दुनिया का सबसे शर्मनाक कांड होगा,280 बच्चों के बेचे जाने का अंदेशा,सुप्रीम कोर्ट में पहली बार पहुंचा मामला

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पूर्व में भी यहीं की दो नन बच्चे बेचते हुए पकड़ाई थीं।मदर टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ कथित तौर पर बच्चों के ख़रीद-फरोख्त में लगी हुई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया है कि ईसाई मिशनरी संस्थाओं द्वारा बच्चों को बेचे जाने की जाँच हेतु एक एसआईटी का गठन किया जाए। आयोग की माँग है कि ये एसआईटी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच करे। साथ ही झारखंड में बच्चों के हितों की रक्षा के लिए जाँच हेतु एक समयावधि भी तय करने की भी माँग की गई है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर सजग एनसीपीसीआर पहले बार सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है।
सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, केरल और महारष्ट्र की सरकारों को नोटिस जारी किया है। आरोप है कि झारखंड में मिशनरियों द्वारा बच्चों को बेचे जाने के सम्बन्ध में सरकारी अधिकारियों ने काफ़ी ढुलमुल रवैया अपनाया है। मदर टेरेसा का संगठन कई ‘चिल्ड्रेन होम’ चलता है, जहाँ से इन बच्चों को कथित तौर पर बेचा जा रहा है। इस मामले में झारखंड सरकार को आगाह किया गया था लेकिन जाँच को रोकने के प्रयास होते रहे।
आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर इन चिल्ड्रेन होम्स में रह रहे सभी बच्चों की जानकारी और अन्य विवरण माँगे थे। साथ ही ऐसे सभी शेल्टर होम्स की भी जानकारी माँगी गई थी। आयोग ये देखना चाहता था कि इनमें से कितने रजिस्टर्ड हैं। शेल्टर होम्स में रह रहे बच्चों की एक ‘वैधानिक स्थिति’ होती है, जिसके अनुसार पता चलता है कि वो अनाथ हैं, छोड़ दिए गए हैं या फिर आत्मसमर्पण करने वाले हैं। जुलाई 2018 में आयोग ने राँची स्थित एक ऐसे ही शेल्टर होम का दौरा किया था, जहाँ बड़ी गड़बड़ियाँ पाई गई थीं। इस बारे में झारखंड के पुलिस व प्रशासन को सारी जानकारी दे दी गई थी।
ज्ञात हो कि 2018 में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ की 2 सिस्टर्स बच्चों को बेचने के मामले में गिरफ्तार की गई थीं। 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाएँ यहाँ भर्ती की गई थी। किया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से सिर्फ़ 170 बच्चों का ही रिकॉर्ड दर्ज है। बाकी 280 शिशुओं के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। उनका क्या हुआ? बच्चों को बेचे जाने की पुष्टि हुई थी। वरिष्ठ अधिकारीगण इस बात की तस्दीक में जुटे हैं कि इसके तार कहाँ-कहाँ तक जुड़े हैं।
इस संबंध में एनसीपीसीआर ने कई पीड़ितों से बातचीत भी की है, जिन्होंने कई बड़े खुलासे किए हैं। इसी से मदर टेरेसा की मिशनरी द्वारा की गई गड़बड़ियों के बारे में पता चला था। लेकिन, राज्य सरकारों की नज़रअंदाज़ी के चलते कुछ कार्रवाई नहीं हुई।