शर्मनाक-21 बन्दूक की सलामी दी मरने के बाद,पूर्व मुख्यमंत्री को,एक से भी फायर नही हुआ

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बिहार के तीन बार मुख्यमंत्री रहे डॉ. जगन्नाथ मिश्रा का 19 अगस्त को दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनका बुधवार को सुपौल जिले के अंतर्गत आने वाले पैतृक गांव बलुआ में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी होने का दावा किया गया। अब वक्त था डॉ. जगन्नाथ मिश्र को राजकीय सम्मानके साथ अंतिम विदाई दिए जाने का, तभी पुलिसकर्मियों की 21 बंदूकों में से एक भी बंदूकें नहीं चलीं। यह देखकर प्रशासनिक अमले के होश फाख्ता हो गए। हैरान करने वाली बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वहां मौजूद थे।
डॉ. जगन्नाथ मिश्र का पार्थिव शरीर बलुआ पहुंचा, जहां पर बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के वक्त एक भी गोली न चल पाने के बाद बिहार पुलिस की लोग जमकर खिंचाई करने में लगे हैं। इस पूरे मामले में सुपौल जिले के एसपी एमके चौधरी ने बात की।
सुपौल एसपी ने क्या दी सफाई?
सुपौल एसपी एमके चौधरी कहते हैं, ‘उसमें ऐम्पटी कार्ट्रिज फायर किया जाता है, जिसमें सिर्फ आवाज होती है। लाइव कार्ट्रिज नहीं होता है। लाइव कार्ट्रिज ड्यूटी के दौरान इस्तेमाल करते हैं। यह ब्लैंक कार्ट्रिज होती है, इसमें पेंदे पर जब चोट पड़ती है तो स्पार्क के साथ महज आवाज उत्पन्न होती है। अब जांच करके पता करा रहे हैं कि इस कार्ट्रिज में क्या दिक्कत थी, किस बैच की कार्ट्रिज थी, कब आई थी, कब से इसका इस्तेमाल नहीं हुआ था। हम इस मामले की जांच कराने के बाद ही कुछ स्पष्ट कर पाएंगे।’
मुख्यमंत्री पद तक तीन बार पहुंचे
गौरतलब है कि जगन्नाथ मिश्रा पहली बार 1975 में राज्य के मुख्यमंत्री बने और अप्रैल 1977 तक इस पद पर रहे थे। उसके बाद 1980 उन्होंने तीन साल के लिए मुख्यमंत्री की कमान संभाली। 1989 में मिश्रा तीन महीने के लिए सीएम बने थे। मिश्रा तीन बार कांग्रेस पार्टी में रहते हुए बिहार के सीएम पद पर पहुंचे थे। मिश्रा ने बिहार में कांग्रेस को बुलंदियों पर पहुंचाया था। फिलहाल वह जेडीयू के सदस्य थे। मिश्रा बिहार में 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में भी फंसे थे। 1996 में सामने आए इस मामले में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव अभी जेल काट रहे हैं।