फातिमा सुलेमान और हैदराबाद के मोजो टीवी की पत्रकार कविता जक्कल शामिल हैं। पुलिस पत्रकार कविता जक्कल को पंबा से सन्निधानम ले जा रही है। प्रदर्शनकारी महिलाओं से वापस जाने की मांग कर रहे हैं। सन्निधानम में जमे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी भी हालत में 10-50 वर्ष की महिलाओं को मंदिर में नहीं घुसने देंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम सबरीमाला की सुरक्षा कर रहे हैं।

लोगों ने दोनों महिलाओं की इस यात्रा की काफी आलोचना की है. सोशल मीडिया पर कई तरह की टिप्पणी आ रही हैं जिसमें मंदिर जाने का औचित्य पूछा जा रहा है. तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष तमिलसाई सुंदरराजन ने ट्वीट कर लिखा, ‘सबरीमाला पूजा स्थल है जो किसी आस्तिक के लिए है न कि नास्तिकों या सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए जो वहां जाकर दशकों पुरानी परंपरा तोड़ने पर तुले हैं. क्या अन्य धार्मिक कट्टपंथियों के बारे में सुनकर आपको हैरानी नहीं हूई? एक्टिविजम या सेकुलरिजम की आड़ में हिंदुओं की भावनाओं को आहत करना निंदनीय है.’
केरल के देवस्वोम मंत्री ने इस विरोध प्रदर्शन के बारे में कहा, ‘हर उम्र के लोगों को वहां जाने की इजाजत दी जाएगी लेकिन हम इसकी अनुमति नहीं देंगे कि कोई एक्टिविस्ट वहां जाए और अपनी जोर-जबर्दस्ती दिखाए.’