Tuesday, November 24, 2020
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5 सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं कभी भी,भाजपा में जाना तय

पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होना है लेकिन राजनीति पार्टियां चुनावी मोड में आ चुकी हैं. नेताओं के बयान आने लगे हैं. मुद्दों की चर्चा भी शुरू हो गयी है. भारतीय जनता पार्टी के सांसद अर्जुन सिंह ने दावा किया है कि टीएमसी के पांच बड़े नेता किसी भी वक्त पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं.

अर्जुन सिंह ने कहा टीएमसी के बड़े नेता सौगत रॉय दिखावा कर रहे हैं. सिंह ने यह दावा तक किया जब वह शनिवार को नॉर्थ 24 परगनास जिले के जगदल घाट पर छठ पूजा के मौके पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने कहा, ‘मैं बार-बार कह रहा हूं कि पांच टीएमसी सांसद किसी भी वक्त इस्तीफा दे सकते हैं और बीजेपी (BJP) में शामिल हो सकते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, टीएमसी में कई नेता नाराज हैं, शुभेंदु अधिकारी भी बड़े नेता है वह भी नाराज हैं. ममता आज इन नेताओं की वजह से लीडर बनी हुई हैं क्योंकि इन्होंने पार्टी को अपना खून दिया मेहनत की. अब ममता बनर्जी अपने भतीजे को पार्टी का मुखिया बनाना चाहतीं हैं. कोई भी बड़ा नेता इसे स्वीकार नहीं करेगा.

भाजपा नेता ने कहा, ‘शुभेंदु अधिकारी को अपमानित किया गया है. उन्हें तृणमूल कांग्रेस छोड़ देना चाहिए. उनके साथ राजनीति हुई और उनके नजदीक रहने वाले लोगों को फसाया गया. कोई भी नेता संघर्ष से आगे बढ़ता है ऐसे नेता का भाजपा में हमेशा से स्वागत किया जायेगा.

ममता ने शुरू किया बंगाली गौरव कार्ड

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस ने फैसला किया है कि पार्टी ‘बंगाली गौरव’ का आह्वान करके भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला करेगी. पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सुर में सुर मिलाते हुए टीएमसी नेताओं ने भाजपा को बार-बार ‘बाहरी’ लोगों की पार्टी कहकर हमला करना शुरू कर दिया है।
मंत्री ब्रात्य बसु ने सवाल उठाते हुए कहा, “बीजेपी ने बंगाल के अपने किसी सांसद को पूर्ण कैबिनेट बर्थ क्यों नहीं दी है? उनका एकमात्र उद्देश्य बंगालियों को नियंत्रित करना है ताकि हम उनके अधीन रहें. क्या हालात इतने खराब हैं कि बंगाल और बंगाली उनके आगे झुक जाएंगे? क्या बंगालियों को दूसरे राज्यों के नेताओं को स्वीकार करना चाहिए जिन्हें हम पर थोपा जाए?”

बसु ने कहा, “क्या वे यूपी या गुजरात में एक भी ऐसा मंत्री बता सकते हैं जिसका सरनेम- चटर्जी, बनर्जी, सेन या गांगुली हो? क्योंकि वे वहां रहने वाले बंगालियों को अपना नहीं मानते! वहां बंगाली बाहरी समझे जाते हैं.”

ममता सरकार के मंत्री बसु ने पूछा, “उत्तर भारतीयों बंगालियों को तब से किनारे करने की कोशिश करते रहे हैं जब से सुभाषचंद्र बोस त्रिपुरी कांग्रेस में हारे थे…वही अब ममता बनर्जी के साथ भी दोहराया जा रहा है. लेकिन वे बोस की ही तरह लड़ रही हैं. बंगाली राष्ट्रवाद के अतीत को कुरेदते हुए बसु ने क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों खुदीराम बोस और बिनॉय-बादल-दिनेश के बलिदानों की भी याद दिलाई.

उन्होंने कहा, “सेल्युलर जेल का नाम सावरकर के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने अंग्रेजों के सामने पांच दया याचिकाएं लिखीं, लेकिन हेमचंद्र कानूनगो, बारिन घोष, उल्लासकर दत्ता के नाम पर क्यों नहीं रखा गया जिन्होंने वर्षों तक यातनाएं सहीं. जब बंगाली क्रांतिकारी इस मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दे रहे थे, तब इन बाहरी लोगों के पुरखे अंग्रेजों की ओर से जमीन पर कब्जा कर रहे थे! मुझे यूपी या गुजरात का एक व्यक्ति दिखाओ जो अंग्रेजों के खिलाफ फांसी पर चढ़ गया हो?

पिछले साल कोलकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा के अपमान का आरोप लगाते हुए बसु ने कहा कि वह “बाहरी लोगों” द्वारा बंगाल और बंगाली संस्कृति पर हमला हुआ था.


बंगाल में “अंदरूनी बनाम बाहरी” की बहस के बीच राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने पलटवार करते हुए कहा, “बीजेपी ने खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित किया है और एक बंगाली डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस पार्टी की स्थापना की थी. वे (टीएमसी) बंगाली गौरव की बात करते हैं, लेकिन उन्होंने बंगालियों के लिए किया क्या है? टीएमसी ने बंगालियों को प्रवासी मजदूरों में बदल दिया है.”

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